आरा संगीत उत्सव में बही संगीत की धारा

आरा संगीत उत्सव में गायन वादन व नृत्य की त्रिवेणी का संगम. इस कार्यक्रम में देर रात तक संगीत की धारा बहती रही. एक ओर मॉनसून के आगमन से बारिश की बूंदों के बौछार ने मौसम को सुहावना किया तो दूसरी ओर राग मल्हार के सुर व तानों ने श्रोताओं को भिगोया. कर्नाटक से ऑल इंडिया रेडियो की कलाकार ने बजाया धुन :वायलिन के सुरों ने दर्शकों के मन के तार को झंकृत कर दिया. इस कार्यक्रम में कर्नाटक से ऑल इंडिया रेडियो की चर्चित कलाकार विदुषी दुर्गा शर्मा ने वायलिन पर आलाप की प्रस्तुति देते हुए रागों का आवरण किया. तबला वादन के लय में झूमते रहे श्रोता:बीएचयू से आचार्य की उपाधि प्राप्त तबला वादक चन्दन कुमार ठाकुर ने स्वतंत्र तबला में उठान पेशकार, कायदा, रेला, टुकड़ा इत्यादि सुनाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूत कर दिया. वादन में आचार्य ने पूरब और पश्चिम बाज के विभिन्न अंगों को बखूबी प्रस्तुत किया. दाएं की मिठास और बाएं पर ओजपुर्ण थाप आकर्षण का केंद्र रहा. राग मल्हार के सुरों की बौछार ने श्रोताओं को भिगोया:अगली प्रस्तुति में संगीत विदुषी विमला देवी ने राग मल्हार से गायन प्रारम्भ किया. दानेदार तानों की बौछार ने बारिश की बूंदों के साथ युगलबंदी की अनुभूति करवाई. इसके बाद राग मुलतानी में “नाना की बंदिशे” परंपरा की एक खास बंदिश शुभ शुभ गावत मंगल गान व देवी की पारंपरिक बंदिश ” मंगल करनी माई को प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. थिरकते कदमों से घुंघरुओं के नाद ने कथक को जीवंत किया:कथक नर्तक अमित कुमार

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