प्रधानमंत्री ने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

अद्वितीय प्रतिभा के धनी भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है.एक ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा हैः “स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति और अद्वितीय प्रतिभा के धनी भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को उनकी जयंती पर शत-शत नमन. उन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपना विशिष्ट योगदान दिया। राष्ट्रहित में समर्पित उनका जीवन देशवासियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा.” PATNA NOW की ओर से संविधान के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले महान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन…

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आप कितना जानते हैं इन्हें!

26 जनवरी, 1950 को जब भारत को संविधान के रूप में एक गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा दिया गया उसी दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के रूप में स्वतंत्र भारत को पहला राष्ट्रपति भी प्राप्त हुआ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के एक छोटे से गांव जीरादेई में हुआ था.एक बड़े संयुक्त परिवार के सबसे छोटे सदस्य होने के कारण इनका बचपन बहुत प्यार और दुलार से बीता. संयुक्त परिवार होने के कारण पारिवारिक सदस्यों के आपसी संबंध बेहद मधुर और गहरे थे. इनके पिता का नाम महादेव सहाय था. डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुई. उस समय यह रिवाज था कि शिक्षा का आरंभ फारसी भाषा से ही किया जाएगा. इसीलिए राजेंद्र प्रसाद और उनके चचेरे भाइयों को पढ़ाने एक मौलवी आते थे. पढ़ाई की तरफ इनका रुझान बचपन से ही था. बाल-विवाह की परंपरा का अनुसरण करते हुए मात्र 12 वर्ष की आयु में इनका विवाह राजवंशी देवी से संपन्न हुआ. राजेंद्र प्रसाद जी ने अपने लगातार खराब रहने वाले स्वास्थ्य का असर अपनी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कलकत्ता विश्विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें 30 रूपए महीने की छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई. जीरादेई गांव से पहली बार किसी युवक ने कलकत्ता विश्विद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी जो निश्चित ही राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए गर्व की बात थी. सन 1902 में उन्होंने कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया. सन 1915 में

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