सृष्टि चक्र में छेड़छाड़ का परिणाम मानव उठा रहा है -के एन गोविंदाचार्य

प्रकृति केंद्रित विकास ही विकास का सही माॅडल है

यूरोपीय देशों से ब्लैक कार्बन हवा के जरिए हिमालय में पहुंच रहा है। ऐसे में हिमालय में कार्बन की काली परत जमने के कारण ग्लेशियर के पिघलने की आशंका बढ़ गई है।




किरणों की ऊर्जा को कार्बन द्वारा शोषित करने के कारण ग्लेशियरों की सेहत खराब हो रही है। जिस कारण ग्लेशियर में दरार पड़ने की आशंका बढ़ी है
विकासनगर: उत्तराखंड : – पहले गंगा उसके बाद नर्मदा और अब यमुना यात्रा पर निकले गोंविदाचार्य ने देहरादून में कहा प्रकृति केंद्रित विकास ही विकास का सही माॅडल है ।28 अगस्त से यमुना दर्शन यात्रा एवं प्रकृति केंद्रित विकास पर संवाद करते हुए केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि कहा कि यूरोपीय देशों से ब्लैक कार्बन हवा के जरिए हिमालय में पहुंच रहा है। ऐसे में हिमालय में कार्बन की काली परत जमने के कारण ग्लेशियर के पिघलने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने मानव केंद्रित विकास की बजाए प्रकृति केंद्रित विकास की अवधारणा को आगे बढ़़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर अपना ही समूल नष्ट करने पर तुले हैं।

संवाददाताओं को सम्बोधित करते गोविंदाचार्य

भारत की असली ताकत ही प्रकृति और पर्यावरण है। इनकी अनदेखी कर विकास किए जाने पर पर्यावरणीय चक्र असंतुलन और प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप बढ़ना स्वाभाविक है। आज के समय में प्रौद्योगिकी पर लोकपाल, लोकायुक्त जैसी नियंत्रणकारी व्यवस्था की ओर दुनिया को कदम बढ़ाना चाहिए। प्रकृति केंद्रित विकास की दिशा में कार्य करना वक्त की मांग है। प्रकृति केंद्रित विकास की अवधारणा पर संवाद यात्रा का सामाजिक आयाम है।
भारतीय जनता पार्टी के सिद्धांतकार रहे चुके गोविंदाचार्य ने कहा कि ब्लैक कार्बन जमने से हिमालय में बर्फ से टकराकर रिफलेक्ट होने वाली सूर्य की किरणें वापस नहीं जा पा रही। गोविंदाचार्य ने कहा कि किरणों की ऊर्जा को कार्बन द्वारा शोषित करने के कारण ग्लेशियरों की सेहत खराब हो रही है। जिस कारण ग्लेशियर में दरार पड़ने की आशंका बढ़ी है।इसके साथ साथ उन इलाकों में जीवन खतरे में पड़ गया है।


गोविंदाचार्य ने कहा कि अंटार्कटिका में हिमखंड टूटकर बह रहे हैं। जिस कारण 8 समुद्री तटों पर बसे शहरों का जलस्त बढने की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो 5 करोड़ लोगों के सामने आवास और जीवन जीने की समस्या आ खड़ी हो सकती है।केएन गोंविदाचार्य ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, पशु, पेड़-पहाड़, पानी के बीच तालमेल आवश्यक है। सृष्टि चक्र में किसी के साथ भी छेड़छाड़ की गई तो, इसका परिणाम मनुष्य को ही उठाना पड़ेगा। कहा कि मानव जैव विविधता से कटकर नहीं जी सकता है।

गोंविदाचार्य ने कहा कि 200 साल पहले भारत देश विश्व का सबसे धनी देश था। इस पर अर्थशास्त्रियों का मानना है कि उस समय भारत में एक व्यक्ति के पास 8 गोवंश था। जब अंग्रेज गए तो उस समय 1 आदमी पर एक गोवंश छोड़ गए। अब हालात किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने कहा कि वनाच्छादन 33 प्रतिशत होना चाहिए, जो अब घटकर 16 प्रतिशत रह गया है। जबकि घटता जल स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है।


इस मौके पर राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक पवन श्रीवास्तव ने कहा कि माननीय गोविदाचार्य,निलय उपाध्याय एवं अन्य साथियों.के साथ यमुना जी की 18 दिवसीय यात्रा पर यमुनोत्री से प्रयाग तक का कार्यक्रम है ।यमुना दर्शन एवं प्रकृति केंद्रित विकास पर संवाद है इस यात्रा का मुख्य उद्येश्य लोगों को जागृत करना है ।
इस यात्रा में राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन संयोजक पवन श्रीवास्तव ,गंगा यात्रा करने वाले और प्रसिद्ध कवि निलय उपाध्याय के साथ स्वामी देवस्वरूप आनंद, संजय शर्मा, यात्रा मीडिया समन्वयक विवेक त्यागी, अरविंद तिवारी शिरकत कर रहे हैं। 28 अगस्त से शुरू होने वाली यात्रा यमुनोत्री के निकट जानकी चट्टी से शुरू होनी थी लेकिन आवागमन बाधित होने और मौसम खराब होने से अब यात्रा विकासनगर से शुरू होगी। इस यात्रा के दौरान यमुना किनारे प्रकृति के विकास माॅडल पर कार्य कर रहे लोगों के साथ संवाद भी किया जाएगा।

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