बाउल सिर्फ संगीत नहीं, पूरी जीवन पद्धति है- रूपा गांगुली

बाउल साधकों ने संगीत के माध्यम से आध्यात्मिकता का संदेश दिया

पुस्तक “बाउल प्रेमिक” का लोकार्पण रूपा गांगुली, रामबहादुर राय और शोभना नारायण ने किया




08 अगस्त को “बाउल उत्सव” की शुरुआत पूर्वाह्न 11 बजे

यूनेस्को की “मानवता की मौखिक और अमूर्त विरासत की उत्कृष्ट कृतियां” सूची में शामिल बाउल संगीत व परम्परा पर दो दिवसीय आयोजन “द वर्ल्ड ऑफ बाउल्स” की शुरुआत 7 अक्तूबर को शाम 4 बजे नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हुई. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दातृ फाउंडेशन और एकतारा कलारी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन “महाभारत” में द्रौपदी का किरदार निभाने वाली प्रसिद्ध सिने अभिनेत्री व राजनेत्री रूपा गांगुली ने किया. इस अवसर पर प्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री शोभना नारायण, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय और प्रसिद्ध बाउल कलाकार पार्वती बाउल और कला केंद्र के जनपद संपदा विभाग के प्रमुख डॉ. के. अनिल कुमार भी उपस्थित थे. कार्यक्रम की संकल्पना दातृ फाउंडेशन की कात्यायनी अग्रवाल ने की थी.

मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अभिनेत्री, रवींद्र संगीत गायिका व राजनेत्री रूपा गांगुली ने कहा कि बाउल सिर्फ गायन या संगीत नहीं है, यह जीवन जीने की पद्धति है. उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर बाउल परम्परा से बहुत प्रभावित थे. गांगुली ने गुरुदेव की एक कविता “आरु आघात” की कुछ पंक्तियां गाकर भी सुनाईं. इससे पहले पार्वती बाउल ने बाउल परम्परा के बारे में बताते हुए कहा कि यह विश्व को भारत का उपहार है. बाउल भारत की सभी परम्पराओं का सार है. बाउल साधकों ने संगीत के माध्यम से आध्यात्मिकता का संदेश दिया.

विशिष्ट अतिथि शोभना नारायण ने पार्वती बाउल को महान बाउल परम्परा का निर्वाह करने के लिए बधाई दी और उनकी कला की काफी सराहना की. उन्होंने कहा कि बाउल संगीत कला का एक प्रारूप है, लेकिन यह किसी सीमा में बंधा नहीं है. इस दौरान प्रसिद्ध बाउल साधक गुरु सनातन दास बाउल, जो पार्वती बाउल के गुरु भी हैं, द्वारा बांग्ला भाषा में लिखी गई पुस्तक “बाउल प्रेमिक” का लोकार्पण रूपा गांगुली, रामबहादुर राय और शोवना नारायण जी ने किया. इस पुस्तक में गुरु सनातन दास बाउल ने बाउल परम्परा के मर्म को बताया है. पार्वती बाउल ने इस पुस्तक के कुछ दोहे भी पढ़कर सुनाए. कला केंद्र के जनपद संपदा विभाग के प्रमुख डॉ. के. अनिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में पार्वती बाउल और उनके साथी बाउल साधकों ने अपने प्रदर्शन से उपस्थित जन को मंत्रमुग्ध कर दिया. उनकी प्रस्तुति के दौरान प्रेक्षागृह में दिव्यता का वातावरण निर्मित हो गया. दूसरे दिन यानी शनिवार, 08 अगस्त को “बाउल उत्सव” की शुरुआत पूर्वाह्न 11 बजे होगी.

राजीव रंजन श्रीवास्तव, नई दिल्ली