रेलवे ने “भोजपुरी पेंटिंग” को नही दिया जगह तो क्या होगा आंदोलन ?

भोजपुरी पेंटिंग के साथ भोजपुर की पहचान अरण्य देवी, भगवान महावीर और कुंवर सिंह को प्रतीक के रूप में स्थापित करने की मांग

आरा,3 फरवरी. रेलवे द्वारा भोजपुरी को भोजपुर के मुख्यालय में नजरअंदाज करने के कारनामे के बाद जिलावासी आंदोलन के मूड मे दिख रहे हैं. यह नजरअंदाज किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है. जंक्शन पर चल रहे सौंदर्यीकरण के दौरान भोजपुरी कला के बदले मिथिला पेंटिंग लगाए जाने की घोषणा का विरोध अब जोर पकड़ने लगा है. ट्वीटर और सोशल मीडिया पर इसके विरोध के बाद लगता है यह मामला तूल पकड़ने वाला है. भोजपुर में भोजपुरी पेंटिंग को रेलवे द्वारा जगह नही देकर मिथिला पेंटिंग की घोषणा कहीं जनांदोलन का माहौल न बना दे. क्योंकि पूर्व में भी भोजपुरी की जब पढ़ाई बन्द हुई तो ब्यापक जनांदोलन हुआ था जिसके बाद पुनः सरकार को भोजपुरी की पढ़ाई शुरू करनी पड़ी. एक बार फिर से जनता में इस बात को लेकर सुगबुगाहट है और हर तबके के लोग इसे भोजपुरी स्वाभिमान का हनन मान रहे हैं. सोशल मीडिया पर विरोध के बाद रविवार को एक निजी अस्पताल के उद्घाटन में आरा पहुँचे केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री और स्थानीय सांसद आर के सिंह को इस सम्बंध में एक ज्ञापन भोजपुरी को समर्पित संस्था आखर, सर्जना ट्रस्ट, अभिनव एंड एक्ट, जैन समिति भोजपुर के सदस्यों और अन्य भोजपुरी कलाकारों ने संयुक्त रूप से दिया.




ज्ञापन के साथ आखर द्वारा जारी भोजपुरिया स्वाभिमान कैलेंडर, भोजपुरी भित्तिकला और लोकपरंपराओं पर आधारित पुस्तिकाओं और चित्रकार संजीव सिन्हा की बनाई पीड़िया की पेंटिंग भी दी गयी. इस ज्ञापन के जरिये यह मांग की गई कि भोजपुरी कला और संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण के लिए भोजपुरी भाषी क्षेत्र के रेलवे स्टेशनों, प्रतीक्षालयों और रेल के डिब्बों में भोजपुरी कला और परम्परा को ही अनिवार्य रूप से प्रदर्शित किया जाए. साथ ही आरा रेलवे स्टेशन पर पर्यटन सुविधाओं के प्रोत्साहन के लिए माँ आरण्य देवी, सिद्धनाथ मन्दिर, रामगढ़िया मन्दिर के साथ साथ जैन सर्किट के सभी तीर्थस्थलों की पेंटिंग और जानकारी लगाई जाए. इसके अलावा सांसद को इस बात से भी अवगत कराया गया कि वीर कुँवर सिंह के साथ साथ स्वतंत्रता संग्राम के अन्य वीरों कवि कैलाश, कपिलेश्वर राम, अकली देवी की जीवनी लगाई जाए. ज्ञात हो कि हाल ही में शहर को जैन सर्किट में शामिल किया गया है और आसपास 108 से ऊपर जैन धर्म के स्थल हैं जो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. सिख और सूफी सर्किट में भी शहर को शामिल करने को लेकर भी प्रयास हो रहे हैं. ज्ञापन देने के बाद आखर सदस्य सुनील पांडेय ने बताया कि भोजपुरिया क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध रहा है और 25 करोड़ भोजपुरी भाषी जनता की भावनाओं की अब उपेक्षा नहीं की जा सकती. जैन समिति, भोजपुर के नीलेश जैन और विभु जैन ने आशा जताई कि मंत्री हम सबकी मांगों को जरूर पूरा करेंगे और जरूरत हुई तो रेल मंत्री से भी मिला जाएगा. भोजपुरी कला के भित्तिचित्र पीड़िया, कोहबर आदि के प्रोत्साहन को लेकर स्थानीय संस्था सर्जना और आखर के अलावा कई अन्य संस्थाएं प्रयासरत हैं और सबकी नजरें अब स्थानीय सांसद पर टिकी हैं. क्षेत्र की जनता और अन्य समाजसेवी इस मामले में अपनी मांगों को लेकर पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक से जल्द ही मिलने वाले हैं. आज सांसद को ज्ञापन देने वालों में आखर के सुनील पांडेय, रवि प्रकाश सूरज, सर्जना ट्रस्ट के चित्रकार संजीव सिन्हा, जैन समिति के निलेश जैन, विभु जैन और भोजपुरी संस्कृतिकर्मी ओम प्रकाश पांडेय, संजय कुमार सिंह, गौतम आदि शामिल थे.

आरा से रवि प्रकाश सूरज और ओ पी पांडेय की रिपोर्ट