बिहार की बाढ़ ने फिर किया आगाह, 2008 की दिलाई याद

बिहार की बाढ़ ने एक बार फिर वर्ष 2008 के कोसी कहर की यादें ताजा कर दी हैं. यही नहीं, बाढ़ ने एक बार फिर सोंचने को मजबूर कर दिया है कि बाढ़ को लेकर हमारी तैयारी और योजनाएं कितनी कमजोर हैं. हमारे तटबंधों को अब कई लेयर की मजबूती देनी होगी ताकि भविष्य में इतनी आसानी से तटबंध ढेर ना हो सकें.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज पूर्णिया, अररिया और किशनगंज जा रहे हैं. अररिया में सीएम नीतीश फूड पैकेजिंग सेन्टर का जायजा लेंगे. इसके बाद वे किशनगंज भी जाएंगे और वहां सामुदायिक किचन का निरीक्षण करेंगे.

इन सबके बीच आपदा प्रबंधन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से राज्य में अब तक 304 लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 18 जिलों की एक करोड़ 38 लाख 50 हजार आबादी प्रभावित हुई है. राज्य सरकार के द्वारा बाढ़ में घिरे लोगों को सुरक्षित निकाले जाने का काम युद्ध स्तर पर चल जा रहा है. अब तक 7,34,512 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाके से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और 1346 राहत शिविरों में 327156 लोग शरण लिए हुए हैं.

  

बिहार के 18 जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. अररिया में 71 लोग, सीतामढी में 34, पश्चिमी चंपारण में 29, कटिहार में 26, मधुबनी में 22, पूर्वी चंपारण और दरभंगा में 19-19, मधेपुरा में 15, सुपौल में 13, किशनगंज में 11, पूर्णिया और गोपालगंज में 9-9, मुजफ्फरपुर में 7, खगडिया और सारण में 6-6 तथा शिवहर और सहरसा में 4-4 लोगों की मौत हुई है.




बिहार में बाढ़ की तबाही के बीच NDRF की 28 टीमें 1152 जवानों और 118 वोट के साथ, SDRF की 16 टीमें 446 जवानों और 92 वोट के साथ तथा सेना की 7 कालम 630 जवानों और 70 बोट के साथ बचाव एवं राहत कार्य में जुटी हुई हैं. SDRF NDRF की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में मेडिकल हेल्प भी मुहैया करा रही हैं.

मुजफ्फरपुर में बूढ़ी गंडक का पानी शहर के कई निचले इलाकों में प्रवेश कर गया है. यहां NDRF और SDRF की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हैं.

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