सिद्धनाथ मंदिर में पहुँचेगा कांवरियों का जत्था

आरा के बिन्द टोली में स्थित श्री सिद्धनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए 100 युवाओं का जत्था कल यानि शिवरात्रि के अवसर पर बड़हरा से गंगाजल लेने के बाद उक्त मंदिर में भगवान शिव को अर्पित करेगा. सभी जल ले जाने वाले एक तरह के ड्रेस कोड में होंगे. इन ड्रेसों पर इस जत्थे का नाम ‘सिद्धनाथ मनोकामना कांवर यात्रा’ अंकित होगा.




सिद्धनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
बिन्दटोली स्थित सिद्धनाथ मंदिर बहुत ही पुराना है. इस मंदिर का नाम त्रेता युग से जुड़ा है. कहा जाता है कि एक महात्मा जिनका नाम श्याम गिरी था ने भगवान् शिव का शिवलिंग बना वर्षों त्तपस्या की थी. कालांतर में उस समय मंदिर के पास से गंगिया अर्थात गंगा नदी बहा करती थी. महात्मा नदी के किनारे मिट्टी का शिवलिंग बना कर पूजा किया करते थे लेकिन पानी के बहाव के कारण शिवलिंग पुनः मिट्टी में विलीन हो जाता था. तब महात्मा ने शिव की आराधना करते हुए शिवलिंग को अपने रूप में रहने की माँग की थी. उनके इस प्रार्थना के बाद शिवलिंग अपने रूप में ही रहा और गंगा नदी यहां से दूर होती चली गयी.

इस घटना के बाद इस शिवलिंग के सिद्ध करने की चर्चा ने जोर पकड़ा और उक्त स्थल पर मंदिर निर्माण हुआ. यह भी कहा जाता है कि ताड़का वध के बाद विश्वामित्र ऋषि और रामजी को जनकपुर स्वयंवर की सूचना मिली. इसके बाद वे इसी श्री सिद्धनाथ मंदिर में आशिर्वाद लेते हुए आगे बढ़े. यह सिद्ध पीठ होने के कारण श्री सिद्धनाथ के नाम प्रसिद्ध हुआ. यह एक मनोकामना सिद्ध स्थल है. यहाँ चार शिवलिंग है. सिद्धनाथ, भूतनाथ, मनोकामना नाथ, और एक और शिवलिंग है जिसका निर्माण मंदिर निर्माण के बाद हुआ. सनातन धर्म में ऐसा माना जाता है कि शिव का अंश खाने वाले का दाह संस्कार नहीं बल्कि समाधि बनायी जाती है. मंदिर में यह प्रमाण देखने को मिलता है. महात्मा श्याम गिरी महाराज के साथ कई अन्य साधकों की भी समाधियाँ बनी हुई हैं.

सिद्धेश्वरनाथ गिरी, मुख्य पुजारी, सिद्धनाथ मंदिर, आरा

बड़हरा से आरा तक होगी पैदल यात्रा

100 युवाओ का दल कल यानि शक्रवार को सुबह 6 बजे गो-रक्षणी, गाँगी के पास से बड़हरा विभिन्न गाड़ियों द्वारा प्रस्थान करेगा. वहाँ से यह पूरा जत्था गंगा नदी से जल लेकर पैदल श्री सिद्धनाथ मंदिर के लिए प्रस्थान करेगा और सैकड़ों लीटर जल श्री सिद्धनाथ बाबा को अर्पित करेंगे. सावन में जहां कई शिव स्थलों पर लोग दर्शन के लिए दूर दराज जा रहे हैं वैसे में अपने शहर में स्थित सिद्ध और पुरातन मंदिरों के लिए लोगों का ध्यान आकर्षित करने के युवाओं का यह प्रयास आने वाले समय में निश्चित रूप से पर्यटकों को आकर्षित करेगा.


मंदिर में कई पुरातनकालीन मूर्तियों के अवशेष

श्री सिद्धनाथ मंदिर प्रांगण में कई पुरातनकालीन मूर्तियां हैं जिनमे काले और उजले पत्थरो पर तराशी गयीं मूर्तियाँ है. मूर्तियों के कई टूटे और उसका सही रूप मंदिर के पुरातन होने का प्रमाण भी देती हैं. श्रावण और शिवरात्रि के दौरान दूर दराज से साधकों का यहाँ जमवाड़ा लगता है, जहाँ वे सिद्धि के लिए विशेष अनुष्ठान और रुद्राभिषेक भी करते है.

 

 

आरा से ओपी पांडे