ये हैं बिहार की शान

बिहार की शान बनी 3 बेटियाँ

अपने मेहनत के बल पर बनाई पहचान





बेटियों ने किया बिहार का सर ऊंचा

पटना, 12 अप्रैल. बिहारियो ने अपनी मेहनत से पूरे विश्व मे अपनी पहचान बनाई है. मेहनतकश और अपनी जुनून की वजह से हर जगह छाए रहने वाले बिहारियों को भले ही लोग हीन भावना से देखें या बिहारी का टैग लगा उन्हें छोटा समझें लेकिन नित नए आयामो से अपनी पहचान बनाने वाले बिहारियों पर बिहार को गर्व है. इस दिशा में न सिर्फ बेटों ने बल्कि बिहार की बेटियों ने भी अपनी मेहनत के बल पर बिहार का नाम रौशन किया है.

बिहार की बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं बिहार की बेटियों ने भी अपने दम पर बिहार का नाम रौशन किया है आज हम बात करेंगे बिहारी पहचान बनाने वाली श्रेयसी, प्रकृति और श्यामली की. इन तीनों बेटियों ने अलग अलग क्षेत्र में अपनी पहचान बनाकर बिहार का नाम रौशन किया है.


बिहार के जमुई से संबंध रखने वाली श्रेयसी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला डबल ट्रैप स्पर्धा में 96+2 का स्कोर करते हुए भारत को इस आयोजन का स्वर्ण पदक दिलाया. दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक करने वाली श्रेयसी  के पिता दिग्विजय सिंह बांका संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए केंद्र में मंत्री भी रहे हैं. श्रेयसी के दादा कुमार सुरेन्द्र सिंह और पिता दिग्विजय सिंह भारतीय राइफल संघ के आजीवन अध्यक्ष रहे. इस वजह से उन्हें घर में निशानेबाजी का माहौल मिला.

वहीं समस्तीपुर के केवस निजामत गांव की बिटिया प्रकृति राय को भारत तिब्बत सीमा पुलिस ( आइटीबीपी) की पहली महिला कॉम्बैट ( लड़ाकू) अधिकारी होने का गौरव प्राप्त होने जा रहा है. आइटीबीपी में देश की पहली असिस्टेंट कमांडेंट बनने जा रही 25 साल की प्रकृति को भारत – चीन सीमा से सटे नाथुला दर्रा जैसे दुर्गम स्थानों पर देश की सीमाओं की रक्षा करने का मौका मिलेगा. पिथौरागढ़, उत्तराखंड में कठिन ट्रेनिंग चल रही है, जिसके बाद प्रकृति की सीमा पर तैनाती होगी.

तीसरी बिहार की बेटी है श्यामली श्रीवास्तव जिसने एक छोटे से कस्बाई शहर आरा से निकल कर मुम्बई की चकाचौंध भरी ज़िंदगी से थोड़ा हटकर भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई. आज श्यामली की दर्जनों फिल्में सेट पर हैं और कई भोजपुरी की फिल्में हिट हो चुकी हैं.गंगा चैनल पर लगातर अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुति से उन्होंने दर्शकों को अपनी सादगी की वजह से आकर्षित किया है. अब तक कई फिल्मीं अवार्ड जीत चुकी हैं. अभी हाल ही में मुंबई में आयोजित बिहार दिवस 2018 के मौके पर श्यामली को बिहार फाउंडेशन की ओर से भोजपुरी फिल्मों में बेहतरीन अदाकारी के लिए सम्मानित किया गया. हमें गर्व है कि हमारी बिहारी पहचान को इन बेटियों ने एक नया मकाम दिया है. और उम्मीद है की बिहारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी कामयाबी के झंडे आगे भी इसी तरह गाड़ती रहेंगी.

प्रस्तुति : ओ पी पांडेय
साभार: शहाब तनवीर शब्बू