स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति की मांग, रिक्तियां निर्धारित करे शिक्षा विभाग

स्नातक ग्रेड में प्रोन्नति के लिए प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश से मिला परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल

नियोजन के लिए नहीं बल्कि प्रमोशन के लिए हो स्नातक शिक्षक पद की रिक्तियों का निर्धारण. यह मांग परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने राज्य सरकार से की है. संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक रवि प्रकाश से मिलकर स्नातक ग्रेड के पदों की रिक्तियों का निर्धारण निदेशालय स्तर पर ही तय करने का अनुरोध किया है .




संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने कहा है कि निदेशालय द्वारा पूरे राज्य में सातवें चरण के नियोजन के पूर्व स्नातक ग्रेड के पद की रिक्तियों के निर्धारण हेतु सभी जिलों को निर्देश दिया गया है किंतु, इसका समुचित तरीके से निर्धारण नहीं किया जा रहा है. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रत्येक मध्य विद्यालय में कक्षा 6 से 8 के लिए हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान सात विषयों के शिक्षकों की आवश्यकता है. प्रावधानों के अनुसार राज्य में अवस्थित 29241 मध्य विद्यालयों में इतनी ही संख्या में प्रत्येक विषय के शिक्षकों की आवश्यकता है. अर्थात, 29243 मध्य विद्यालयों में 29243×7= 2,04,701 शिक्षकों की आवश्यकता है इसके निर्धारण के लिए जिलों से रिक्तियां निर्धारित कराने की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि यह काम निदेशालय स्तर से ही आसानी से किया जा सकता है. इसके लिए जिलावार प्रत्येक विषय में कार्यरत शिक्षकों का संख्यात्मक विवरण प्राप्त करने की आवश्यकता है और कुल आवश्यक स्नातक शिक्षकों की संख्या 2,04,701 में से घटाकर जितना पद रिक्त बचता है उतने पदों पर पूर्व से कार्यरत स्नातक योग्यताधारी शिक्षकों को प्रमोशन देने की आवश्यकता है.
ब्रजवासी ने कहा कि छात्र शिक्षक अनुपात में मध्य विद्यालयों में पूर्व से शिक्षक नियुक्त है किंतु शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत विषयगत शिक्षक के पद पर स्नातक कोटि में उन्हें प्रोन्नति नहीं दिए जाने के कारण छात्र शिक्षक अनुपात में शिक्षकों की उपलब्धता के बावजूद मध्य विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 के बच्चों के लिए विषयवार शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं.
इस मामले में परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसकी सुनवाई के दौरान 13 सितंबर 2019 को सदेह हाजिर होकर तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक रणजीत कुमार सिंह ने उच्च न्यायालय को आश्वस्त किया था कि 3 से 4 माह के अंदर प्रोन्नति दे दी जाएगी किंतु अब तक प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी जिससे शिक्षकों में आक्रोश व्याप्त है और परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ ने पुनः माननीय उच्च न्यायालय में अवमाननावाद संख्या-587/2022 दायर किया है जिस पर विभाग को गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए अन्यथा की स्थिति में अगली सुनवाई के समय पटना उच्च न्यायालय द्वारा संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई तय है.
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के प्रति विभाग पूर्णतः उदासीन है. इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि लगभग दो दशक से कार्यरत शिक्षक अपनी प्रोन्नति के लिए बार-बार उच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ने के लिए विवश हैं और विभाग प्रोन्नति देने के बदले तरह तरह की बहानेबाजी कर रहा है. प्राथमिक शिक्षा निदेशक से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में तिरहुत प्रमंडल के संगठन प्रभारी लखन लाल निषाद, मुन्ना यादव और अमरेंद्र कुमार शामिल थे.

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