कमाल है… इसने तो रुला ही दिया

आसाढ़ का एक दिन नाटक ने किया भावुक
बलिया के कलाकारों ने किया ‘आसाढ़ का एक दिन’ का मंचन
कालिदास के प्रति मल्लिका के समर्पण की कहानी कहता आषाढ़ का एक दिन


नाटक आसाढ़ का एक दिन के एक दृश्य में कलाकार




बक्सर में आचार्य शिवपूजन सहाय की स्मृति में आयोजित सम्मान समारोह व सांस्कृतिक संध्या पर आषाढ़ का एक दिन नाट्य का मंचन किया गया. शहर के वृंदावन वाटिका के हॉल में आयोजित नाटक को देखने के लिए लोग जुटे रहे.

हॉल में संकल्प की ओर से मोहन राकेश द्वारा लिखित और आशीष त्रिवेदी द्वारा निर्देशित नाटक का मंचन शनिवार को देर शाम शुरू हुए नाटक में कालीदास व मल्लिका की अद्भूत प्रेमकथा के मंचन से माहौल ऐसा बना कि कला व नाटक प्रेमियों के लिए आषाढ़ का एक दिन यादगार बन गया. मल्लिका का यह संवाद ‘मैंने भावना से एक भावना का वरण किया है, वास्तव में मैं अपनी भावना से प्रेम करती हूं…’ जब दर्शकों तक पहुंचा तो अंतर्मन तक भींग गया. मंचन के दौरान कई बार दर्शक भावुक हो गए. नाटक में कालिदास के जीवन को सार्थक करने और उन्हें बुलंदियों पर ले जाने के लिए मल्लिका ने काफी त्याग किया.

नाटक ‘आसाढ़ का एक दिन’ प्रस्तुत करते कलाकार

मल्लिका का जीवन पीड़ा के चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाता है और कालिदास यह कहते हुए कि समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता उसे छोड़कर चल देता है. इस समय मल्लिका की विलख ने दर्शकों को भावुक कर दिया.

कालिदास की भूमिका में अमित पांडेय तथा मल्लिका की भूमिका में स्मृति निधि के मंचन को दर्शकों ने खूब सराहा. इसके अलावा विलोम आनंद कुमार चौहान, अम्बिका की भूमिका ट्विंकल गुप्ता, प्रियंगु मंजरी की भूमिका में सोनी, मातुल की भूमिका में सुनील शर्मा का अभिनय भी सराहनीय रहा. अन्य कलाकारों में अमित, अर्जुन, अनु, राजेश, बसंत व अन्य थे. नाटक में संगीत ओमप्रकाश व प्रेमकुमार प्रेम प्रकाश व्यवस्था अशोक कंचन जमालपुरी, रूप सज्जा ट्विंकल व सेट डिजायन सुनील कुमार तथा वस्त्र विन्यास स्मृति का था.

 

बक्सर से ऋतुराज