दस साल से आरा के दिल में बसा ‘अम्बा डांडिया उत्सव’

दस साल . बेमिसाल! डांडिया की थाप पर थिरका आरा, ‘अम्बा डांडिया उत्सव’ ने बनाई खास पहचान

परिवारों के संग संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम




पटना नाउ |

आरा, 13 अक्टूबर। नवरात्रि की उमंग . पारिवारिक आत्मीयता का रंग . भारतीय संस्कृति की खुशबू और डांडिया की थाप . इन सबके संग ‘अम्बा डांडिया उत्सव’ ने अपने दसवें संस्करण के साथ आरा की सांस्कृतिक पहचान में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया. दस वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा यह उत्सव अब महज एक आयोजन नहीं, बल्कि शहर के परिवारों के मिलन और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने का एक खास मंच बन चुका है.

नवरात्रि के अवसर पर आयोजित दसवां अम्बा डांडिया उत्सव सोमवार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहरवासियों ने अपने परिवार, बच्चों और बुजुर्गों के साथ पारंपरिक परिधानों में शिरकत की. रंग-बिरंगे परिधान, डांडिया की थाप और उत्सव के उल्लास ने पूरे माहौल को जीवंत बना दिया.

कार्यक्रम में जिला कला अधिकारी अनुप्रिया मुख्य अतिथि और डीपीओ नमामि गंगे अमित कुमार सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया और मां दुर्गा की आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए ऐसे आयोजनों को सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता के लिए महत्वपूर्ण बताया.

दसवीं वर्षगांठ पर प्रतिभाओं का सम्मान . 10 श्रेणियों में बांटे गए पुरस्कार

अम्बा डांडिया उत्सव के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रतिभागियों की प्रतिभा और उत्साह को सम्मानित करने के लिए 10 विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए. ईको ट्राईवा की ओर से बेस्ट कपल, बेस्ट डांसर, बेस्ट क्यूट फेस चाइल्ड, बेस्ट कपल डांस, बेस्ट जोड़ीदार और बेस्ट ड्रेस जैसी श्रेणियों में चयनित प्रतिभागियों को आकर्षक गिफ्ट हैंपर देकर पुरस्कृत किया गया.

इस अवसर पर सुधा के प्रबंध निदेशक सुमन, मेडिकॉन हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक बादल विराट, ईको ट्राईवा के प्रबंध निदेशक सोहित कुमार और न्यूज वन नेशन के बिहार-झारखंड हेड मनोज कुमार सिंह और विजय स्टूडियो के प्रबंध निदेशक और बेहतरीन छायाकार हरि जी की उपस्थिति रही. अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसके दस वर्षों के सफर को सराहनीय उपलब्धि बताया.

जब डांडिया बना परिवारों के मिलन का माध्यम
अम्बा डांडिया उत्सव की शुरुआत एक ऐसी सोच के साथ हुई थी, जिसमें पति-पत्नी अपने बच्चों और परिजनों के साथ सुरक्षित, अनुशासित और पारिवारिक माहौल में नवरात्रि का आनंद ले सकें. आयोजन की यही खासियत धीरे-धीरे इसकी पहचान बन गई.

समय के साथ इस पहल ने लोकप्रियता हासिल की और आरा में गरबा व डांडिया संस्कृति को पारिवारिक स्वरूप देने में अपनी अलग जगह बनाई. आज जब विद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में भी डांडिया आयोजनों का चलन बढ़ रहा है, तब अम्बा डांडिया जैसे मंच नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, पारंपरिक परिधानों और सामूहिक उत्सव की परंपरा से जोड़ने का काम कर रहे हैं.

इस आयोजन की खास बात यह रही कि यहां मनोरंजन के साथ पारिवारिक सहभागिता और सामाजिक मेलजोल को भी समान महत्व दिया गया. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भागीदारी ने उत्सव को एक साझा सांस्कृतिक अनुभव बना दिया.

महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
बड़े स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. आयोजन स्थल पर महिला पुलिसकर्मियों की सक्रिय तैनाती रही, जिससे प्रतिभागियों को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराने में मदद मिली.

आयोजन समिति की मेहनत से सफल हुआ दसवां संस्करण
अम्बा डांडिया उत्सव के दसवें संस्करण को सफल बनाने में आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. आयोजन को व्यवस्थित रूप देने और कार्यक्रम को सफल बनाने में ओ पी पांडेय, राकेश राजपूत, मंगलेश तिवारी, स्वीटी कुमारी, समीर कुमार श्रीवास्तव, करिश्मा सिंह, गौरी तिवारी, अदिति राज, अभय विश्वास भट्ट, प्रियांशु भास्कर, हर्षिता विक्रम, जया कुमारी, आलोक कुमार सिंह, प्रियंका कुमारी, रोहित सिंह बजरंगी, चिंताहरण पांडेय, अभिषेक द्विवेदी, शुभम कुमार और सुमित कुमार की समर्पित भूमिका रही.

दस वर्षों का सफर . संस्कृति से जुड़ाव और परिवारों का विश्वास
अम्बा डांडिया उत्सव का दसवां संस्करण इस बात का प्रमाण बना कि जब किसी आयोजन की बुनियाद पारिवारिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता पर रखी जाती है, तो वह धीरे-धीरे शहर की पहचान बन जाता है. आरा में अम्बा डांडिया उत्सव ने इसी पहचान को मजबूत करते हुए एक बार फिर साबित किया कि त्योहारों की असली खूबसूरती अपनों के साथ मिलकर खुशियां बांटने में है. हर साल सबसे पहला डांडिया का उत्सव करा कर संस्था जैसे लोगों में एक कुलबुलाहट पैदा कर कई आयोजनों को कराने के लिए प्रेरित कर जाता है और एक।के बाद एक कई आयोजन होने लगते हैं।

PNCB

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