‘करब छठी माई बरत तोहार’ गीत में है लोक आस्था-अजीत कुमार अकेला

अनुराधा पौडवाल और रविन्द्र जैन के साथ की गायकी 

पांच हजार से अधिक गीत गा चुके है 




भोजपुरी के पारम्परिक लोक गायन में अजित कुमार अकेला ने जो मुकाम हासिल किया है उस मुकाम तक पहुँचने में उनका लम्बा संघर्ष और कड़ी मेहनत है जो आज वे लोगों के दिलों में राज करते हैं. कोई भी अवसर हो अवसर  हो उनके चाहने वाले हर समय कुछ नया सुनने को बेताब रहते हैं .बात पूर्वी ,झूमर,चैता या निर्गुण की हो तो अजीत कुमार अकेला ने अपने चाहनेवालों को कभी निराश नहीं किया है.सभी रसों के गीत उन्होंने गाये हैं. पांच हजार से अधिक भोजपुरी मगही और मैथिलि गीतों से अपने फन का जौहर दिखाने वाले अजीत कुमार अकेला का  एल्बम ‘करब छठ के बरतिया’ जिसे घर घर में लोग पसंद करते हैं . जिसके माध्यम से उन्होंने ने लोक आस्था का महान पर्व छठ के कई आयामों को अपने गीतों के जरिए प्रस्तुत किया है.अजीत अकेला लोक गायन में देश विदेश में अपनी गायकी से बिहार का नाम ऊँचा करते आये है . इसके लिए उन्हें दर्जनों पुरस्कार भी मिल चुके है .अनुराधा पौडवाल के साथ  छठ महिमा,हे छठी मैया, करब छठ  के बरतिया और बहंगी छठ मैया के जाए जैसे लोकप्रिय एल्बमों में छठ की पावनता भरे गीतों को पिरोया है.  इस बार उन्होंने  छठ पर्व के दो गीत गाये हैं ,दोनों ही गीत सुनने लायक बन पड़े  है  आप भी सुनिए …

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https://youtu.be/ZlgM1rxJuMs