महागठबंधन की प्रेस कांफ्रेंस में बोले तेजस्वी

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट)| पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर आज महागठबंधन की बैठक सम्पन्न हुई. इसमें लोकसभा चुनाव में महागठबंधन की जबरदस्त हार पर समीक्षा हुई. इसके बाद तेजस्वी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. यहां उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में जनता ने हमें नकारा नहीं है. हमारा मनोबल नहीं गिरा है. अगले चुनाव में जनता के बीच रहकर NDA को धूल चटाने का काम करेंगे. तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है. हम लोग हौसला नहीं हारेंगे बल्कि मजबूती से एकजुट रह कर मुकाबला करेंगे. एनडीए पर निशाना साधते हुए तेजस्वी ने कहा कि जनता के मुद्दों पर लड़ाई लड़ते हुए, इन नेताओं ने लोगों को भ्रमित किया. एक षडयंत्र कर लोगों को गुमराह किया गया. तेजस्वी यादव ने आहे कहा कि लोकसभा चुनाव में लोगों की लड़ाई और आवाज को दबाया गया. उन्होंने कहा कि चुनाव में कौन हारा, कौन हारा ये बातें होती रहती हैं. लेकिन यह अंत नहीं है, आगे की लड़ाई बाकी है. ये हार कोई अंतिम हार नहीं. बिहार विधानसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं. एकजुट रह कर जनता के बीच जाएंगे और अपनी बातों को रखेंगे.

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महागठबंधन को Exit Poll की आड़ में बड़ी धांधली की आशंका

गलत Exit poll की आड़ में है बड़ी धांधली की आशंका : महागठबंधनदेश में भारी बहुमत के साथ बनेगी UPA की सरकारबिहार की सारी सीटों पर महागठबंधन की होगी रिकार्ड जीतपटना (ब्यूरो रिपोर्ट)। लोकसभा चुनाव 2019 के मतदान के बाद आये Exit Poll को महागठबंधन के सभी दलों ने सरासर गलत बताते हुए कहा कि इस झूठे Exit Poll की आड़ में बड़ी धांधली की आशंका है. होटल मौर्या में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में मंगलवार को राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा, विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी, राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष रामचन्द्र पूर्वे, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा और हम पार्टी के प्रदेश अध्‍यक्ष बीएल वैश्‍यंत्री ने संयुक्त रूप से कहा कि आज देश में जो माहौल बनाया जा रहा है वो खतरनाक है. देश के कई हिस्सों से EVM पकड़े जाने की खबरें आ रही है. इसमें 20 लाख EVM गायब है, जिसका ब्‍यौरा चुनाव आयोग के पास नहीं है. यह देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक है. उन्‍होंने मतगणना के दौरान होने वाली गड़बड़ी को लेकर महागठबंधन के कार्यकर्ताओं और आम जनता से सतर्क रहने की अपील की. उन्‍होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद जिस तरह Exit Poll आये और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया के हर माध्यम में EVM मशीन को लेकर देश भर से आ रही खबरें इस बात की ओर इशारा करती है कि इस बार एनडीए की जमीन खिसक चुकी है. इसलिए चुनाव जीतने के लिये उनकी ओर

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मिथिलांचल में महागठबंधन : क्यों हाशिये पर हैं ब्राह्मण

पटना (निखिल के डी वर्मा की रिपोर्ट) | बात शुरू करता हूं जेपी आन्दोलन की. यह आन्दोलन देश में हावी हो रही कथित कानूनी अराजकता और संवैधानिक संकट के विरोध में हुआ था. नतीजा भी बेहतर रहा. केन्द्र से लेकर राज्यों तक सत्ता बदल गई. नई मानसिकता के साथ शासन की शुरुआत हुई. नब्बे के दशक के शुरुआती दिनों तक सब ठीक रहा. बाद के दिनों में राजनीतिक सोच जाति और धर्म के इर्द-गिर्द घूमने लगा. बिहार में लालू को सत्ता मिली. सामाजिक ताना बाना बदलने लगा. पिछड़ों को पहचान मिली लेकिन समाज में जातीय तनाव फन उठाना शुरू किया. नतीजे के तौर पर सूबे में कई नरसंहार हुए. जातियों को आधार बना कर वोटों का ध्रुवीकरण शुरू हुआ, बल्कि कुछ पार्टियां जाति विशेष के तौर पर पहचान बनाने में कामयाब रही. इन पार्टियों के नेता राज्यहित को दरकिनार करते हुए खुद के लिए जाति के नाम पर गोलबंदी किया. यह दौर भी लम्बा चला, कई अहित हुए, कई जातीय समीकरण बदले. लेकिन एक-दो जातियों के प्रति राजनीतिक पार्टियों का एप्रोच आज भी नहीं बदला है. यहां बात की जा रही है महागठबंधन में लीड रोल में शामिल राजद की. राजद के शुरुआती दौर में वरीय ब्राह्मण नेताओं के तौर पर शिवानंद तिवारी (जो खुद भी जाति के नेता के तौर पर अपनी पहचान नहीं मानते) और रघुनाथ झा का उल्लेख किया जा सकता है. रघुनाथ झा अब नहीं रहे और शिवानंद बाबा कभी भी जातीय हित की बात करना मुनासिब नहीं समझा. आज समय बदल गया है. लालू और

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सत्र से पहले महागठबंधन की बैठक से परहेज क्यों!

28 जुलाई से बिहार विधनमंडल का मॉ़नसून सत्र शुरू हो रहा है. बिहार के इतिहास में इस बार ये सत्र ऐतिहासिक होने जा रहा है जब सरकार के भविष्य पर अनिश्चितता छाई हुई है. ना तो सीएम और ना ही डि्टी सीएम सदन में एक साथ बैठने की स्थिति में हैं क्योंकि दोनो के बीच तल्खी की बातें सार्वजनिक हैं. यही नहीं, सत्र से पहले राजद और जदयू अपने-अपने विधायक दल की बैठक बुधवार को कर रहे हैं लेकिन महागठबंधनव की संयुक्त बैठक की कोई चर्चा नहीं है. इसका सीधा फायदा विपक्षी दल बीजेपी को मिलता दिख रहा है. बीजेपी ने पहले ही तेजस्वी के इस्तीफे को लेकर मॉनसून सत्र नहीं चलने देने की चेतावनी दी है. अब अगर सत्र के दौरान बीजेपी तेजस्वी के इस्तीफे की मांग करती है या फिर इसपर चर्चा की मांग करती है तो क्या सरकार की तरफ से जदयू या नीतीश कोई जवाब देने की हालत में होंगे.  इन सब को देखते हुए बुधवार से लेकर आने वाले कुछ दिन बिहार की राजनीति में अहम होने वाले हैं. बता दें कि बुधवार 26 जुलाई को राजद और जदयू, दोनों ही दलों ने अपने-अपने विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है. दोपहर 12.30 बजे से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर राजद विधानमंडल दल की बैठक आयोजित है तो सीएम नीतीश कुमार के आवास पर शाम 5.30 बजे से जदयू विधानमंडल दल की बैठक होगी. जदयू ने पहले यह बैठक 27 जुलाई को निर्धारित किया था. राजद ने बैठक में अपने सभी विधायकों व विधान

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खूब काम आ रही जदयू की प्रेशर पॉलिटिक्स

प्रेशर पॉलिटिक्स के सहारे खींच रही महागठबंधन की सरकार आए दिन देते हैं एक-दूसरे के खिलाफ बयान बीजेपी के बूते राजद पर दबाव बना रहा जदयू रघुवंश प्रसाद सिंह और भाई वीरेन्द्र के तीखे बयानों ने पहले से ही मुसीबत में पड़े महागठबंधन की सरकार की रही-सही कसर भी पूरी कर दी है. मुख्यमंत्री को निशाने पर रखने वाले राजद के बयानों पर जदयू ने इस बार कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने राजद नेता रघुवंश सिंह और विधायक भाई वीरेन्द्र के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. भाई वीरेन्द्र (File pic)                                                    संजय सिंह (File pic) जदयू के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी ने कहा कि जदयू महागठबंधन की मां है, दाई नहीं. K C त्यागी ने कहा कि 5 साल के लिए गठबंधन हुआ था. पांच साल पूरे होने में काफी वक़्त बचा हुआ है, जो गठबंधन को तोड़ने का काम करेगा जनता उनको जवाब देगी. लालू से उम्मीद नहीं की वे रघुवंश और भाई वीरेंद्र पर कोई कड़ी कारवाई करेंगे. ऐसी गतिविधियों से गठबंधन की उम्र कम होगी. के सी त्यागी के बयान पर पलटवार करते हुए राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि जदयूू नहीं, बिहार की आवाम है महागठबंधन की मां. मनोज झा ने नरम रूख अपनाते हुए कहा कि राजद और जदयू दोनों पार्टी के नेताओं को बयानबाजी से बचना चाहिए और जदयू नेता इस

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