21 वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी है- नरेंद्र मोदी

14वें प्रवासी भारतीय दिवस का किया उद्घाटन

पासपोर्ट का कलर नहीं देखते, खून का रिश्ता सोचते हैं




हमारे विकास यात्रा में आप हैं  हमारे वैल्यूएबल पार्टनर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बंगलुरु में 14वें प्रवासी भारतीय दिवस का उद्घाटन करते हुए कहा कि 21 वीं सदी हिन्दुस्तान  की सदी है और दुनिया इस सदी को हिन्दुस्तान  की सदी के रूप में याद रखेगी . इससे पहले  उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस को संबोधित करके खुशी महसूस हो रही है. ये एक ऐसा पर्व है जिसमें होस्ट भी आप हैं और गेस्ट भी आप ही हैं. पीएम मोदी ने कहा कि प्रवासी भारतीय जहां रहे, उन्होंने उस धरती को कर्मभूमि बनाया. वो जहां रहे, वहां का विकास किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि विदेशों में भारतीयों को केवल संख्या की वजह से नहीं जाना जता है बल्कि उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया जाता है.मोदी ने कहा कि आज आप उस कर्मभूमि की सफलताओं को उस भूमि में पधारे हैं जहां से आपके पूर्वजों को प्रेरणा मिलती रहती है. हजारों लाखों भाई बहनों, यूके, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, जापान, केन्या, मलेशिया और अन्य देशों रह कर भी भारत की तरक्की में सहयोग दे रहे हैं. प्रवासी भारतीय में देश के विकास के लिए अदम्य इच्छा शक्ति हैं. वो देश की प्रगति में सहयात्री हैं, हमारे विकास यात्रा में आप हमारे वैल्यूएबल पार्टनर हैं. कभी चर्चा होती है ब्रेन ड्रेन की. तब मैं लोगों को कहता था कि क्या बुद्धु लोग ही यहां बचे हैं. लेकिन आज मैं बड़े विश्वास के साथ कहना चाहता हूं कि वर्तमान सरकार ब्रेन ड्रेन को ब्रेन गेन में बदलना चाहते हैं. मैंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की समस्याओं को तरजीह देने की सलाह दे रखी है. विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है. हम पासपोर्ट का कलर नहीं देखते, खून का रिश्ता सोचते हैं.

गिरमिटिया लोग ओसीआई (भारतीय विदेशी नागरिक) कार्ड के योग्य बन सकें इसकी शुरुआत मॉरीशस से की जा रही है. हम देश से बाहर भारतीयों को बेहतर मौके दिलाने के उद्देश्य से एक स्किल डिवलेपमेंट प्रोग्राम प्रवासी कौशल विकास योजना लॉन्च करेंगे. 7 लाख लोग विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं. विदेश में रह रहा प्रत्येक भारतीय यहां के विकास के लिए आतुर है. उनका ज्ञान भारत को असीम ऊंचाईयों पर ले जाएगा. सफल प्रवासी भारतीयों को भारत की विकास से जुड़ने का मौका मिलना चाहिए. खास कर विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हमने कई कदम उठाए हैं. हमने इसके लिए योजना बनाई है. जिसके तहत प्रवासी भारतीयों को भारतीय संस्थानों में तीन महीने कार्य करने का अवसर मिलेगा.

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