सावधान ! कहीं आपके आसपास तो नहीं नशेबाज मासूम चोर…

By pnc Aug 28, 2016

बेखबर पुलिस, मस्त नशेबाज मासूम चोर
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रिपोर्ट – पटना सिटी से अतुल कुमार
पटना सिटी में नशेबाज मासूम चोरों का गिरोह सक्रिय है लेकिन पुलिस-प्रशासन इस बात से
पूरी तरह से बेखबर है. हाल के दिनों में नशेबाज मासूम चोरों के गिरोह ने सुल्तानगंज थाना अंतर्गत चैधरी टोला, गंगा विहार कॉलोनी लोनी, टेकारी रोड व मउआर लेन सहित कई मुहल्लों में चोरी
की वारदातों को अंजाम दे मुहल्लेवासियों का जीना हराम कर दिया है. आये दिन घरों व लॉज से महंगे मोबाइल व बटुआ चोरी हो जा रहे हैं लेकिन शातिर चोरों का पता नहीं चल पा रहा है. ऐसे चोरों को पकड़ना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं. सबसे मुश्किल इनकी पहचान को लेकर है क्योंकि ये कोई साधारण चोर नहीं बल्कि नशेबाज मासूम चोर हैं.




शराबियों की शामत…नशेड़ियों की पौ-बारह
बिहार में जहां शराबियों की शामत आयी हुई है वहीं गंजेड़ी, भंगेड़ी व सोलूशन से नशा करनेवाले नशेड़ी मस्ती में झूम रहे हैं क्योंकि उनके उपर किसी का ध्यान नहीं है. लेकिन जरा ठहरिए…बात सिर्फ नशा करके मस्ती तक ही सीमित नहीं है बल्कि ऐसे लोगों ने अपना एक सिंडीकेट बना रखा है. उनलोगों ने गलत काम के लिए नशेबाज मासूम बच्चों की फौज खड़ी कर रखी है. चोरी व
छिनतई की वारदातों को बड़े ही शातिराना तरीके से अंजाम देते हैं ऐसे गिरोह. पहले नशा फिर चोरी जी हां, नशेबाज चोरों के गिरोह में छोटे-छोटे बच्चों की भरमार रहती है. बाजाप्ता ट्रेनिंग के बाद बच्चों को धंधे में उतारा जाता है. पहले किसी सभ्रांत कॉलोनी को चुना जाता है, जहां दोपहर में सन्नाटा पसरा रहता है. वहां पर एक बड़ा लड़का अपने साथ एक छोटे लड़के को लेकर खड़ा रहता है. दोनों सोलूशन सूंघते हैं. सोलूशन एक प्रकार
का केमिकल है जो पंक्चर व जूते-चप्पल रिपेयर करने के काम आता है. इसे कपड़े में भरकर सूंघा जाता है. जानकार बताते हैं कि यह ऐसा नशा है जिसमें पकड़ाने का चांसेज बहुत कम है. अमूमन पहले तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि कोई इस तरह नशा भी कर सकता है. पहले आप इसे किसी पागल की हरकत समझ इग्नोर करेंगे लेकिन जब बार-बार वह शख्स ऐसी प्रक्रिया को दोहरायेगा तो आपको शक होगा कि आखिर ये लोग कर क्या रहे है.

क्या है मोडस आपरेंडी
दोपहर में सभ्रांत कॉलोनियों में सन्नाटा पसरा रहता है जिसका ये फायदा उठाते हैं. पहले आपके घर के आसपास सोलूशन का नशा करते हैं. नशा करने के बाद बड़ा लड़का छोटे बच्चे को किसी घर में घुसाता है और खुद बाहर टहलते रहता है. छोटा बच्चा आराम से मोबाइल, पर्स व अन्य छोटी चीजों पर हाथ साफ कर बाहर निकल आता है. अगर कभी पकड़ा भी जाता है तो लोग उसे डांट-डपटकर छोड़ देते हैं क्योंकि उसकी उम्र महज 6 से 10 साल के बीच होती है. आप यकीन ही नहीं कर सकते कि इतना छोटा बच्चा ऐसी हरकत भी कर सकता है. चोरी करने के पहले वो दो-तीन घंटे आपके घर के आसपास रेकी करते हैं. इस दौरान वो आपके घर के अंदर व बाहर हर आने-जानेवालों की गतिविधि को वॉच करते हैं. ज्यादातर वैसे घरों को निशाना बनाते हैं जिसमें बड़ी संख्या में स्टूडेंट रहते हैं. एक तो उन्हें ऐसे घरों में घुसने में आसानी होती है क्योंकि वहां आने-जानेवालों पर रोक-टोक नहीं होती दूसरा कि वहां से बड़ी संख्या में मोबाइल व पैसे मिलने की संभावना रहती है. जिस घर में घुसना संभव नहीं होता है उस घर की खिड़कियों से छड़ या अक्सी के सहारे पैंट व मोबाइल खींच लेते हैं.

सुंदर घाट बने नशेड़ियों के अड्डे
सरकार ने घाटों का सौन्दर्यीकरण तो करा दिया लेकिन उसकी सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी.पटना सिटी के चौधरी टोला घाट, पथरी घाट, टेकारी घाट व गायघाट सहित कई ऐसे घाट हैं जहां टहलने के बाद दोपहर से लेकर रात तक नशेड़ियों का ही जमघट लगा रहता है. नशेड़ियों की कोई उम्र सीमा नहीं होती बल्कि छोटे-छोटे बच्चे भी सिगरेट में गांजा भरकर पीते हैं. आम लोगों को लगता है कि वो सिगरेट पी रहे हैं. नशे के दौरान ये लोग आपस में मारपीट व हंगामा भी करते हैं. साथ ही चोरी से लेकर छिनतई व अन्य अपराध की योजना भी बनायी जाती है. जिन्हें छोटे-छोटे बच्चे अंजाम देते हैं. स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत पुलिस-प्रशासन से की है लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है. अगर सही तरीके से पेट्रोलिंग की जाये तो ऐसे असामाजिक तत्वों पर अंकुश लगाया जा सकता है.

By pnc

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