नगर अध्यक्ष की कुर्सी छीनी, अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े 8 वोट

कोइलवर/भोजपुरनगर पंचायत कोईलवर के अध्यक्ष की कुर्सी नहीं बची. शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और मत विभाजन के लिए विशेष बैठक बुलाई गई थी जिसे लेकर नगर पंचायत के सभागार में उपमुख्य पार्षद शबनम बानो की अध्यक्षता मेंं बैठक आयोजित की गई. उसके उपरांत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई. बैठक में उपस्थित 8 पार्षद प्रभात कुमार, राज कुमार, यादवेंद्र कुमार, शिवकुमारी देवी, शाहिदा खातून, सूफिया परवीन, सायरा खातून ने उपमुख्य पार्षद से मुख्य पार्षद के खिलाफ मत विभाजन की अपील की. जिसके बाद उन्होंने मत विभाजन की सहमति दी. वोटिंग में सभी 8 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग किया. इस प्रकार 8-6 से मुख्य पार्षद विनोद कुमार की कुर्सी छीन गयी. ईओ रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि वोटिंग के दौरान अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 8 वोट पड़े. जिस कारण मत विभाजन में मुख्य पार्षद की कुर्सी छीन गयी. इसके बाद कार्यकारी अध्यक्ष उपमुख्य पार्षद शबनम बानो को बनाया गया. आमोद

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कभी पुरस्कार भी मिले कभी सस्पेंड भी हुए भोजपुर SP राकेश दुबे

पटना: तीन महीने पहले बनाये गए भोजपुर के Sp राकेश दुबे को अबविभाग ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है और विभागीय कार्रवाई चलने तक उन्हें निलंबित रखा जाएगा इस दौरान उन्हें सिर्फ जीवन यापन के लिए आंशिक राशि ही मिलेगी। आरा में sp के पद पर काम करते हुए उन्होंने तीन माह में शराब,अवैध बालू और क्राइम पर काम किया लेकिन विभाग ने उन्हें उसी बालू के अवैध उत्खनन में बालू माफियाओं की मदद करने का आरोप लगा कर उन्हें निलंबित कर दिया है।आप को बताते चलें कि देवघर (झारखंड) के रहने वाले राकेश कुमार दुबे कई सालों तक सीबीआइ में भी काम कर चुके हैं। वे बिहार के चर्चित चारा घोटाले के अनुसंधानकर्ता भी थे। जब बिहार में रंगदारी के लिए हत्याएं और फिरौती के लिए अपहरण का दौर चरम पर था, तब अपराध पर लगाम लगाने के लिए राकेश कुमार दुबे ने बतौर डीएसपी काफी सुर्खियां बटोरीं थीं। तीन साल तक पटना टाउन डीएसपी रहे और इस दौरान उन्होंने मुठभेड़ में आधा दर्जनों दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया था। राकेश कुमार दुबे तक एसटीएफ में भी अपनी सेवा दे चुके हैं। आरा में वार्ड पार्षदों की शराब पार्टी का में पहुंच कर 13 से अधिक लोगों को गिरफ्तार भी किया था ।

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जन समस्याओं का निराकरण जल्द -डीएम

सासाराम -प्रखंड विकास सह लोक शिकायत निवारण शिविर रेहल ,नौहट्टा प्रखंड, के पंचायत भवन में आयोजित किया गया। जन समस्याओं को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने और आमलोगों की शिकायत का त्वरित निदान भी किया गया।शिविर में कुल प्राप्त आवेदन की संख्या लगभग 360 से भी ज्यादा है, जिसमे लगभग 124 का निदान कर दिया गया है, तथा शेष समस्याओं का निष्पादन जल्द ही किया जाएगा। रोहतास केजिला पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि प्रत्येक माह को नोहटा प्रखंड अंतर्गत सभी महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को पंचायत सरकार भवन पीपरडीह में एक दिवसीय कार्यालय कार्यक्रम होगा जिसमें सभी पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहेंगे और जन समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। दिनांक 29 जुलाई 2021 को विशेष कैंप एवं शिविर के माध्यम से अंचल कार्यालय नौहट्टा द्वारा भूमि दाखिल खारिज संबंधित मामलों का निष्पादन पंचायत सरकार भवन पिपरडीह में कराया जाएगा। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा नल जल योजना को पूर्णता सुचारू रूप से कार्यरत करने हेतु 15 दिनों का अंतिम अवसर प्रदान किया गया है। पीएचईडी के द्वारा कार्य किए जा रहे नल जल योजना में लगभग 46 वार्ड में होम बोरिंग का कार्य पूर्ण है 33 वार्ड में स्ट्रक्चर का कार्य पूर्ण है तथा 22 वार्ड में पाइप बिछाने का कार्य पूर्ण है। मत्स्य विभाग द्वारा लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मत्स्य पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि स्थानीय लोगों का ही मत्स्य पालन एवं रोजगार के लिए बंदोबस्ती किया जाए। सासाराम से अमित बंटी

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नाटक से सीख सकते हैं स्वयं का विकास-रवींद्र भारती

कार्यशाला के सातवें दिन अभिनय के आयामों पर किया गया कार्य आरा। रेडक्रॉस के बगल में स्थित मंगलम द वेन्यू में चल रहे अभिनव एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय निःशुल्क नाट्य कार्यशाला के सातवें दिन नाटक के गुर को सिखाया गया। इस दौरान कार्यशाला के निदेशक रवीन्द्र भारती ने बच्चों को खुद से नाटक तैयार कर प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। उसके बाद एक- एक कर बच्चों ने नाटक को तैयार कर अपने अपने प्रस्तुति देकर सबका दिल जीता। किसी ने शोले फ़िल्म को कॉमेडी में दिखाया। तो किसी ने शादी करवाई। उसके बाद समय पर आधारित संगीत पर नृत्य कर के दृश्य को जीवंत करने में कोई कोशिश नहीं छोड़ी । संस्था के मुख्य संरक्षक तारकेश्वर शरण सिन्हा ने बच्चों की कार्यशाला को देखते हुए कहा कि अनुशासन बहुत जरूरी है। अगर कोई भी कलाकार बेहतर अनुशासन में अव्वल आता है, तो उसे पुरस्कृत किया जाएगा। इसको लेकर रवींद्र भारती ने बताया कि सातवें दिन नाटक के विभिन्न आयामों पर कार्य किया गया । एक एक्टर के लिए जरूरी आंगिक, वाचिक, आहार्य और  सात्विक अभिनय के साथ रसों के ऊपर कार्य करने की चुनौती दी गई। जिसमें सभी कलाकारों ने स्तानिस्लावस्की के अभिनय सिद्धांत जो मेथड एक्टिंग के लिए प्रसिद्ध है उस पर एक एक कर सबने अपनी प्रस्तुतियां दी। उसके बाद कई फिल्मी गानों पर साथ ही कई विषयों पर नाटक भी प्रस्तुत किया। कलाकारों में  छठवें दिन की कार्यशाला से सीखने के उपरांत अपने सहयोगियों की तालियां बटोरी। नाट्यकार्यशाला में भाग ले रहीआशी सिंह ने

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अभिनेता को भाषाओं पर पकड़ होनी चाहिए

बच्चों में अलग-अलग भाषाओं में भी नाटक करने की है क्षमता — मनोज श्रीवास्तव आरा। 20 दिवसीय कार्यशाला के छठवें दिन छात्रों को खुद से एक्ट प्रस्तुत करने का टास्क दिया गया। इस दौरान ए, बी, सी, डी और इ ग्रुप बना कर बच्चों को बराबर बराबर बांट दिया गया। उसके बाद सभी ग्रुप के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दिया। इस दौरान अभिराम के दल के द्वारा प्रस्तुत की गई एक्ट पर बच्चों ने जमकर ताली बजाई। अभिराम की टीम ने रानी लक्ष्मीबाई का अभिनय बखूबी निभाया। इसके बाद वर्कशॉप के निदेशक ने भोजपुरी में किये जा रहे एक्ट को अंग्रेजी में करने को कहा। छात्रों ने अपने अभिनय को अंग्रेजी माध्यम में प्रस्तुत किया जिससे बच्चों की टूटी फूटी अंग्रेजी ने खूब हंसाया। छात्रा शीतल गुप्ता ने बताया कि मैंने पहले कभी एक्टिंग वर्कशॉप नहीं किया है। लेकिन योगा करती थी। वर्कशॉप में आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे यहां आने के बाद खुद में हुई गलतियों का पता चल पाया है। अगर मुझे अभिनय के लिए चुना जाता है तो मुझे अच्छा लगेगा। छात्रा रितु पांडेय ने बताया कि लगातार छह दिनों से मैं वर्कशॉप में आ रही हूं। मैंने कभी पहले वर्कशॉप नहीं किया है। उन्होंने बताया कि जब मैं स्टेज पर जाती हूँ तो थोड़ा डर बना रहता है लेकिन मैं यहां सीखने आई हूं और अच्छा करना चाहती हूं। 14 वर्षीय छात्रा मुस्कान पांडेय ने बताया कि स्टेज पर जाने से पहले डर लगता था, लेकिन अब डर नहीं लगता है। जब शुरू

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अभिनेता को खुद पर नियंत्रण रखना होगा – नागेंद्र पांडेय

20 दिवसीय नाट्यकार्यशाला के पांचवें दिन संगीत और नृत्य के क्लास में झूमें प्रतिभागी आरा। रेडक्रॉस के बगल में स्थित मंगलम द वेन्यू में चल रहे अभिनव एवं एक्ट की ओर से आयोजित स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के पांचवे दिन प्रतिभागियों ने संगीत के बारे में जाना। इस दौरान प्रशिक्षक नागेंद्र पांडेय ने बच्चों को म्यूजिक के गुर सिखाये।उन्होंने शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत के बारे में बताया। वहीं फ़िल्म अभिनेता अजय साह ने एक्टिंग के साथ साथ एक्टर के चलने के सही तरीके को बताया। प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला के बारे में बताते हुए कहा कि ये पहला अवसर है जब हम बच्चों की कुछ नया सीखने को मिल रहा है। छात्रा खुशी गुप्ता ने बताया कि मुझे क्लास करके बहुत ही अच्छा लग रहा है। मैं पहले से संगीत की क्लास करती थी। लेकिन यहां मुझे कुछ नया सीखने को मिल रहा है। संगीत के साथ-साथ मुझे एक्टिंग के नए नए गुर सीखने के लिए मिल रहे हैं, मुझे यहां आकर अच्छा लग रहा है। वहीं प्रशिक्षण ले रहे छात्र शुभम दुबे ने बताया कि वो लगातार पांच दिनों से वर्कशॉप का हिस्सा हैं। पांच दिनों में अभिनय की बारीकियों से समझा है। इसके साथ ही म्यूजिक के बारे में भी जानने की कोशिश की। वर्कशॉप में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। सबसे खास चंद्रभूषण पांडेय का क्लास लगा। क्योंकि उन्होंने सबसे पहले बताया कि एक अभिनेता के लिए रोड ही उसके लिए विवि होती है। वो जो कुछ भी सीखता है,

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क्या आप कर सकते हैं बॉडी ऐक्ट !

नाट्य कार्यशाला : 4th Day यूज ऑफ प्रॉप्स के साथ किया बॉडी एक्ट आरा, 20 जुलाई. अभिनय एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने वरिष्ठ रंगकर्मी व नाट्य गुरु चन्द्रभूषण पांडेय से तालीम लिया. रमना मैदान के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू में बच्चों को कार्यशाला में प्रशिक्षक चंद्रभूषण पांडेय ने बॉडी ऐक्ट की बारीकियों को बताया. उन्होंने बच्चों को बड़ी सहजता के साथ बतलाया कि वे भी उनसे सीखने आये हैं. ये सहजता बच्चों में आत्मबल को बढ़ाने और उनकी झिझकता को दूर करने के लिए उन्होंने अपनायी. उन्होंने बताया कि फेस एक्सप्रेशन से पहले बॉडी के एक्सप्रेशन की जरूरत होती है और इसके लिए पूरे बॉडी पर एक्टर का कमांड रहना बेहद जरूरी है. उन्होंने कई शारीरिक चाल को प्रैक्टिकल के रूप में कर के दिखाया और फिर यूज ऑफ प्रॉप्स के बारे में बताया. उन्होंने इसके साथ ही तुरन्त 8 तरह के प्रॉप्स का उपयोग करने को बच्चों को दे दिया. सभी ने प्रॉप्स का उपयोग तरह-तरह से अपनी कल्पना के चरित्रों के साथ उसे फिट कर दिखाया. चंद्रभूषण पांडेय: चंद्रभूषण पांडेय जिले के ऐसे चर्चित रंगकर्मी हैं जिन्होंने इस शहर को कई अच्छे अभिनेता और निर्देशक दिए हैं. स्कूल के जमाने मे वे राष्ट्रीय हॉकी प्लेयर भी रह चुके हैं. 4 दर्जन से उपर नाट्य कार्यशालाओं में जहाँ वे हजारों बच्चों को प्रशिक्षण दे चुके हैं वही रश्मि-रथी जैसे काव्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भी देश मे प्रचलित हैं. वे बेहद सादे और सहज व्यक्तित्व के धनी

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इम्प्रोवाइजेशन कर प्रस्तुतियां दी तो चकित हो गए देखने वाले!

लोकनर्तक पुनेश पार्थ बच्चों के हुए मुरीद, कहा लोक नृत्य के बारीकियों की देंगे बच्चों को तालीम रविंद्र भारती और ओ पी कश्यप ने तीसरे दिन थियेटर की बारीकियों को बताया आरा, 20 जुलाई. कुछ युवा कुछ लोग को पीट रहे थे और कुछ को धमका रहे थे. इस बीच कुछ लोग दहशत के मारे चिल्ला रहे थे और कुछ की साँसे फूली हुई थी….. ये नजारा था रमना के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू के हॉल के अंदर का. जैसे ही हॉल के अंदर हुआ तो लगा जैसे काठ मार गया. हल्ला-हंगामा देखकर सचमुच डर के मारे जम गया. कुछ देर बार डरा रहे युवाओं के हाथ पर नजर गया तो उन्होंने उंगलियों को गन का शेप दिया था. यह देखकर लगा कि अरे ये तो बनावटी है. दरअसल हॉल के अंदर बच्चे प्लेन हाइजैक का सीन कर रहे थे. जहाँ अभिनव एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के तीसरे दिन वरिष्ठ रंगकर्मी व निर्देशक रविन्द्र भारती  बच्चों को अभिनय के लिए मूल तत्वों की उपयोगिता को बता रहे थे. बच्चे उनके द्वारा बताए गए फिलिंग, ऑब्जरवेशन और रिकॉल की विधि को अपना कर उनके द्वारा दिये गए सिचुएशन को तुरंत क्रिएट कर रहे थे. अभिनय के इस कार्यशाला में तीसरे दिन फीलिंग, ऑब्सरबेशन और रिकॉल की तकनीकी चीजो के बारे में जाना. इन तीनो को कैसे एक व्यक्ति के अंदर विकसित किया जाय और फिर कैसे थियेटर में इसे यूज किया जाय इसको बच्चों ने समझा.  तरह-तरह के सिचुएशन को तुरंत करने के लिए

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दूसरे दिन ऑब्जर्वेशन से स्टोरी टेलिंग तक का सीखा हुनर

नाट्यकर्मी रविंद्र भारती और आलोक सिंह ने दूसरे दिन थियेटर की बारीकियों को बताया आरा, 20 जुलाई. रमना के दक्षिणी रोड में स्थित मंगलम दी वेन्यू में चल रहे अभिनव एवं ऐक्ट द्वारा आयोजित स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ पर आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला के दूसरे दिन वरिष्ठ रंगकर्मी व निर्देशक रविन्द्र भारती ने बच्चों को अभिनय के प्रकार को बताया. उन्होंने सभी प्रकार के अभिनय को बच्चों को बताया फिर बच्चों से प्रैक्टिकली भी करवाया. इसके साथ ही उन्होंने फिलिंग, अभिनय के लिए जरूरी तत्व, ऑब्जर्वेशन और फ्लेक्सिबलिटी के बारे में बताया. वही युवा रंगकर्मी आलोक कुमार सिंह ने कार्यशाला में आये बच्चों को मिरर जेम, फेथ गेम के जरिये जहाँ टीम और एक दूसरे के बीच मजबूत कोर्डिनेशन का गुर सिखाया वही स्टोरी टेलिंग की विधि और उसको प्रभावी बनाने के तरीकों को बताया. कार्यशाला के दूसरे दिन गेस्ट के रूप में आयीं भोजपुर महिला कला केंद्र की निदेशक और 93 में कबीरा खड़ा बाजार में मुख्य पात्र की भूमिका निभाने वाली अनिता गुप्ता ने कार्यशाला में आकर बच्चों को बूस्टअप किया साथ ही बच्चों से अनुभव शेयर किया. उन्होंने बच्चों कहा कि बच्चे जो दूर से इस कार्यशाला में प्रशिक्षण के लिए आ रहे हैं उन्हें उनकी ओर से साइकिल मुहैया कराया जाएगा. दूसरे दिन के कार्यशाला में भोजपुर तैराकी संघ के अध्यक्ष और भूतपूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष नर्वदेश्वर शुक्ला,वरिष्ठ पत्रकार गोपाल मिश्रा, वरिष्ठ रंगकर्मी संजय शाश्वत और स्वयंबरा बक्शी ने भी शिरकत किया. सभी ने बच्चों को ऐसे कार्यशाला में आने के लिए धन्यवाद दिया

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एक फ्रेम में कैद पुरानी तस्वीर ने उड़ाई संगीत के एक छात्र की नींद!

क्या आपको पता है आरा की धरती पर कौन-कौन से संगीतज्ञ आया करते थे! आरा, 19 जुलाई. एक फ्रेम में कैद पुरानी तस्वीर ने संगीत के एक छात्र की नींद उड़ा दी. दरअसल छात्र को एक दुर्लभ तस्वीर मिली जिसमें संगीत के कई विभूतियों को उसने एक साथ देखा और चौंक गया. इस तस्वीर में महान पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लल्लन जी के साथ कई महान लोग थे. आरा से महज 8 किमी की दूरी पर स्थित है जमीरा गाँव. इस गांव को जमीरा इस्टेट के नाम से जाना जाता है. जमींदारों का यह गांव अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए आज भी जाना जाता है. अभी भी यहाँ स्थित हवेली इसके बीते पल के इतिहास को कहते नही थकती. संगीत के महान विभूति पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह उर्फ बाबू लालन जी यहीं के थे. उन्हें पखावज वादक के रूप में हिंदुस्तान भर में जाना जाता था. भोजपुर जो कभी शास्त्रीय संगीत की धरोहर था वह आज भोजपुरी लोकधुन के नाम पर फैले फूहड़ता के कारण विश्व कुख्यात हो गया है. बीते इतिहास के पन्नो में इसके गौरव की बातों को सुनकर यकीन नही होता कि भोजपुर की मिट्टी सचमुच संगीत और कला के लिए इतनी समृद्ध थी! इतिहास के बीते पलों का गवाह एक फ़ोटो फ्रेम है जो आज तबला वादक सुरजकान्त पांडेय को मिला. सूरज इस फोटो के बारे में बताते हैं कि यह दुर्लभ फ़ोटो आरा जमीरा के राजा महान पखावज वादक ताल शिरोमणि पंडित शत्रुंजय प्रसाद सिंह

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