सवालों के घेरे में नर्सिंग होम, प्रसव के बाद कृषि पदाधिकारी ने दर्द से कराहते हुए दम तोड़ दिया, देर से पहुंची डॉक्टर

पटना के निजी नर्सिंंग होम पर उठे कई सवाल

पटना।। पटना के निजी नर्सिंग होम में सोमवार 13 अक्टूबर को कृषि प्रखंड पदाधिकारी राजलक्ष्मी की मौत हो गई. परिजनों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि राजलक्ष्मी की प्रसव के बाद मौत हो गई. डॉक्टर का इंतजार दो-ढाई घंटे तक किया जाता रहा, इलाज में देरी की वजह से उसने दम तोड़ दिया.




जानकारी के अनुसार पेशेंट की तबियत ऑपरेशन के बाद सामान्य थी लेकिन सवा आठ बजे उनकी तबियत अचानक खराब होने लगी. पल्स रेट 162 तक जा पहुंचा. राजलक्ष्मी के पिता वरिष्ठ पत्रकार केके लाल ने बताया कि नर्सों को स्थिति बिगड़ने की जानकारी दी गई लेकिन डॉक्टर अपने घर चली गईं थी. डॉक्टर ने इमरसेंजी में बुलाने पर दो घंटे से ज्यादा समय ले लिया नतीजा राजलक्ष्मी नहीं रही. यह घटना पटना के बेली रोड स्थिति राजा बाजार के पास के डॉ. पूनम दीक्षित के नर्सिंग होम की है.


इस घटना के बाद यह सवाल पैदा हो गया है कि पटना के नर्सिंग होम में तमाम सुविधाओं की कमी तो है ही डॉक्टर भी इमरजेंसी में मौजूद नहीं रहते। बिना इमरजेंसी सुविधा के नर्सिंह होम का संचालन किस नियम के साथ और किस मिलीभगत के साथ चल रहा है! पदाधिकारी की मौत ने एक साथ कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

परिजन ने बताया कि राजलक्ष्मी 12 अक्टूबर को इस नर्सिंग होम में भर्ती हुईं थी. अगले दिन 13 अक्टूबर को दोपहर तीन बजे ऑपरेशन से बेटे का जन्म हुआ. बच्चे का वजन 2.100 ग्राम बताया गया। लगभग शाम साढ़े सात से पौने आठ बजे तक डॉक्टर ने राजलक्ष्मी की स्थिति ठीक-ठाक बतायी लेकिन कुछ ही देर बाद स्थिति गंभीर होने लगी. रात सवा आठ बजे तक राजलक्ष्मी को काफी दिक्कत होने लगी. दर्द से उसका बुरा हाल हो गया. परिजनों ने बिगड़ रही स्थिति की जानकारी मौजूद नर्सों को दी.

राजलक्ष्मी के पिता के.के. लाल बताते हैं कि बेटी का सुरक्षित प्रसव होगा इस उम्मीद के साथ पूनम सर्जिकल एंड मेटरनिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. परिवार भी पहले बच्चे के जन्म से काफी खुश था लेकिन अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर की लापरवाही की वजह से सब कुछ मातम में बदल गया.

राजलक्ष्मी की शादी 2024 में पटना में हुई थी. वह पटना सिटी के मुसल्लहपुर में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पद पर थी. परिजन बताते हैं कि गर्भावस्था के समय भी जांच कराने के क्रम में हर जांच कराने के लिए दबाव बनाया जाता था. परिवार की मांग है कि तमाम तरह के जो जांच गर्भावस्था के दौरान कराए गए उस सब की पड़ताल की जाए.
पटना के सिविल सर्जन ने कहा है कि प्रखंड कृषि पदाधिकारी की प्रसव के कुछ घंटे बाद मौत के मामले में नर्सिंग होम की जांच करायी जाएगी.

परिजन ने कहा है कि इस नर्सिंग होम में कई तरह की जरूरी सुविधाएं नहीं हैं. यह नर्सिंग होम के मानक को पूरा करता है कि नहीं इसकी भी पड़ताल हो, साथ ही घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज संरक्षित रखे जाएं जिससे जांच सही तरीके से हो सके. परिजन को शक है कि सबूत मिटाने के लिए नर्सिंग होम किसी हद तक जा सकता है. नर्सिंग होम से संपर्क करने की कोशिश की गई पर बताया गया कि अभी यहां कोई नहीं है जो इसके बारे में जानकारी दे सके.
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अस्पतालों का औचक निरीक्षण करते देखे जा रहे हैं लेकिन इस तरह से मनमानीपूर्ण तरीके से नर्सिंग होम का संचालन कर जान से खिलवाड़ करने वाले नर्सिंग होम पर उनकी नजर नहीं है.

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