ट्रेड यूनियनों की हड़ताल, बैंकों-दफ्तरों में लटके ताले

देश की प्रमुख 10 ट्रेड यूनियनों के 18 करोड़ वर्कर्स आज हड़ताल पर हैं. देश भर में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है.पटना और कोलकाता में वामपंथी श्रमिक संगठनों ने जहां विरोध मार्च निकाला अन्य राज्यों में श्रमिक संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. इस देशव्यापी हड़ताल से बैंकिंग,पब्लिक ट्रांसपोर्ट और टेलीकॉम जैसी जरूरी सेवाओं पर असर पड़ा है.राजधानी पटना में भी बैंक और अन्य संगठनों में जुलूस निकाला और डाकबंगला पर प्रदर्शन किया.इस प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ता भी शामिल थी .
हड़ताल की वजह से बैंक और फैक्‍टरियां बंद हैं. कुछ राज्‍यों में स्‍थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में शामिल होने से सार्वजनिक परिवहन व्‍यवस्‍था पर भी असर पड़ा है.ये हड़ताल बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों के शिथिल करने को लेकर है.घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं. ट्रेड यूनियन सरकारी पेंशन फंड और स्‍टॉक मार्केट में अधिक पैसा लगाने के सरकार के दिशानिर्देशों का भी विरोध कर रही हैं.वहीं सेंट्रल ट्रेड यूनियन का कहना है कि यह हड़ताल सरकार की ओर से उनकी 12 मांगों के प्रति उदासीनता की वजह से की जा रही है. इसमें मासिक न्यूनतम वेतन 18000 रुपए और न्यूनतम मासिक पेंशन के 3000 रुपए करने की मांग शामिल है.बिहार की राजधानी पटना समेत राज्य के अलग-अलग हिस्से में भी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिल रहा है. पटना स्थित बैंकों समेत बीमा कंपनियों के दफ्तरों में भी ताले लटक रहे हैं. राज्य के कई इलाकों में सड़क और रेल यातायात के प्रभावित होने की भी खबर है.
हड़ताली नेताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार श्रम सुधारों के नाम पर कॉरपोरेट घरानों के दबाव में श्रमिक हितों से संबंधित कानूनों को लगातार रद्द कर रही है. संगठन बनाने और हक की आवाज बुलंद करने को भी न सीमित किया जा रहा है बल्कि उसे खत्म करने की तैयारी है.
मजदूर-संगठन पिछले कई महीनों ने आम-हड़ताल को सफल बनाने की तैयारी कर रहे हैं. पटना के कई इलाकों में ऑटो और नगर सेवा बंद होने की वजह से शहरी परिवहन भी अस्त-व्यस्त हो गया है.
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