आई.ए.वी.एम.आई का 32वाँ वार्षिक सम्मेलन शुरू

बेहतर उत्पादन और व्यापार के दृष्टिकोण से पशु स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक और तकनीकी नवीनीकरण विषयक राष्ट्रीय अधिवेशन में विशेषज्ञों ने रखे विचार
पशुधन रोग नियंत्रण के क्षेत्र में और अधिक काम करने की जरूरत – डॉ मंगला राय

फुलवारी शरीफ (अजीत) | बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना द्वारा आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ वेटेरिनरी माइक्रोबायोलॉजिस्ट, इम्यूनोलॉजिस्ट एंड स्पेशलिस्ट इन इनफेक्शियस डीसीसेस (आई.ए.वी.एम.आई) का 32 वाँ वार्षिक सम्मेलन सह बेहतर उत्पादन और व्यापार के दृष्टिकोण से पशु स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक और तकनीकी नवीनीकरण विषयक राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्धघाटन समारोह, बामेति सभागार, पटना में आयोजित किया गया. उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. मंगला राय, भूतपूर्व महानिदेशक व सेक्रेटरी डी.ए.आर.ई, भा.कृ.अ.प, नई दिल्ली, और विशिष्ट अतिथि डॉ.एके श्रीवास्तव, चेयरमैन कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली, डॉ.ए.के.गहलोत भूतपूर्व कुलपति, राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर, डॉ. अशोक कुमार, ए.डी.जी एनिमल हेल्थ भा.कृ.अ.प, नई दिल्ली, प्रो. पी.के.उप्पल, भूतपूर्व सलाहकार पशुपालन व डेयरी और मत्स्य विभाग, पंजाब सरकार, डॉ. एम.पी. यादव, भूतपूर्व निदेशक आईवीआरआई, डॉ शांतनु बंद्योपाध्याय, एफ.ए.ओ. सलाहकार एवं भूतपूर्व पशुपालन कमिश्नर, भारत सरकार, डॉ. एके तिवारी जनरल सेक्रेट्री, आई.ए.वी.एम.आई, और बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह मौजूद थे. समारोह का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया.

समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि डॉ मंगला राय ने कहा की बिहार में पशुधन रोग नियंत्रण के क्षेत्र में और अधिक काम करने की आवश्यकता है, पशुधन के विकास के बारे में सोंचे जाने की जरुरत है. सिर्फ पशुधन में ही नहीं बल्कि पुरे देश की आर्थिक वृद्धि के लिए मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूअर पालन, के क्षेत्र में नवीन प्रौद्योगिकी के प्रयोग पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है. इन क्षेत्रों का एकत्रीकरण कर इसे आगे बढाया जा सकता है. उन्होंने जलवायु परिवर्तन में तेजी से हों रहे बदलाव और पशुपालन और इससे जुड़े क्षेत्रों में पड़ रहे प्रभाव और उसके निराकरण के लिए कदम उठाये जाने की बात कही. उन्होंने कहा की मिट्टी और मिट्टी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों के प्रबंधन के कार्य किये जाने चाहिए इसे अलग नहीं रखा जा सकता क्योंकि ये अतिअवाश्यक है. बिहार को आदर्श नेतृत्व वाला प्रदेश बताते हुए उन्होंने कहा की बिहार इस क्षेत्र में बेहतर करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल स्थान बना सकता है .
डॉ. एके तिवारी जनरल सेक्रेट्री, आई.ए. वी.एम.आई ने कहा की हम परम्परागत तकनीक को भूलते जा रहे है, पर नए तकनीक का सृजन वहीँ से हुआ है, कभी-कभी पुराने परम्परागत तकनीक की और लौटना लाभप्रद सिद्ध होता है. एंटीबायोटिक के लाभ और नुकसान पर भी उन्होंने अपनी बातें रखी.
डॉ. एम.पी. यादव, भूतपूर्व निदेशक आईवीआरआई ने कहा की हमें उपयोगी सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स) पर विशेष जोर देते हुए काम करने की जरुरत है . जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव को रोकने के लिए हमें पर्यावरण के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पर्यावरण हित पर काम करने की आवश्यकता है. वैक्सीनेशन पर बोलते हुए उन्होंने कहा की वैक्सीन बहुउपयोगी अविष्कार है, रोग और उसके संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन का उपयोग किया जाना चाहिए.
पंजाब सरकार के पशुपालन व डेयरी और मत्स्य विभाग के भूतपूर्व सलाहकार प्रो.पी.के.उप्पल ने कहा की पशुपालन, मुर्गीपालन, डेयरी, मत्स्यपालन के क्षेत्रो में किसी भी प्रकार का अनुसन्धान और खोज का सीधा फायदा किसान और पशुपालकों पर हों ये ध्यान में रखा जाना सबसे जरुरी है, साथ ही फ़ूड सिक्यूरिटी, फ़ूड हाइजीन और जूनोटिकस बीमारियों के और शोध केन्द्रित करने की आवश्यकता है.बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ रामेश्वर सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत और आभार प्रकट किया .उन्होंने कहा की पशु सूक्ष्म जिव इम्युनोलॉजी , संक्रामक रोगों और वैसिनोलॉजी के क्षेत्र में नवीन शोधों , तकनिकी विकास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार विमर्श के उद्देश्य से इस सम्मलेन का आयोजन किया गया है. उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के डायरेक्टर डी.आर.आई सह डीन पिजिएस डॉ हरिमोहन सक्सेना ने कांफ्रेंस के थीम पर चर्चा की.




इस सम्मलेन में इस क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले शोधार्थियों और वैज्ञानिको को पुरस्कृत भी किया गया. जिसमे आई.ए.वी.एम.आई फ़ेलोशिप 2018: डॉ अशोक कुमार तिवारी, हेड डिवीज़न ऑफ बायोलॉजिकल स्टैंडर्डाइजेशन, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, उत्तर प्रदेश, आई.ए.वी.एम.आई फ़ेलोशिप 2018: डॉ अशोक कुमार, ए.डी.जी एनिमल हेल्थ भा.कृ.अ.प, नई दिल्ली , आई.ए.वी.एम.आई फ़ेलोशिप 2019: डॉ वीके गुप्ता, संयुक्त निदेशक, कैडरैड, आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा, अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, यूपी , डॉ. पीजी पाण्डेय मेमोरियल ओरेशन अवार्ड: डॉ शांतनु बंद्योपाध्याय, एफ.ए.ओ. सलाहकार एवं भूतपूर्व पशुपालन कमिश्नर, भारत सरकार , आई.ए.वी.एम.आई फ़ेलोशिप 2019: डॉ मधु होश्मानी, प्रिंसिपल साइंटिस्ट, आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा, अनुसंधान संस्थान, हेब्बल, बंगलुरु , आई.ए.वी.एम.आई फ़ेलोशिप 2019: डॉ वाई.के.एम रेड्डी, प्रोफेसर सह हेड, वैक्सीन रिसर्च सेण्टर- वायरल वैक्सीन सेण्टर फॉर एनिमल हेल्थ स्टडीज, चेन्नई , आई.ए.वी.एम.आई उत्कृष्ट आयोजक अवार्ड 2019: डॉ. बी.श्रीदेवी, प्रोफेसर सह हेड, डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटरनरी माइक्रोबायोलॉजी, वेंकटेस्वर वेटरनरी यूनिवर्सिटी, तिरुपति शामिल हैं.