गोढना रोड का कायाकल्प शुरू

पटना नाउ ने उठाई थी आवाज, जिसके 11 महीने बाद शुरू हुआ निर्माण कार्य आरा,13 अप्रैल. भोजपुर जिला मुख्यालय स्थित वार्ड 45 का सबसे खराब अवस्था की लिए प्रसिद्ध गोढना रोड की अब काया कल्प होने वाला है. कई सालों से इसके कायाकल्प के लिए उठती आवाजों और सड़क की मरमत्ती के बाद भी अपनी बदहाली पर आंसू बहाता गोढना रोड के निर्माण का कार्य शुरू हो गया है. सड़क के निर्माण का कार्य शुरू होते ही इसकी चर्चा आजकल लोगों के बीच पुनः है. यह चर्चा आमजन से लेकर सोशल मीडिया पर भी आम है. पूर्व वार्ड इस वार्ड के पूर्व पार्षद अमरेंद्र चौबे ने इसके मरम्मती के कार्य शुरू करने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता,पूर्व मेयर, और मीडिया से लेकर आम लोगों तक को बधाई दिया है. उन्होंने लिखा है उन सभी लोगों का शुक्रिया जिनके आवाज और सहयोग के कारण इस रोड का निर्माण हो पाया है. बताते चलें कि गोढना रोड के नरकीय स्थिति को सबसे पहले पटना नाउ ने उठाया था जब बारिश के दिनो से पूर्व ही मई 2021में जल जमाव से लोगों के आने जाने में परेशानी हुई थी. खबर को 25 मई 2021 को पब्लिश भी किया था. पुरी खबर के लिए इस लिंक पर क्लिक करें👇 हालांकि इसके पहले भी उक्त मुहल्ले के निवासियों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के सुस्त रवैया से नाराज हो रोड पर हुए जल जमाव में ही धान रोपनी कर अपना विरोध जताया था जिसकी चर्चा तमाम मीडिया में हुई थी. लेकिन बावजूद उसके ढाक

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नर्कलोक का मामला सुप्रीम कोर्ट में !

सुप्रीम कोर्ट पहुँचा गोढना रोड के नरकीय स्थिति का मामला कैसे बन गया स्टेशन के समीप का गोढना रोड नर्क?आरा, 27 मई. आरा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नम्बर 45 में स्थित गोढना रोड की नारकीय स्थिति से सारे शहरवासी परेशान है. यहाँ आते ही नर्कलोक में प्रवेश करने जैसा प्रतीत होता है. आरा रेलवे स्टेशन से महज कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद इसकी यह दुर्दशा कैसे हुई इस बात को पटना नाउ ने समझने की कोशिश की. आखिर क्या बात हुई कि मुख्य रोड से लेकर हर गली में जल जमाव हो गया? जब इस तथ्य को हमारे रिपोर्टर ने खोजा तो पता चला कि गोढना रोड के आस-पास का इलाका नए तौर पर विकसित इलाका है. पिछले 10-15 वर्षों में इस इलाके में लोगों ने इस इलाके में घर बनाने शुरू किए. धीरे-धीरे यह इलाका एक सघन कॉलोनी के रूप में रिहायशी इलाके में तब्दील हो गया. मुख्यतः दक्षिण इलाके से नक्सलवाद से पलायन करने वाले लोगों ने स्टेशन से नजदीक होने के कारण इस इलाके को चुना. वार्ड 45 बड़ा होता गया और गली व सड़को का बनना भी शुरू हुआ. लेकिन नारकीय स्थिति तब से बनी जब मुख्यमंत्री के सात निश्चय वाले प्रोजेक्ट ने इस वार्ड का रुख किया. हर घर तक नल और हर गली के पक्कीकरण की योजना ने इस इलाके में लोगों के घर तक पानी तो नही पहुंचाया लेकिन यहाँ के निवासियों को पानी-पानी जरूर कर दिया. लोगों ने सरकार को टैक्स ये सोचकर भरा कि इस इलाके में विकास

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