‘संसदीय परंपरा और नैतिकता के विरूद्ध है ये बजट’

केंद्रीय बजट को लेकर बिहार में विपक्ष ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि अंतरिम बजट के नाम पर मोदी सरकार ने गैरसंवैधानिक पूरा बजट पेश किया है. जो भी घोषणाएँ है उन्हें आगामी सरकार ने लागू करना है। यह जनता के साथ छलावा है. अगर जनता की इतनी ही फ़िक्र थी तो विगत 5 साल से क्या पकौड़े तल रहे थे? तेजस्वी यादव ने कहा कि अंतरिम बजट में पूरी तरह से दूरदर्शिता का अभाव है, चुनावी भाषण से अधिक कुछ नहीं, अपनी योजनाओं का बखान और अपने कार्यकाल के बाहर के सपने ही दिखाए गए- किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को मुनाफे की ओर ले जाने का कोई रोडमैप नहीं दिखा. कृषकों की आय को दुगना करना इस सरकार के पूरे कार्यकाल में एक जुमला ही सिद्ध हुआ. सिंचाई और किसानों के लिए बिजली की बात, उर्वरकों व खादों के बढ़ते दामों से निपटने के बात को नजरअंदाज कर दिया गया. फसल बीमा योजना की विफलता को भी सफलता सिद्ध करने की ज़िद में सरकार. ₹500/माह की राशि किसानों के साथ एक मजाक है. शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्रों की पूर्णतः अनदेखी की गई है। रोजगार के सृजन जैसे गम्भीर मुद्दे पर बजट विज़न विहीन है. दलित, पिछड़ों व अन्य कमज़ोर वर्गों के उत्थान, उनके लिए स्कॉलरशिप योजना इत्यादि का कोई उल्लेख नहीं. OROP के तथाकथित समाधान से पूर्व सैनिक नाखुश फिर भी सरकार कर रही है अपनी वाहवाही.

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केन्द्रीय बजट सर्जिकल स्ट्राइक जैसा, विपक्ष की बोलती बंद

केन्द्रीय बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक जैसे 2019-20 के बजट से विपक्ष की बोलती बंद है. नरेन्द्र मोदी के सर्वस्पर्शी बजट में किसान, श्रमिक, असंगठित क्षेत्रों के मजदूर व मध्यम वर्ग का खास ख्याल रखा गया है जिसका सर्वाधिक लाभ बिहार जैसे राज्य को मिलेगा जहां 91 प्रतिशत लघु व सीमांत किसान हैं. सुशील मोदी ने कहा कि किसानों को सरकार उनके खाते में 6-6 हजार रुपया देगी जिसमें कोई राज्यांश नहीं है. इसका सबसे अधिक लाभ बिहार जैसे राज्य को मिलेगा जहां जोत का औसत आकार 0.84 हेक्टेयर है. इसी प्रकार पशुपालन व मत्स्य पालन के किसानों को केसीसी के तर्ज पर 4 प्रतिशत ब्याज पर मिलने वाले कर्ज का लाभ भी बिहार को सर्वाधिक होगा. मत्स्य पालन के लिए केन्द्र में अलग विभाग के गठन की घोषणा भी स्वागतयोग्य है. आपदा की स्थिति में पहले किसानों के कर्ज पर पुनर्संरचना के एक साल के लिए 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलता था जिसे बढ़ा कर अब पूरे पुनर्संरचना की अवधि में 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान कर दिया गया है. मध्यम वर्ग के लोगों को आयकर की सीमा 2.5 लाख से बढ़ा कर 5 लाख करने से बड़ी राहत मिली है. इसके अलावा स्टैंडर्ड डिडक्शन 40 से बढ़ा कर 50 हजार करने से नौकरी पेशा और बैंक तथा पोस्टऑफिस में जमा राशि पर मिलने वाले 40 हजार तक के ब्याज को टीडीएस से मुक्त करने तथा रेंट से प्राप्त आय पर टीडीएस की सीमा को 1.80 लाख से बढ़ा कर

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