दीपावली पर मिलेगी भोजपुरी को सरकार की सौगात !

काँटो की राह’ में खड़ी ‘भोजपुरी’

कब शुरू होगी भोजपुरी की पढ़ाई?




छठ के बाद मिलेगी खुशखबरी!

राजभवन द्वारा VKSU में भोजपुरी की पढ़ाई पर लगे विराम के बाद एक बार फिर राजभवन द्वारा भोजपुरी भाषा की पढ़ाई को पुनः चालू करने के लिए सुगबुगाहट ने फिर से एक भोजपुरी के लिए जैसे रोशनी जगा दी है. दीपावली और छठ पर्व के बाद हो सकता है कि उपहार स्वरूप इस संदर्भ में राजभवन से कोई आदेश आ जाये. इस कार्य मे VC ने अपनी विशेष सक्रियता दिखाई और इस संदर्भ में उन्होंने राज्यपाल से लेकर मुलाकात भी किया.

राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात कर आये VKSU के VC सैय्यद मुमताजुद्दीन काफी उत्साहित हैं. उन्होंने पटना नाउ से बातचीत करते हुए जिस अंदाज में और जोश के साथ राजभवन के सकरात्मक बात की चर्चा की उससे यही उम्मीद जताई जा रही है कि भोजपुर वासियो को जल्द ही नए राज्यपाल द्वारा दीपावली के उपहार के रूप में भोजपुरी की पढ़ाई को फिर से चालू करने रूपी आदेश को दिया जा सकता है. VC ने बताया कि राज्यपाल से मुलाकात के बाद घंटो इस बात पर चर्चा हुई और उसके बाद राज्यपाल द्वारा बुलायी गयी बैठक में उन्होंने भाग भी लिया. VC के अनुसार राज्यपाल का रूख भोजपुरी को लेकर बड़ा ही सक्रिय है. उम्मीद है कि दिपावली और छठ की छुटियों के बाद राजभवन से खुशखबरी भोजपुरिया जनमानस को मिल सकती है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जबतक राजभवन से इस संदर्भ को लेकर चिठ्ठी नही आती तबतक कुछ भी कहना गलत होगा. क्योंकि अभी हाल ही में 9 अक्टूबर को जारी किए गए एक चिट्ठी में राजभवन ने VKSU से भोजपुरी के लिए UGC की मान्यता और राज्य सरकार की अनुमति सबंधित सवाल पूछा था जिसमें राज्य सरकार के जिम्मे इसे भेजते हुए अपना पलड़ा झाड़ा था.

भोजपुरी की राह में अभी भी हैं काँटे

VC डॉ सैय्यद मुमताजुद्दीन भले ही राजभवन से रुख से खुश हैं लेकिन साफ तौर पर कहा कि इतना आसान नही है भोजपुरी को चालू करना. क्योंकि अगर इसका आदेश राजभवन से आ भी जाता है तो भोजपुरी के स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए सीटों की संख्या भी राजभवन से मांगना पड़ेगा. साथ ही शिक्षकों की संख्या और उनकी बहाली के साथ नए छात्रों को भोजपुरी के स्नातक पाठ्यक्रम के लिए बुलाना भी एक चुनौती है.

सुनिए क्या कहा VKSU के VC ने- क्लिक करें

1साल से पेंडिंग है भोजपुरी का मामला

भोजपुरी भाषियों के भोजपुरी की पढ़ाई को बन्द हुए एक साल से ऊपर हो गए हैं. भोजपुरी बचाओ अभियान के लोगों द्वारा इसके लिए चलाए गए मुहिम के बाद आनन फानन में VKSU ने राजभवन को ड्राफ्ट ऑर्डिनेंस एन्ड रेगुलेशन से लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर के नए सिलेबस तक भेजा था. यही नही पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम माँझी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह, और राज्य सभा सांसद आर.के.सिन्हा ने उस समय के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर उन्हें लिखित आवेदन भी दिया था. इसके अतिरिक्त सांसद आर.के. सिंह ने भी भोजपुरी भाषा की पढ़ाई को शुरू कराने के लिए भोजपुरी बचाओ अभियान के लोगों से सार्वजनिक तौर पर वादा किया था.

वही NSUI का एक शिष्ट मंडल जिसमे अभिषेक द्विवेदी सहित उनके संगठन के लोग शामिल थे, ने भी राज्यपाल से मुलाकात कर भोजपुरी को यथाशीघ्र चालू करने के लिए प्रार्थना किया था. पूर्व राज्यपाल ने कई महीनों तक बहुत जल्द आश्वासन के शब्द के साथ भोजपुरी समाज को आश्वस्त किया और फिर राष्ट्रपति चुनाव में खुद के नाम आ जाने के बाद यह मामला शिथिल पड़ गया. राज्यपाल के राष्ट्रपति बन जाने के बाद नए राज्यपाल के आने तक भोजपुरी अपनी उत्थान के लिए राजभवन में कराह रही थी. नए राज्यपाल के आगमन के साथ ही लोगों का इस मामले को मिलने की योजना बन रही थी लेकिन इसी बीच राजभवन में होने वाली एडवायजरी कमिटी की बैठक ने सबकी सांसे जैसे रोक दी. बैठक से पहले सूत्रों की माने तो राजभवन भेजे गए ड्राफ्ट और ऑर्डिनेंस में सिलेबस ही गायब था. जैसे ही इस बात का भोजपुरी बचाओ अभियान से जुड़े लोगों को पता चला उन्होंने VC सैय्यद मुमताजुद्दीन से मिल कर राजभवन भेजवाया.

एक आंदोलन जो विस्फोटक रूप ले सकता है

राज्य सरकार द्वारा 1 साल तक भोजपुरी के मामले में चूप्पी ने भोजपुरी आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच एक गुस्से और खीज की भावना विकसित कर दी है. शिक्षकों और विवि की गलती का खामियाजा भोजपुरी और भोजपुर भाषी क्यों भुगते? यही वजह था कि भोजपुरी का विशाल आंदोलन 5 सितम्बर 2016 को शिक्षक दिवस के मौके पर हुआ था. राजनेताओं और राजभवन के आश्वासनो के बार-बार इंतजार के बाद भी चालू न करना और 9 अक्टूबर को राजभवन द्वारा भेजे गए VKSU को एक पत्र ने लगा जैसे भोजपुरी पर जैसे अब विराम ही लग गया. इस पीड़ा ने भोजपुरिया आंदोलन से जुड़े लोगों को जैसे तोड़ दिया. भोजपुरी भाषा की पढ़ाई नही होना जैसे पहचान मिटने की बात हो गयी. इसे लेकर भोजपुरी भाषा से जुड़े लोग अंदर ही अंदर एक विशाल आंदोलन की तैयारी में हैं. बस सबको राजभवन के रुख और पहल का इंतजार है. अगर सकरात्मक आदेश नही आता है निश्चित तौर पर एक विस्फोटक जन आंदोलन होने की आशंका है जिसमे किसी पार्टी की भूमिका नही बल्कि भोजपुरी भाषियों की भूमिका होगी. भोजपुरी से जुड़े हर लोग का बस एक ही कहना है जिसकी भी गलती से बंद हुआ हो उसे दंड मिले लेकिन भोजपुरी की पढ़ाई चालू हो क्योंकि बिना इसके 8वीं अनुसूची में जगह नही मिल सकती.

 

आरा से ओ पी पांडेय के साथ सत्य प्रकाश सिंह की रिपोर्ट