आरोप हमेशा तर्क हीन और बेमलतब होते हैं -शिवानन्द तिवारी

सत्ता में बैठे लोगों को प्रतिपक्ष के आरोप हमेशा तर्क हीन और बेमतलब लगते हैं. जैसे वशिष्ठ भाई को तेजस्वी के आरोप तर्कहीन लगते हैं. लेकिन तेजस्वी की बात को फिलहाल दरकिनार भी कर दीजिए तो मदन साहनी, रामप्रीत पासवान और ज्ञानू की बात पर वशिष्ठ भाई क्या कहेंगे ! ये तो आपकी सरकार के लोग हैं. मदन साहनी तो बता रहे हैं कि अपनी बात को सार्वजनिक करने के पहले उन्होंने हर दरवाजे को खटखटाया. जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तब उन्होंने अपनी पीड़ा सार्वजनिक की है.
मदन साहनी कमजोर समाज से आते हैं. अगर कमजोर समाज से आने वाले मंत्रिमंडल के सदस्य अपनी पीड़ा सार्वजनिक करने का साहस करें तो उनकी व्यथा भी मदन साहनी जी से अलग नहीं होगी.
अस्पतालों में ब्लैक फंगस का इंजेक्शन नहीं मिल रहा है. इंजेक्शन के अभाव में लोग मर जा रहे हैं. यह खबर तो प्रमुखता से अखबारों में छपी है. इंजेक्शन क्यों नहीं मिल रहा है यह बताने वाला कोई नहीं है. न विभागीय मंत्री न विभागीय पदाधिकारी. यह तो आपराधिक कृत्य है. इस खबर पर बशिष्ठ भाई क्या कहेंगे !
जानकारी मिली कि महाराष्ट्र में भी ब्लैक फंगस का उत्पात है. लेकिन इसके उपचार के लिए जिस इंजेक्शन की जरूरत है उसको बनाने वाली कंपनी से वहां की सरकार ने सीधे बात की और अपनी जरूरत के हिसाब से उन्होंने इंजेक्शन आपूर्ति का आदेश दिया. लेकिन बिहार की सरकार केंद्र के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है.
कोरोना के टीकाकरण का महा अभियान शुरू होने की खबर छपती है. अगले ही दिन पता चलता है कि टीका के अभाव में टीकाकरण के कई केंद्र बंद हो चुके हैं. क्यों कि केंद्र की सरकार समय पर वैक्सीन की आपूर्ति नहीं कर पाती है. लेकिन कभी भी यह बात सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री कबूल नहीं करते हैं. एक समय तो नीतीश जी नरेंद्र मोदी जी के सामने नहला पर दहला मारा करते थे. आजकल तो उनका व्यवहार भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्रियों की तरह हो गया है. इसलिए वशिष्ठ भाई से तो अपेक्षा होती है कि कम से कम वे सही सही बात बोला करें
. वरीय नेता हैं. सरकार की गलतियों पर टोकाटोकी करें. दिल्ली सरकार बिहार के साथ जो भेदभाव करती है उसको भी सार्वजनिक ढंग से उठाया करें.

फेसबुक वॉल से साभार




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