एनआईओएस से डीएलएड करने वाले शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी खबर

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के ढाई लाख प्रशिक्षित शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए बिहार सरकार को आदेश दिया है कि जिन शिक्षकों ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग( एन आइ ओ एस ) से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन(डी एल एड) किया है उनकी डिग्री पूरी तरह मान्य है. इसलिए इन्हें भी बिहार में प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया में भाग लेने का मौका मिलना चाहिए. पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार को ऐसे शिक्षकों को 4 हफ्ते का वक्त देने का आदेश दिया है ताकि ये भी विभिन्न प्रखंड, पंचायत और नगर निकायों में प्राथमिक शिक्षक और मिडिल स्कूल टीचर के लिए अप्लाई कर सकें.आपको बता दें कि बिहार सरकार ने पिछले साल नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन के पत्र का हवाला देते हुए एनआईओएस से डीएलएड करने वाले शिक्षकों की डिग्री को मान्यता देने से मना कर दिया था. इन सभी शिक्षकों को बिहार में प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन की प्रक्रिया में भाग लेने से मना कर दिया गया था, जिसके बाद इन शिक्षकों ने पटना हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी.

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प्रशिक्षित शिक्षकों को अभी और करना होगा इंतजार। 23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

पटना (राजेश तिवारी) | तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख……… जी हां यह एक फिल्मी डायलॉग है लेकिन NIOS से Dl.Ed किये हुए छात्रों के लिए यह तारीख काफी कष्टदायक नजर आ रही है और एक बार फिर मायूसी हाथ लगे हैं. पटना हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई लेकिन बिहार सरकार की लापरवाही के कारण एक बार फिर इन प्रशिक्षित शिक्षकों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा. आज पटना हाई कोट में सुनवाई के दौरान जैसे ही सुनवाई शुरू हुई शिक्षा विभाग के सरकारी वकील ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत से दरखास्त किया कि अभी मेरी तैयारी पूरी नहीं हुई है इसलिए थोड़ा और समय दिया जाए इस पर माननीय कोर्ट ने शिक्षा विभाग के वकील को बात बात मानते हुए 1 सप्ताह का समय दिया है. अब अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी जिसमे शिक्षा विभाग अपना पक्ष रखेगी. हालाकि NIOS से Dl.Ed किए हुए प्रशिक्षित शिक्षकों को आज उम्मीद थी कि माननीय कोर्ट के द्वारा कम से कम फॉर्म भरने का समय मिलेगा. लेकिन बिहार सरकार की घोर लापरवाही की चलते एक बार फिर उन्हें अगली समय का इंतजार करना होगा.आपको बता दें कि बिहार के करीब ढ़ाई लाख प्रशिक्षित शिक्षक इस नियोजन प्रक्रिया से बाहर है. दरअसल मामला नियोजन प्रक्रिया शुरु होने के समय बिहार सरकार ने एनसीटीई से मार्गदर्शन मांगा था कि इन एनआईओएस से डीएलएड की हुए शिक्षकों को क्या किया जाए. जिस पर NCTE ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया, जिसके बाद बिहार सरकार ने इन सबको नियोजन प्रक्रिया

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