सुनवाई पूरी, अब फैसले का इंतजार

आज जस्टिस अभय मनोहर सप्रे एवं यू यू ललित के स्पेशल बेंच में 2 बजे अपराह्न से समान काम समान वेतन मामले की सुनवाई हुई. सर्वप्रथम बिहार सरकार के अधिवक्ता श्याम दिवान अपना रिज्वाइन्डर पूरा किये. फिर, बिहार सरकार के तीसरे अधिवक्ता आर के द्विवेदी भी रिज्वाइन्डर पेश किये. सरकारी अधिवक्ताओं के द्वारा पेश किये गये रिज्वाइन्डर का शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता व कानूनविद कपिल सिब्बल तथा विजय हंसरिया जी के द्वारा जोरदार काउंटर किया गया. सिब्बल एवं हंसरिया आज सरकारी वकीलों के द्वारा दिये गये रिज्वाइन्डर को ध्वस्त करने के लिये विभिन्न साक्ष्य एवं आवश्यक सामग्रियां जुटाकर लाये थे.




सरकारी वकीलों के द्वारा दिये गये रिज्वाइन्डर (1) संविधानपीठ का चर्चित जजमेंट (2) वेतन मद के अव्यवहृत राशि वापस नहीं करने संबंधी झूठ (3) विभिन्न राज्यों खासकर झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल राज्यों के शिक्षकों के वेतन से तुलना (4) 25 हजार रूपये वेतन लेकर भी नहीं पढाने की झूठी दलीलें इत्यादि विभिन्न सरकारी रिज्वाइन्डर को ब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल तथा विजय हंसरिया ने साक्ष्य सहित ख़ारिज कराया तथा शिक्षकों के पक्ष को जोरदार तरीके से रखकर सभी कोटि के नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकाध्यक्षों को समान काम समान वेतन लागू करवाने हेतु माननीय न्यायाधीशों से फैसला देने का अपील किया. सिब्बल ने स्पष्ट कहा कि, विद्वान अधिवक्ता श्याम दिवान द्वारा पेश जजमेंट प्रोन्नति से संबंधित है. इसका समान काम समान वेतन मामले से कोई संबंध नहीं है. विजय हंसरिया ने बिहार सरकार एवं प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड के विभिन्न रिपोर्टों एवं पत्रों को पेश किया तथा स्पष्ट किया कि बिहार सरकार केन्द्र सरकार को वेतन एवं सर्व शिक्षा अभियान मद की राशि केन्द्र सरकार को वापस किया है. इस मामले में बिहार सरकार झूठ बोल रही है. उन्होंने साक्ष्य सहित कोर्ट को कि झारखंड, असम बंगाल राज्यों में पारा शिक्षकों को मानदेय ही मिल रहा है तथा वहां अस्थायी पद पर बहाल हैं. जबकि बिहार के नियोजित शिक्षकों को वेतनमान दिया गया है तथा वे 60 वर्षों की आयु के लिये स्थायी सेवा में है. वही सिब्बल साहब ने साक्ष्य सहित कोर्ट को बताया कि नियोजित शिक्षकों के परिश्रम से बिहार की साक्षरता में सर्वोच्च वृद्धि हुई है. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस हेतु बिहार सरकार को पुरस्कृत किया था. इन शिक्षकों ने परिश्रम के बल पर 6 से 14 आयु वर्ग के 98% बच्चों का नामांकन विद्यालय में सम्पन्न हो चुका है.

माना जा रहा है कि कपिल सिब्बल ने शिक्षकों के पक्ष को जोरदार तरीके से रखा है. सुप्रीम कोर्ट में लम्बे समय से चल रही सुनवाई अब समाप्त हो गई है और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.