‘सीमा पार’ के मंचन ने दिखाया मानव धर्म है सर्वोपरि

देश की सरहदें प्राचीन काल से कई खुनी जंगों और मानवीय संवेदनाओं के अंतर्द्वंद्व की साक्षी रही हैं. इसके बावजूद देश का वजूद सुरक्षित रहा है. ‘सीमा पार’ की कहानी एक अर्धविक्षिप्त पागल समझी जाने वाली महिला के इर्द गिर्द घुमती है जो एक छोटे बच्चे को खोने के बाद इस परिस्थिति में पहुँच जाती है जिसे उसने युद्ध में बचाया है. सामाजिक,मजहबी और कई विपरीत परिस्तिथियों से जूझते हुए यह महिला अंततः समाज में कैसे अपना मुकाम हासिल करती है इसकी कहानी है यह नाटक.




प्रस्तुत नाटक ने मानवता धर्म को सर्वोपरि करते हुए स्वार्थलोलुप मजहबी द्वंद्व से दर्शक को बाहर निकालने में सफल होती है.

उज्जवला गांगुली ने पागल महिला के किरदार को बखूबी निभाया वहीँ नर्स के रूप में शालिनी और पुरुष पात्रों में नितीश कुमार,चक्रपाणी पाण्डेय, नरेंद्र प्रसाद,अभिषेक,अंकित और रोहन की भूमिका भी सराहनीय रही. नाटक का निर्देशन गुंजन कुमार ने किया और मंच व्यवस्था सविंद कुमार और रूप-सज्जा जितेन्द्र कुमार की थी.

पटना नाउ ब्यूरो