सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन से होगा नए युग का सूत्रपात

सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के रास्ते ही समुचित विकास सम्भव है। घर-संसार उत्सव पैलेस, धोबिघटवा में आयोजित अमर शहीद जगदेव प्रसाद और सुमित्रा देवी जन्मशती समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया। कार्यक्रम का आयोजन जगदेव प्रसाद सुमित्रा देवी स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित किया गया था।




इसके अतिरिक्त बिहार की दो अन्य विभूतियों राम जयपाल सिंह यादव और दारोगा प्रसाद रॉय की भी जन्मशताब्दी पर कार्यक्रम के दौरान याद किया गया। समारोह की शुरुआत विभूतियों के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ शुरू हुआ। शुरुआत में छात्र राजद नेता अनूप मौर्य ने जगदेव बाबू के बचपन के प्रसंगों को सुनाया। हिंदी भोजपुरी के साहित्यकार रामयश अविकल ने कहा कि समाज में जो लोग बराबरी और मानवतावाद का सपना साकार करना चाहते हैं उन्हें जगदेव बाबू और सुमित्रा देवी के विचारों को आत्मसात करना होगा साथ ही सामाजिक न्याय के दुश्मनों को पहचानना होगा। वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र कुमार ने कहा कि इन चारों विभूतियों ने व्यवस्था परिवर्तन के लिए शिक्षा को हथियार बनाया था और वास्तविक रूप में राष्ट्रवाद तभी साकार हो सकता है जब भेदभाव,रूढ़िवाद का उन्मूलन होगा और शिक्षित समाज बनेगा। चित्रकार राकेश कुमार दिवाकर ने कहा कि जब तक शोषितों को अधिकार नहीं मिल जाता तब तक संघर्ष को जारी रखना होगा। ब्रजभूषण प्रसाद ने अंधविश्वास और पाखंड उन्मूलन पर जोर दिया।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय सिंह ने कहा कि हमें समाज से जातिवाद और गरीबी को हटाकर समता स्थापित करना होगा तभी हम इन विभूतियों को सही अर्थों में श्रदांजलि दे सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और शोधार्थी धनन्जय कटकैरा ने कहा कि सिर्फ सत्ता परिवर्तन से विकास सम्भव नहीं है उसके लिए पूरी व्यवस्था में परिवर्तन लाना होगा जिसके लिए समाज में जागरूकता और आर्थिक बराबरी लानी होगी। छात्र अभिमन्यु कुशवाहा ने अंधविश्वास हटाने की बात की। मंच संचालन करते हुए रवि प्रकाश सूरज ने चारों विभूतियों के जीवन और कार्य पर गहराई से प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन धनन्जय कटकैरा ने किया। समारोह में सराहनीय योगदान देने वाले छात्र नेता मुन्ना यादव, गुड्डू यादव, निशांत कुमार, रंजन यादव, अभिषेक, अभ्यजीत कुमार, संदीप कुमार, राहुल कुमार और संजय कुमार का नाम उल्लेखनीय रहा। सभा के अंत में सरदार पटेल को उनकी जयंती पर याद किया गया।

आरा से रवि प्रकाश सूरज की रिपोर्ट