बिहार में मौत का कहर बना डेंगू

पटना (अजित की रिपोर्ट) | तमाम सरकारी दावे के बावजूद बिहार में डेंगू मौत का कहर बन चुका है.बिहार में डेंगू का कहर गहराता जा रहा है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्‍पताल (पीएमसीएच) के वायरोलॉजी लैब में डेंगू मरीजों के आंकड़े 250 पार कर गए हैं। इनमें पटना, सीवान, लखीसराय, सारण और औरंगाबाद आदि जिलों के मरीज शामिल हैं। इस बीच पटना व छपरा के दो डॉक्‍टरों की डेंगू से मौत हो गई है। डेंगू की चपेट में आईं गोपालगंज की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) की भी पटना के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई है। ये डेंगू से होने वाली इस साल की पहली तीन मौतें हैं।पटना के फोर्ड हॉस्पिटल में एनेस्थेटिस्‍ट डॉ. विजय कुमार की डेंगू से मौत हो गई।  वे हॉस्पिटल में बुधवार से भर्ती थे। वे इसी अस्पताल में एक साल से कार्यरत थे। डॉ. विजय की आठ माह पहले शादी हुई थी।
फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. बीबी भारती ने बताया कि तीन दिन पहले फीवर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था । डेंगू के कारण उनके प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगे। हेमोरेजिक शॉक में चले जाने के कारण काफी प्रयास के बावजूद उन्हें नहीं बचाया जा सका।
डॉ. विजय के मित्र एवं पटना एम्स में कार्यरत डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि उन्हें जब अस्पताल में भर्ती किया गया था तो प्लेटलेट्स की स्थिति ठीक थी। गुरुवार को प्लेटलेट्स 50,000 पर आ गई। इसके बाद शुक्रवार को 18,000 और फिर 9000 पर आ गई। इसके बाद हेमोरेजिक शॉक हो गया।
छपरा के भी एक डॉक्‍टर की मौत 
रविवार को राजधानी के पारस अस्पताल में भर्ती छपरा के वरिष्ठ डॉक्टर वासुदेव प्रसाद की भी डेंगू से मौत हो गई। वे मूलत: सिवान के रहने वाले थे। शुक्रवार की रात को उनका ब्रेन हेमरेज हो गया था, जिसके बाद स्थिति ज्यादा बिगडऩे लगी थी।
गोपालगंज की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी की मौत
डेंगू की चपेट में आई आइसीडीएस (इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट सर्विसेज) की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी संगीता कुमारी (34) की रविवार को सुबह पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। प्लेटलेट्स की संख्या काफी कम हो जाने से उन्होंने दम तोड़ दिया।
नालंदा निवासी संगीता कुमारी ने 10 जुलाई को गाेपालगंज जिले में आइसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के पद पर योगदान किया था। इससे पूर्व वे पटना समाज कल्याण विभाग में डीपीओ पद पर कार्यरत थीं। तीन माह से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा था। हमेशा फीवर बने रहने पर उन्होंने पटना में जांच कराई। तब डेंगू होने का पता चला।
पीएमसीएच में मिले 245 मरीज 
इस बीच पीएमसीएच के वायरोलॉजी लैब में डेंगू के 250 से अधिक मरीज मिले हैं। इनमें पटना, सीवान, लखीसराय, सारण और औरंगाबाद आदि के मरीज शामिल हैं। वायरोलॉजी लैब में डेंगू के संदेह में बड़ी संख्‍या में मरीज जांच के लिए आ रहे हैं। डेंगू के मरीज पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्‍थान (आइजीआइएमएस) में भी भर्ती हैं।
मच्‍छरों से बचाव जरूरी 
पीएमसीएच के वरीय फिजिशियन डॉ. बीके चौधरी के मुताबिक इन दिनों बड़ी संख्‍या में लोग पूजा की छुट्टी में बिहार आ रहे हैं। उनके माध्‍यम से डेंगू के मामले बढ़े हैं। उन्‍होंने बताया कि इस बीमारी से बचने के लिए मच्छरों से बचाव जरूरी है। सिवान के सिविल सर्जन डॉ. शिवचंद्र झा ने बताया कि डेंगू के मच्छर दिन के समय में काटते हैं। इसके उपचार के लिए कोई खास दवा या वैक्सीन नहीं है। बचने के लिए ऐसे कपड़े पहनने चाहिए, जिससे पूरा तन ढका रहे।
डेंगू के लक्षण
– अचानक बुखार, सरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों में दर्द के साथ सर्दी और उलटी जैसे लक्षण।
डेंगू के उपचार के कुछ घरेलू उपाय
डेंगू की स्थिति में आप डॉक्‍टर के संपर्क में जरूर रहें। हां, डॉक्‍टर की सहमति से कुछ घेरलू उपाय भी अपना सकते हैं। आइए देखें…
– गिलोय के तने को उबालकर सेवन करें। साथ में तुलसी के कुछ पत्ते भी मिला लें।
– पपीता के पत्ते प्लेटलेट्स व इम्‍युनिटी बढ़ाते हैं। इन पत्तों का जूस का सेवन करें।
– दूध के साथ हल्दी मिलाकर लें।