संविधान दिवस पर पढ़ी गई संविधान की प्रस्तावना

आरा. देश का संविधान जनता की भावनाओं का दर्पण है जिसमें जनता की इच्छाओं एवं आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति होती है. साथ ही, प्रस्तावना संविधान की आत्मा होती है. प्रस्तावना में संविधान की मौलिक बातों का उल्लेख है. अपने संविधान के प्रति सम्मान प्रकट करने तथा उनमें निहित मौलिक तथ्यों की जानकारी से अवगत होने एवं उसके अनुरूप आचरण प्रदर्शित करने हेतु 26 नवंबर को संविधान दिवस का आयोजन जिला मुख्यालय सहित अनुमंडल एवं प्रखंड स्तरीय सभी कार्यालयों में संपन्न हुआ. जिला स्तरीय मुख्य कार्यक्रम का आयोजन कृषि भवन सभागार में उप विकास आयुक्त सह प्रभारी जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम में सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने संविधान की प्रस्तावना को पढा. इसी तरह का कार्यक्रम अनुमंडलीय एवं प्रखंड कार्यालयों में संपन्न होने की खबर है जहां सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने संविधान की प्रस्तावना को पढ़ा.

प्रस्तावना:
हम ,भारत के लोग ,भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी ,पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 ईस्वी को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं.




पटना नाउ ब्यूरो रिपोर्ट