मारुति, मोबाइल और कंप्यूटर के बाद अब ‘बुलेट’ क्रांति

ये न्यू इंडिया की खबर है. ये नई क्रांति की उद्घोषणा है. विरोध करने वाले तो मारुति कार, कंप्यूटर और मोबाइल को भारत में लाने के भी खिलाफ थे. लेकिन सच्चाई यही है कि इन तीनों ने देश को बदल दिया.




अब एक नई क्रांति की शुरुआत हुई है. जरिया बने हैं पीएम मोदी और जापान के पीएम शिंजो अबे. जगह गुजरात का अहमदाबाद शहर और मंजिल होगी देश की कारोबारी राजधानी मुंबई. लक्ष्य वर्ष 2022 में शुरुआत का. परियोजना का पूरा खर्च करीब एक लाख करोड़. जिसका 80 फीसदी हिस्सा जापान देगा. जी हां, तकनीक और खर्च का जिम्मा बेहद मामूली ब्याज पर जापान का. यही है बुलेट ट्रेन के बारे में शुरुआती जानकारी.

जापान के PM शिंजो आबे और PM नरेंद्र मोदी ने आज अहमदाबाद में देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया. इस मौके पर मोदी और शिंजो अबे ने एक-दूसरे की जमकर प्रशंसा की.

जापान के PM शिंजो आबे ने कहा कि पीएम मोदी एक दूरदर्शी नेता हैं, मैंने खुद इस प्रोजेक्ट में रुचि ली है. जापान से 100 से अधिक इंजीनियर भारत में आए हुए हैं, मोदी की नीतियों का पूरा समर्थन करता हूं.

जरा सोचिए कि जापान ने कितना सस्ता लोन दिया है भारत को. पीएम मोदी ने उनकी प्रशंसा करते हुए उनका बार-बार धन्यवाद किया. PM मोदी ने आगे कहा कि जब भी कोई चीज खरीदने जाते हैं तो हम गुजराती एक-एक पैसे का हिसाब लगाते हैं. कोई बाइक भी लेने जाते हैं तो बैंक से लोन लेते हैं तो ब्याज से लेकर लोन की अवधि तक सब कुछ बारीकी से देखते हैं. कोई आधा पर्सेंट ब्याज भी खत्म कर दे तो बहुत खुश होते हैं. लेकिन कल्पना कीजिए किसी को ऐसा दोस्त मिल सकता है क्या जैसा भारत को जापान और शिंजो आबे के रूप में मिला. कोई यह कहे कि बिना ब्याज के लोन ले लो, अभी जल्दी नहीं है 50 साल में चुकाना, तो सोचो कैसा लगा होगा. शिंजो आबे ने बुलेट ट्रेन के लिए 88 हजार करोड़ रुपये 0.1 प्रतिशत ब्याज दर से देने का फैसला किया है.

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