बिहार के विकास को आइना दिखाता “कंधे पर लाश”

By pnc Sep 11, 2016

 नुक्कड़ नाटक “कंधे पर लाश” का मंचन 

स्वास्थ्य व्यवस्था पर करारी चोट 




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स्थानीय रंगकर्मी प्रत्येक शनिवार और रविवार को शहर के कई स्थानों पर नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों को विभिन्न विषयों पर आधारित नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति करते हैं .जागरूकता के साथ विकास के अपने मुहिम को आगे बढ़ाते हुए नुक्कड़ नाटक संवाद श्रृंखला की नई कड़ी में सोशल एक्शन फॉर डेवलपमेंट एंड अवेयरनेस के बैनर तले उदय कुमार द्वारा लिखित एवं निर्दशित नाटक “कंधे पर लाश” का प्रदर्शन खगौल स्थित दानापुर रेलवे स्टेशन के बाहरी परिसर में किया गया. नाटक मंचन के पहले  ढोलक, झाल, खंजरी की ताल की  गूंज और गीत से नाटक की शुरूआत हुई.नाटक की प्रस्तुति में दर्शाया गया कि तमाम विकास के दावों के बावजूद आज भी गरीब लोगों के बीमारी के इलाज की सुविधाओं मे भारी कमी है.

unnamedक्या है नाटक में खास 

नाटक में एक गरीब बूढ़ा पिता अपने  बीमार बेटे को कंधे पर उठाए दूर अस्पताल पहुंचता है. पर वहां कर्मचारी इन लोगों पर ध्यान नहीं देते. वह इलाज के लिए सबसे मिन्नतें करता है पर डॉक्टर से लेकर कर्मचारी तक उसको दर किनार कर नेता के परिजन, पैसे वाले लोग और पैरवी वाले लोगों पर ज्यादा ध्यान देते है. बूढ़े पिता और बेटे पर किसी को दया नहीं आती. अंत में बेटे का इलाज के अभाव में दम तोड़ देता है. बूढ़ा बाप के पास अपने बेटे की लाश को ले जाने की मदद मांगता है पर कोई नहीं सुनता. बेबस और लाचार पिता बेटे की लाश कंधे पर उठाए घर की ओर चल पड़ता है. लोग मदद के बजाय सेल्फी लेने में ज्यादा दिलचस्पी लेते नजर आते है॥ गरीबी की मार और समाज में बढ़ती असंवेदनशीलता खतरनाक स्तर पर उभरती नजर आती है.

ये थे कलाकार

कलाकारों में प्रेमराज, रोहित, रामनाथ, मनोज सिन्हा, शोयब कुरैशी, उदय कुमार, रंजन, विजय, शशिकांत, प्रदीप विश्वकर्मा मौजूद थे.

दानापुर से चन्द्रशेखर की रिपोर्ट 

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