जैन स्कूल शताब्दी समारोह : स्वर्णिम इतिहास का स्वर्णिम वर्ष


बिहार का गौरव जैन स्कूल

आरा. जैन स्कूल के शताब्दी समारोह के 5वें दिन जैन स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों का जमावड़ा लगा. जिसमे देश के कोने कोने में विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे विभिन्न पदों पर आसीन रहे अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की. 1950 से अबतक के इस स्कूल से पास आउट लगभग 700 पूर्ववर्ती छात्रों ने हिस्सा लिया.




देश मे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवा दे रहे ये अधिकारी आज स्कूल प्रांगण आकर फिर से नन्ही यादों में खो गए. कइयो के ऐसा लगा जैसे उन्हें उनका पुराना बचपन फिर से मिल गया तो किसी को स्कूल की वह पुरानी टँकी और चापाकल की तलाश थी जिससे वे टिफिन के समय पानी पिया करते थे. गर्मी के दिनों में अपने जूते को भींगा लेते थे…आज वह टँकी नदारथ देख उनकी आँखें नम हो गयीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता शताब्दी समारोह के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक चन्द्र जैन ने किया. समारोह का शुभाईरंभ पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय,जैन स्कूल कार्यकारिणी के सचिव ज्योति प्रकाश जैन, सदस्य प्रो. रणविजय कुमार, प्रीत चन्द्र जैन, आयोजन समिति के स्वागताध्यक्ष शैलेश जैन, ट्रस्ट के सचिव कमल कुमार जैन और प्रधानाध्यापक कमलेश जैन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया. अपने संबोधन भाषण ने कहा कि बिहार जितना बाहर बदनाम है उससे ज्यादा बिहारियों के सम्मान को जैन स्कूल ने शिक्षा के माध्यम से रोशन किया है. इस स्कूल का देश के कोने-कोने में सम्मान से लिया जाता है और यह सब इस स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में उत्तम प्रदर्शन है. उन्होंने कहा कि इस समारोह का हिस्सा बन उन्हें गर्व हो रहा है. हर स्कूल के पूर्ववर्ती छात्र अपने स्कूल के लिए कुछ करने की ठान ले तो गुणवत्ता में काफी सुधार किया जा सकता है. उन्होंने स्कूल के निरन्तर विकास की कामना की. इस मौके पर कई पूर्ववर्ती छात्रों ने अपना संस्मरण सुनाया तो 91 बैच का पूर्ववर्ती छात्रों ने प्रिंसिपल चैम्बर में निल-डाउन उस समय के स्व. गिरिराज अग्रवाल को याद किया.

शताब्दी वर्ष के ईद मौके पर 2001 बैच ने स्कूल को एक लाइब्रेरी सौंपी. लाइब्रेरी के लिए स्कूल ने जगह मुहैया कराया. लाइब्रेरी में 4 हजार किताबें हैं और यह 2001 बैच के ही स्कूल के एक पूर्ववर्ती छात्र जो BSF में
कार्यरत स्व. नरेंद्र को समर्पित है.

2002 बैच ने अपने मित्र नरेंद्र को याद करते हुए उसके बचपन का किस्सा सुनाया जब स्व. नरेंद्र जैन स्कूल में पढ़ा करते थे. नरेंद्र की कद काठी,रूप और रंग देख कर सभी कहते कि “भाई,तू ता हीरो बनब” और हुआ भी वही…..नरेंद्र तो पूरे वतन का सच्चा हीरो बन गया. BSF में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात नरेंद्र 24 जनवरी 2012 को पेट्रोलिंग के लिए निकली टीम के साथ गया था जो हिमस्खलन के कारण वापस ना आ सका. 2001 बैच का छात्र वीरगति को प्राप्त हुआ और देश को अपना कर्जदार बना गया.

उसके नाम से पुस्तकालय खोलना उसके साथियों का यह सन्देस है कि उसे उसके मित्रों ने आज भी उसे अपने दिल मे बसा रखा है. सभी छात्रों की नम आँखे इस अवसर पर यह कह रही थीं कि वे न तो अपने दोस्त को भूले हैं और न ही उसके जैसे किसी वीर सपूतों को. क्योंकि देश के सच्चे सपूत ही हिम्मत है, और मार्गदर्शक. वीर कभी मरते नही,हम सबके दिल में अपनी चिरपरिचित मुस्कराहट के साथ हमेशा विद्यमान रहते हैं.

शताब्दी समारोह के इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया. इस विद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र व चर्चित कत्थक गुरु बक्शी विकास ने होली को शास्त्रीय नृत्य के जरिये पेश किया. वही BHU वाराणसी के सन्दीप मौर्या ने भी कत्थक नृत्य से शताब्दी समारोह में चार चांद लगा दिया. वही आर्ट इन मोशन के बच्चों ने ये है मेरा बिहार पर सामूहिक लोक नृत्य की प्रस्तुति दी, जिसे शशि सागर बब्बू ने निर्देशित किया था. आकाश, नंदन, विष्णु व प्रदीप द्वारा निर्देशित बच्चों द्वारा एक सामूहिक नृत्य की भी प्रस्तुति हुई. वही मणिपुर से आयी पायल, वर्षा और रानी ने रीमिक्स गानों पर अपना सामूहिक नृत्य प्रदर्शित कर शताब्दी समारोह की रौनक बढ़ा दी. मलेम मणिपुर ग्रुप ने चाकू की कलाबाजी को प्रदर्शित कर सबका दिल जीत लिया.

1985 बैच के छात्रों ने 10th के छात्रों के लिए स्कूल को लांग बेंच मुहैया कराया तो 1990 बैच ने स्कूल को 5 कम्प्यूटर सेट,2001 बैच ने BSF के शहीद नरेंद्र कुमार की स्मृति में पुस्तकालय तो 2002 बैच ने कॉफी मशीन मुहैया कराया. इसके अतिरिक्त भी 1962 और 1978 बैच के लोगों ने पुरानी यादों को एक तस्वीर समर्पित कर किया. आगत अतिथियों का स्वागत ज्योत जैन,मंच संचालन मनीष जैन और धन्यवाद ज्ञापन कमलेश जैन ने दिया.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट