करोड़ों पौधे लगाने वाली सरकार से सवाल, क्यों काटे जा रहे इतने सारे हरे-भरे पेड़

यह है बिहार में जल जीवन हरियाली योजना का असली चेहरा

किसने दी हरे-भरे पेड़ों को काटने की इजाज़त

दूर देश से आये साइबेरियन पक्षियों का आशियाना उजड़ा, ग्रामीण सहित आम जन चिंतित




कोइलवर(भोजपुर)
अतिथी देवोभव के आदर्श को मानने वाले इस देश में सैकड़ों अतिथि पंक्षियों, उनके बच्चों और अंडों की निर्मम हत्या और दुर्दशा पर आम जन से लेकर जनप्रतिनिधि और समाजसेवी सबकी आंख भर आई. यह हुआ प्रवासी पक्षियों के प्रजनन काल में रोड निर्माण के दौरान पेड़ों को काटने के अदूरदर्शी निर्णय के कारण.

सैकड़ों चूजों की मौत का जिम्मेदार कौन!

आरा पटना मार्ग पर कायमनगर बाजार स्थित सड़क किनारे पेड़ों पर साइबेरिया क्रेन सारस पक्षी जो साइबेरिया रूस प्रांत से 5000 किलोमीटर दूर देश से मई महीने में आ जाते हैं. तथा पेड़ों पर अपना बच्चा प्रजनन कर वापस अक्टूबर माह में बच्चे के बड़े होने पर पुनः अपने देश वापस लौट जाते हैं. इन पक्षियों की उपस्थिति से वातावरण बहुत ही गुलजार रहता था.
मगर इधर कुछ दिनों से सड़क निर्माण हेतु रोड किनारे लगे हुए पेड़ों को काट कर धराशाई किए जाने पर उन पेड़ों पर निवास करने वाले हजारों प्रवासी साइबेरियन सारस पक्षियों के घोंसले, अंडे, चूजे बच्चे जमीन पर गिरकर दम तोड़ते दिखे.

साइबेरियन क्रेन का था बसेरा

विश्व पर्यावरण बचाओ संस्थान एवं पीपुल फॉर एनीमल्स बर्ड्स के अध्यक्ष पर्यावरणविद् पशु पक्षी प्रेमी समाजसेवी दीपक कुमार अकेला के नेतृत्व में कायमनगर जाकर कटे हुए 10 पेड़ों पर समाजसेवी दीपक अकेला ने कहा कि अतिथि प्रवासी पक्षियों के प्रति तथा जल जीवन हरियाली पेड़ों की जघन्य हत्या बहुत ही क्रूरता है जो भी देखता है. दुखी एवं विचलित हो जाता है. इसके साथ ही जिला जिलाधिकारी से मांग की गई कि 2 माह तक पेड़ों को नहीं काटने का आदेश दिया जाए ताकि प्रवासी पक्षी की सुरक्षा जीवन बचाया जा सके. इस अवसर पर गोपाल प्रसाद, धीरज कुमार स्वर्णकार, जिला परिषद अध्यक्ष आरती देवी, छात्र युवा नेता कुमुद पटेल, अशोक तिवारी, संजय कुमार, जीतू सोनी, सरपंच अब्दुल कलाम आजाद, एवं सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.
जनता की मांग और वर्तमान परिस्थितियों में दो माह तक इंतजार के बाद ही इन वृक्षों का काटा जाना उचित होगा. जिला प्रशासन इस संदर्भ में उचित कार्यवाही कर प्रर्यावरण को संतुलित और विकसित करने वाले इस प्रक्रिया को संरक्षित कर सकता है.

बड़ा सवाल

R Block Dikha Road

एक तरफ पटना में आर ब्लॉक दीघा रोड के निर्माण के दौरान सैकड़ों पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया गया, क्योंकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की तरफ से पेड़ों को काटने की इजाजत नहीं मिली. आज भी बिना ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के किसी भी पेड़ को काटने की छूट नहीं है. फिर सड़क निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में हरे भरे पेड़ों को कैसे काटा जा रहा है. इसका जवाब सरकार को देना चाहिए क्योंकि बिहार सरकार हजारों करोड़ रुपए की जल जीवन हरियाली योजना चला रही है और करोड़ों पौधे हाल के दिनों में रोपे गए हैं जिस के कार्यक्रम में खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शरीक हुए हैं. आखिर किसकी इजाजत से बिहार में पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं!

कोइलवर से आमोद की एक्सक्लुसिव रिपोर्ट

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