भोजपुरी की चाशनी में डूबा गौरीपुर

By Amit Verma Apr 3, 2017

बिदेसिया की प्रस्तुति से मुग्ध हुए दर्शक




 

असम के धूबड़ा जिले के गौरीपुर में तीसरी और अंतिम प्रस्तुति बिदेसिया की हुयी. कार्यक्रम की शुरुआत जम्मू-काश्मीर के भाँड़-पाथर से हुयी. फिर झारखण्ड से आये कलाकारों ने शिकारी लोकनृत्य और आरती प्रदतुत किया. तीसरे नम्बर पर प्रस्तुति आरा भोजपूर से आये कलाकारों ने की. सभी प्रदेशों से आये कलाकारों की प्रस्तुतियाँ अपने-आप में लाजवाब थीं. लेकिन विदेसिया की प्रस्तुति के लिए बैठे दर्शकों को देखकर बिदेसिया के बाद भी कोलकाता के कलाकारों ने बाउल की प्रस्तुति भी दी.

धूबड़ा जिले में बिहार,यूपी और राजस्थान से आये लोग बहुतायत संख्या में हैं जो 6-7 पीढ़ियों से यहाँ रहते हैं. स्वच्छ और मनमोहक वातावरण वाला गौरीपुर शांत इलाका है. 3 बजे के आसपास यहाँ सभी कलाकारों का दल पहुँच गया. जहाँ कलाकारों को देख लोगों का जमावड़ा भी लगने लगा. गौरीपुर पुस्तकालय के हॉल में होने वाले इस कार्यक्रम के लिए इक्कट्ठे लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने जैसे ही बिदेसिया का नाम सुना तो सबने भिखारी ठाकुर का ही नाम याद किया. कारण कई पीढ़ियों से रह रहे अधिकतर लोग बिहार और यूपी के ही हैं. शाम होते हीं गौरीपुर के लोगों का जमवाड़ा अपने प्रदेश के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नाटक को देखने के लिए लग गया. हालांकि सबसे अंत में बिदेसिया की प्रस्तुति हुयी. बावजूद इसके अंत तक उत्साह के साथ डटे रहे और नाटक के अंत में सुंदरी और रखेलिन के साथ बिदेसी के साथ रहने वाले दृश्य को देखकर दर्शक आत्मविभोर हो ख़ुशी से काफी देर तक तालियाँ बजाते रहे.

 

कई दशक के बाद यहाँ के लोगों को उनकी अपनी मिटी की खुशबु भोजपुरी के कलाकारों ने उनकी मातृभाषा में  सौगात के तौर पर दिया था. जाहिर है यह अपनेपन के एहसास से कम नहीं था. कई स्थानीय लोगों ने बिहार का नाम सुनते ही कलाकारों को अपने घर रुकने और रहने तक का दावत दे डाला, जो बिहार की संस्कृति की एक पहचान है. आज भी अतिथियों का सत्कार हमारे यहाँ ऐसे ही किया जाता है. बाकी की प्रस्तुतियाँ भी प्रभावी थीं लेकिन बिदेसिया की लोक-धुनों ने दर्शकों पर कुछ अलग ही जादू किया था. वैसे दर्शक भी मिलें जो इस कार्यक्रम को नहीं देख पाने का अफ़सोस जाहिर कर रहे थे, कारण वो शहर से बाहर थे और वापस आने तक कार्यक्रम खत्म हो चूका था. तकनीक की इस दौर में फेसबुक पर बिदेसिया की इस प्रस्तुति को लाइव किया गया था जिसका लोगों ने लिंक लिया. लेकिन उनका आँखों के सामने मंचीय प्रस्तुति को लाइव देखने की इच्छा नहीं ख़त्म हुयी. आसाम के सुदूर प्रान्त के लोगों को इन्तजार है फिर से ऐसे ही भोजपुरी लोक प्रस्तुति की.

 

असम से ओपी पांडे

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