“संगीत के बिना “ब्रांड बिहार” पुनर्निर्मित नहीं हो सकता”

“Brand Bihar Can not be ReBuilt Without the Music”

अश्लील एवं द्विअर्थी लोकगीतों पर प्रतिबंध का स्वागत




पटना।। प्रख्यात लोकगायिका विजया भारती ने आज पटना में संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सचिव प्रणव कुमार (IAS) एवं निदेशक (संस्कृति) रूबी से सौजन्य भेंट की.

इस मुलाकात में उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाकारों की दशा एवं संस्कृति-आधारित आत्मनिर्भरता पर अपने विचार रखे और राज्य के सांस्कृतिक पुनरुत्थान, कलाकारों के प्रोत्साहन और विभिन्न कलाओं के समग्र विकास, संरक्षण और संवर्धन के लिए पटना में एक विशेष कला ग्राम की स्थापना की मांग की.

विजया भारती ने कहा कि बिहार — गर्व की वह भूमि है, जहाँ से भारत ने भाषा पाई, सुर पाये, सौहार्द्र, समानता और समागम की संस्कृति विकसित की. उन्होंने कहा कि बिहार केवल एक राज्य नहीं, एक सभ्यता है. यह वह भूमि है जहाँ कला, संगीत, साहित्य, दर्शन, धर्म, भाषा, शिक्षा और लोकतंत्र — सबने अपना प्रथम स्वर पाया, विश्व में स्थापित किया और कीर्तिमान बनाया.

विजया भारती ने बिहार को लेकर कहा कि यह वही धरती है जहाँ महाकवि विद्यापति ने मैथिली को अमर कर दिया, जहाँ भिखारी ठाकुर ने लोक-नाट्य को जनता की आवाज़ बनाया, जहाँ महेंद्र मिसिर ने मगही को साहित्य की गरिमा दी. यह वही भूमि है जहाँ महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह से सत्य और अहिंसा को विश्व-पटल पर स्थापित किया, जहाँ बाबू कुंवर सिंह ने 1857 में अंग्रेज़ों के विरुद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल फूँका। बिहार — यानी आर्यभट्ट की जन्मभूमि, चाणक्य की कर्मभूमि, नालंदा एवं विक्रमशिला की शिक्षा-परंपरा, बोधगया का ज्ञान, वैशाली का विश्व का प्रथम गणराज्य — लोकतंत्र की जननी.

यहाँ सोहर जन्म का स्वर है, समदाउन विदाई का, कजरी विरह की, चैती फसल की, झूमर उल्लास का, निर्गुण आत्म-खोज का, और छठ गीत सूर्य-उपासना का. मिथिला की मधुबनी, भोजपुर का आरा, मगध का राजगीर, अंग की भागलपुर, बज्जिका की बोली — ये केवल नाम नहीं, सभ्यता के स्तंभ हैं. बिहार की पहचान उसकी विविधता में है — भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका, बज्जिका, अवधी.

अश्लील और द्विअर्थी लोक संगीत पर राज्य सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को ऐतिहासिक कदम करार देते हुए विजया भारती ने कहा कि – “मैं बिहार सरकार को हृदय से बधाई देती हूँ. 9 फरवरी 2026 का वह ऐतिहासिक आदेश, जिसके द्वारा अश्लील, द्विअर्थी एवं जातिसूचक भोजपुरी आदि गानों पर सार्वजनिक स्थलों एवं वाहनों में पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, सांस्कृतिक गरिमा, सामाजिक सद्भाव एवं महिलाओं की मर्यादा की रक्षा की दिशा में निर्णायक पहल है. यह केवल प्रतिबंध नहीं, पुनर्स्थापना का आरंभ है.”

हालांकि साथ ही उन्होंने कहा कि “प्रतिबंधों के साथ प्रोत्साहन भी अनिवार्य है. कोविड-19 के बाद बिहार के हज़ारों लोक कलाकार आज भी संघर्ष कर रहे हैं। उनके लिए मंच, मानदेय, बीमा, पेंशन एवं प्रशिक्षण — यही सच्ची सांस्कृतिक सेवा होगी.”

Related Post