आन्नद रघुनन्दन के मंचन के साथ संपन्न हुआ रंगजलसा

By pnc Sep 24, 2016

14358894_1786290981587425_8852795841155611212_nसंजय उपाध्याय की  रंगमंच की रचनात्मकता ने बिहार समेत देश विदेश में लोगों को आकर्षित किया है. विदेशिया से लेकर आन्नद रघुनन्दन तक की प्रस्तुतियों से दर्शकों और युवा रंगकर्मियों को कई सीख दे जाती है .नाट्य कार्यशैली,रंग-संगीत ,लोक जीवन के शिल्प  ,प्रकाश परिकल्पना और अभिनय के बदौलत संजय उपाध्याय आज हिन्दी रंगमंच में किसी परिचय के मोहताज नहीं है. राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव रंग जलसा-2016 के पाँचवें व अन्तिम दिन दिनांक मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय,भोपाल 2015-16 के छात्रों ने हिंदी का प्रथम नाटक महाराजा विश्वनाथ सिंह लिखित एवं संजय उपाध्याय द्वारा निर्देशित आन्नद रघुनन्दन की भावपूर्ण प्रस्तुति की.प्रस्तुति देखने के बाद दर्शकों ने कहा बेहतरीन वाह,अद्भुत,शानदार और अकल्पनीय. जब दर्शक ही एक नाटक को देख कर इतने मन्त्र मुग्ध हो तो पता चलता है कि नाटक में कितनी म्हणत की गई है .आन्नद रघुनन्दन ये एक ऐसी प्रस्तुति रही जो लंबी अवधि के बावजूद दर्शक अपने सीट पर शुरू से अंत तक जमे रहे. प्रस्तुति से जुड़े सभी मंच एवं पार्श्व कलाकारों को शानदार प्रस्तुति के लिए बधाई के पात्र है. मध्य प्रदेश विधालय के ऊर्जावान कलाकारों ने अपने असाधारण अभिनय कौशल के बलबूते सबों का दिल जीत लिया और दर्शक दीर्घा में बैठे सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया .नाटक में  एक-एक प्रयोगिक दृश्य दर्शकों को लम्बे समय तक याद रहेंगे . मंच सज्जा,वस्त्र-विन्यास,संगीत संयोजन,नृत्य संरचना भी काफ़ी प्रभावशाली रही जो अपने आप में निर्देशक की कल्पनाशीलता और लम्बे अनुभव को प्रदर्शित करते है. कलाकारों ने संस्कृत नाटकों की परंपरा को जीवंत कर दर्शकों को मुग्ध कर दिया.

नाटक के प्रमुख पात्रों में नटी  की भूमिका में हेमलता मिश्र,महिजा –भारती पेरवानी,त्रेतामल –मो. जहांगीर ,हितकारी केवल छापरवाल, दिगसिर कृपेश जानी, डीलरधारी नवदीप सिंह ठाकुर और सुगल की भूमिका में पृथ्वी राज चौहान ने उल्लेखनीय भूमिका से प्रस्तुती में चार चांद लगा  दिया.




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क्या है नाटक में .

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 मंच पर नाटक की शुरुआत नट-नटी से होती है. अपराजिता नगरी के महाराज दिगजान के यहां चार पुत्र हुए हैं. तभी ऋषि भुवनहित आते हैं और दिगजान से यज्ञ रक्षा के लिए हितकारी और राजकुमारों को मांगते हैं. बड़े होने पर राजकुमार हितकारी के हाथों वन राक्षस मारे जाते हैं तभी भुवनहित बताते हैं कि महाराज शीलकेतु ने अपनी पुत्री महिजा के स्वयंवर का आयोजन किया है. दोनों राजकुमार स्वयंवर में जाते हैं और हितकारी स्वयंवर में धनुष चढ़ाकर महिजा से विवाह करता है. तभी ऋषि रेणुकेय आते हैं और अपने गुरु का धनुष टूटा देख क्रोधित होते हैं. लेकिन वह सारी बात समझ जाते है. इधर दिगजान की तीसरी पत्नी  कश्मीरी उनसे हितकारी के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांगती है. हितकारी के साथ डीलरधारी और महिजा भी वनवास जाते है और दिगजान पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग कर देते हैं. स्वर्ण नगरी का राजा दिकसिर छल पूर्वक महिजा का हरण कर लेता है. हितकारी और डीलरधारी महिजा को खोजते हुए सुगल से मिलता है . नाटक में निर्देशक ने वस्त्र विन्यास ,प्रकाश संयोजन और पार्श्व संगीत का बेजोड़ नमूना पेश किया जो दर्शकों को लम्बे समय तक नाटक आन्नद रघुनन्दन को याद रखेंगे .

नुक्कड़ नाटक में  begusaray

नाटक के पूर्व बेगुसराय की टीम ने काव्य कोलाज  हिंसा के खिलाफ बेगुसराय की ख्वातीन का सफल मंचन  किया गया  नाटक का निर्देशन दीपक सिन्हा ने किया .नाटक में एकल अभिनय कर कर रहे रंगकर्मी सचिन ने भी सशक्त अभिनय के जरिए अपनी प्रस्तुति दी .इस नाटक में हिंसा के खिलाफ प्रतिरोध की कविताएं शामिल की गई थी.बेगुसराय के कवि शेखर सावंत ,रामेश्वर प्रशांत,दीपक सिन्हा,रूपम झा ,मुकुल लाल ,शिवनंदन सिंह और दीनानाथ सुमित्र की कविताओं को शामिल कर प्रस्तुति को समसामयिक बनाया गया.

फोटो सौजन्य-स्वरम उपाध्याय व्  मधुमती

 

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