बिहार की इन बड़ी औद्योगिक इकाइयों को नोटिस

बिहार में बायो मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से प्रबंधन नहीं करने के कारण अबतक 2038 HCF (Health Care Facility) को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही पटना के सहयोग अस्पताल को इसी कारण से Proposed Closure Direction जारी किया गया है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् द्वारा माह अप्रैल के दौरान अब तक ऐसी 177 इकाईयों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है। जिसकी सुनवाई प्रक्रिया में है। इसमें ब्रिक क्लिन की 163 इकाई, राइस मिल की 8 के अतिरिक्त टोबैको इकाई,  हॉट मिक्स प्लान्ट एवं तेल मिल की एक-एक इकाई आदि हैं। इसी तरह गत दिनों बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् द्वारा कुल 8 इकाईयों को ‘‘Proposed Closure Direction” जारी किया गया है जिनमें 2 चीनी मिलें, 2 बॉयो-फ्यूल इकाइयां, चावल मिल, फूड ऑयल की एक-एक इकाई इत्यादि हैं।




चीनी मिलों में रीगा सुगर मिल, रीगा, सीतामढ़ी को मनुष्मारा नदी में बहिःस्राव करने के कारण जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्राणद्ध अधिनियम, 1974 की धरा 33ए के तहत निर्देश जारी करते हुए राज्य पर्षद् द्वारा इस मामले में रू 20 लाख की बैंक गारंटी जमा करायी गयी है ताकि भविष्य में पुनः जल प्रदूषण करते पाये जाने पर उक्त जमा राशि को जब्त की जा सके। मझौलिया चीनी मिल, मझौलिया, पश्चिमी चम्पारण एवं न्यू स्वदेशी चीनी मिल, नरकटियागंज, पश्चिमी चम्पारण को क्रमश: ‘कोहरा’ एवं ‘हरबोरा’ नदी को प्रदूषण करते पाये जाने के कारण उक्त अधिनियम के तहत ‘‘Proposed Closure Direction”  निर्गत करते हुए दोनों इकाईयों को रू 20 लाख की बैंक गारंटी जमा करने हेतु निर्देश जारी किया गया है।

इसी प्रकार राज्य की दो बॉयो-फ्यूल इकाईयों क्रमश: HPCL, सुगौली, पूर्वी चम्पारण एवं HPCL लौरिया, पश्चिमी चम्पारण को भी ‘‘Proposed Closure Direction” जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त कुल 6 इकाईयों को बन्द करने करने हेतु निदेश ‘‘Closure Direction” जारी किया गया है। इसमें एक स्टोन क्रशर इकाई पवन स्टोन वर्क्स, टेहटा, जहानाबाद, दो अल्युमिनियम की इकाई क्रमश: अशोक मेटल एवं  लोहानी मेटल स्टोर, पटना सिटी को वायु अधिनियम की धारा 31ए के तहत इकाई को बन्द करने हेतु निदेश जारी किया गया है।

आपको बता दें कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्राण पर्षद् पर्यावरणीय अधिनियमों/नियमों की अवहेलना कर चलाये जा रहे उद्योगों पर कार्रवाई करता है। ऐसी कार्रवाई राज्य पर्षद् से सहमति प्राप्त किये बिना अवैध् रूप से संचालित इकाईयो पर की जाती है तथा उन इकाईयों पर भी की जाती है जो राज्य पर्षद् से सहमति प्राप्त कर संचालित होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्राण के निर्धरित मापदंडो का अनुपालन नहीं करते हैं।