समय पर होगा उपचार तो रोका जा सकता है फाइलेरिया

हाथीपांव के मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का होगा वितरण • जिले के सभी प्रखंडों में फाइलेरिया के हाथीपांव मरीजों की हो रही है लाइन लिस्टिंग• मरीजों को एमएमडीपी किट के प्रयोग की दी जाएगी पूरी जानकारी बक्सर, 01 जून. जिले में गंभीर बीमारियों के उन्मूलन के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. इनमें से एक है फाइलेरिया. फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सबसे जरूरी है उसके प्रारंभिक लक्षणों की पहचान होना. यदि, समय पर इस बीमारी का पता लगा लिया जाए, तो उचित प्रबंधन और दवाओं के सेवन से इसे गंभीर रूप लेने से पहले रोका जा सकता है और इसके लक्षणों को कम भी किया जा सकता है. लेकिन जिन मरीजों में यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है, उनको उचित देखभाल के साथ नियमित व्यायाम की भी आवश्यकता होती है. इसी क्रम में जिले के फाइलेरिया के हाथीपांव से ग्रसित लोगों को चिन्हित किया जा रहा है. सर्वे के बाद चिन्हित मरीजों के बीच मार्बीडीटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) प्रदान किया जा सके. जिससे वे हाथीपांव का रुग्णता प्रबंधन कर सकें. जिलास्तर पर शिविर का होगा आयोजन : जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोलर ऑफिसर डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया, जिले के हाथीपांव से ग्रसित लोगों की लाइन लिस्टिंग की जा रही है. ताकि, उनको एमएमडीपी किट प्रदान किया जा सके. इसके लिए सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सूचित किया जा चुका है. इसके लिए जिलास्तर पर शिविर का आयोजन किया जायेगा. किट में मरीजों को बाल्टी, मग, टब, सूती तौलिया, साबुन व एन्टी फंगल

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प्रदेश में देशी चिकित्सा पद्धति के लिए होगा 45 करोड़ खर्च

आयुष औषधालय और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की संवरेगी सूरत 38 राजकीय औषधालय और 160 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर का होगा कायाकल्प औषधालय और उप स्वास्थ्य केंद्र के जीर्णोद्धार पर खर्च होंगे 6.55 लाख रुपये पटना, 24 मई. बिहार में आने वाले दिनों में चिकित्सा की सूरत बदलने वाली है. सरकार ने चिकित्सा से जुड़े हर पद्धति को सुदृढ़ करने का निश्चय किया है और इसके लिए कंक्रिट योजना भी बनाई है. राज्य सरकार प्रदेश में आयुर्वेद, होमियोपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति को विकसित करने में लगी हुई है. प्रदेश के 38 आयुष औषधालय व 160 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर करने पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार देशी चिकित्सा पद्धति को विकसित करने के लिए आयुर्वेद, होमियोपैथी और यूनानी समेत अन्य देसी चिकित्सा को बढ़ावा देने को लेकर कई योजना संचालित कर रही है. इसी योजना के तहत प्रदेश के 38 राजकीय औषधालय और उप स्वास्थ्य केंद्र आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को विकसित करने की मंजूरी प्रदान की गई. राज्य सरकार केंद्र की योजना को साकार करने में लगी हुई है. कायाकल्प : 38 राजकीय औषधालय और 160 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर फिलहाल प्रदेश में आयुष मंत्रालय द्वारा स्वीकृत 160 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में से 40 सेंटर संचालित हैं. शेष सेंटर को खोलने की प्रक्रिया चल रही है. सेंटरों पर देसी चिकित्सा पद्धति के माध्यम से रोगियों के इलाज किए जा रहें हैं. केंद्र एवं राज्य सरकार ने 38 राजकीय आयुष औषधालय व 160 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को

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बचिए इस साइलेंट किलर से

जीवनशैली में बदलाव के कारण लोग हो रहे डायबिटीज के मरीजनियमित व्यायाम को बनायें अपनी दिनचर्या का हिस्साआरा, 13 मई- मधुमेह यानि डायबिटीज आज के लोगों में आम तौर पर पायी जानी वाली स्वास्थ्य समस्या है. इसे “साइलेंट किलर” रोग के नाम से भी जाना जाता है. जीवन शैली में बदलाव व उचित आहार व्यवहार में कमी के कारण यह बीमारी लोगों को अपनी चपेट में लेती है. कोरोना के समय में शुगर रोग से ग्रसित रोगियों को अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. खासकर डायबिटीज रोगियों को अपने खानपान व आहार व्यवहार में समन्वय स्थापित करने की जरूरत है. इसे लेकर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है. क्या है डायबिटीजडायबिटीज मेटाबोलिक बीमारियों का समूह है. जिसमें खून में ब्लड शुगर या ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक होता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करती हैं. डायबिटीज में मरीज को बार-बार प्यास लगना, भूख ज्यादा महसूस होना और बार-बार पेशाब लगने की शिकायत होती है. डायबिटीज भी तीन प्रकार के होते हैं,-टाइप 1 डायबिटीज, टाइप 2 डायबिटीज और गैस्टेशनल डायबिटीज । गैस्टेशनल डायबिटीज सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को होती है। डायबिटीज के कारणडायबिटीज होने के बहुत से कारण होते हैं. उनमें सबसे बड़ा कारण है शरीर का वजन अधिक होना. कई बार हाई ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना भी डायबिटीज का कारण होता है. गर्भावस्था में महिलाओं को डायबिटीज का शिकार होना बच्चे के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. इसके अलावा उम्र अधिक होना, फैमिली

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क्या आपको पता है परिवार नियोजन में क्या है बाधक ?

‘अनमेट नीड’ परिवार नियोजन में बाधक, जागरूकता से ही सुधार संभव सामुदायिक सहभागिता भी परिवार नियोजन कार्यक्रमों की सफलता के लिए बेहद जरूरी जिले में 9.1 प्रतिशत महिलाएं बच्चों में अंतराल एवं परिवार सीमित करना चाहती हैंबक्सर, 08 मई. जिले में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए परिवार नियोजन साधनों की उपयोगिता महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसको लेकर सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम भी चलाये जा रहे हैं. लेकिन सरकारी प्रयासों के इतर सामुदायिक सहभागिता भी परिवार नियोजन कार्यक्रमों की सफलता के लिए बेहद जरूरी है। दो बच्चों में अंतराल एवं शादी के बाद पहले बच्चे के जन्म में अंतराल रखने की सोच के बाद भी महिलाएं परिवार नियोजन साधनों का इस्तेमाल नहीं कर पाती है। इससे ही ‘अनमेट नीड’ में वृद्धि होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकासशील देशों में 21 करोड़ से अधिक महिलाएं अनचाहे गर्भ से छुटकारा पाना चाहती हैं। लेकिन तब भी उनके द्वारा किसी गर्भनिरोधक साधन का उपयोग नहीं किया जाता है। इसके पीछे आम लोगों में परिवार नियोजन साधनों के प्रति जागरूकता का आभाव प्रदर्शित होता है। अनमेट नीड में 8.1 प्रतिशत की गिरावट :राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार जिले में कुल 9.1 प्रतिशत अनमेट नीड है। आशय यह है कि जिले में 9.1 प्रतिशत महिलाएं बच्चों में अंतराल एवं परिवार सीमित करना चाहती हैं, लेकिन किसी कारणवश वह परिवार नियोजन साधनों का इस्तेमाल नहीं कर पा रही है। जो पिछले चार साल में अनमेट नीड में 8.1 प्रतिशत की गिरावट

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कोरोना के टीका के लिए ऐसे हो रहे हैं लोग जागरूक !

भोजपुर जिला मुख्यालय में तीन स्थानों पर हुई नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुतिलोगों को टीका लेने और सामान्य नियमों का पालन करने के लिए किया गया प्रेरित आरा. टीकाकरण के प्रति जिले के लोगों में संशय को दूर करने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ समिति के द्वारा सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च के सहयोग से नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया. जिसके माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया. बुधवार को जिला मुख्यालय में तीन स्थानों पर नुक्कड़ नाटक का प्रदर्शन किया गया, जिसमें कलाकारों के द्वारा नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गयी. नुक्कड़ नाटक की शुरुआत सदर प्रखंड परिसर से की गई, जहां पर नाटक के माध्यम से ओपीडी व इमरजेंसी में आए मरीजों और उनके परिजनों को कोरोना से बचाव, उपचार तथा कोविड-19 टीका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. वहीं, दूसरी नुक्कड़ प्रस्तुति कृषि भवन परिसर में की गयी. जहां काफी संख्या में सरकारी कर्मचारी व लोगों को कोविड-19 टीकाकरण के बारे में जागरूक किया गया. अंत में कलाकारों ने सदर अस्पताल परिसर में आए मरीजों और उनके परिजनों को टीके की अहमियत बताई. नुक्कड़ नाटक की टीम में निर्देशक डॉ अनिल सिंह, कलाकार अंबुज कुमार, भरत आर्य, कुमार नरेंद्र, सुमन कुमार, राम नाथ प्रसाद, भोला सिंह, राजीव रंजन त्रिपाठी, पल्लवी प्रियदर्शिनी और सारिका पाठक शामिल थे. इस दौरान सीफार के डिविजनल कोऑर्डिनेटर प्रोग्राम नवनीत सिन्हा व डिविजनल कोऑर्डिनेटर मीडिया अमित सिंह मौजूद रहे. टीकाकरण से घबराने और डरने की जरूरत नहींनुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने आम जनों को यह जानकारी

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