550 योद्धाओं ने किया राष्ट्रीय कुश्ती विजेता का स्वागत

NCC कैडेटों ने किया “राष्ट्रीय कुश्ती विजेता” का भब्य स्वागत

10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में लड़कियां भी कर रही हैं युद्धाभ्यास




कुश्ती के राष्ट्रीय विजेता नायब सूबेदार अविनाश कुमार का भव्य स्वागत NCC कैडेटों ने अपने करतल ध्वनि से संयुक्त आवासीय वार्षिक प्रशिक्षण केंद्र में किया. कैम्प कमांडेंट ने बताया कि नायब सूबेदार अविनाश कुमार ने प्री-ओलम्पिक क्वालीफाई किया है जो भारतीय थल सेना और बिहार राज्य के कुश्ती गौरव हैं. अपने स्वागत से अविभूत नायब सूबेदार अविनाश ने 550 कैडेटों को संबोधित किया और कहा कि भारतीय थल सेना ने उन्हें बेहतर कोच और टेक्निकल प्रशिक्षण देकर इस काबिल बनाया है. साथ ही अपनी सफलता के लिए वे लगातार अथक प्रयास के लिए कटिबद्ध और संकल्पित हैं. उन्होंने कहा कि 2020 के ओलम्पिक में स्वर्ण जीतने के बाद उनका सपना एक स्टेडियम बनाने का है.

कौन हैं अविनाश ?

24 वर्षीय अविनाश चौसा के रहने वाले हैं, जिन्होंने अपने 7 साल के कुश्ती कैरियर में कई पुरस्कार जीते हैं जिसमें अखिल भारतीय फेडरेशन कप में गोल्ड, अंतरराजीय कुश्ती प्रतियोगिता में रजत और ट्राई प्रतियोगिता में कांस्य पदक महत्वपूर्ण है. 2020 के ओलम्पिक में ये टोक्यो जा रहे हैं. अपने वर्तमान छुट्टियों में अविनाश स्कूली बच्चों का मनोबल और उत्साह खेलों के प्रति बढ़ा रहे हैं.

बताते चलें कि बक्सर के चौसा के खम सी कॉलेज में इन दिनों NCC कैडेटों को प्रशिक्षण चल रहा है जिसमे 550 लड़के-लड़कियां शामिल हैं. 10 दिवसीय इस प्रशिक्षण शिविर में सघन युद्धाभ्यास की ट्रेनिग कैडेटों को दी जा रही है. इस स्पेशल ट्रेनिग में लड़कियाँ भी ड्रिल के साथ फायरिंग और युद्धाभ्यास के गुर को सिख रही हैं. साथ ही वाक कला के लिए बाद-विवाद प्रतियोगिता, वॉलीवाल, खो-खो,बेसवॉल जैसे खेलों को भी सत्र में रखा गया है जिसका प्रतिदिन अभ्यास जारी है. भारतीय सेना के दो ऑफिसर और 18 प्रशिक्षित थल-सेना योद्धा 550 कैडेटों वाले इस प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण दे रहे हैं. कमान अधिकारी कर्नल विनोद जोशी ने पटना नाउ से बात करते हुए बताया कि प्रतिवर्ष होने वाले इस प्रशिक्षण से कुशल योद्धा तैयार करते हैं जो सशस्त्र बल, अर्द्धसैनिक बल और पुलिस बल में शामिल होते हैं. उन्होंने कहा कि बिहार और देश के लिए अच्छे नागरिक तैयार करने के लिए संकल्पित हैं. इस ट्रेनिंग शिविर में हथियारों को खोलने-जोड़ने, अंजान जगहों पर बिना रोशनी के साधन के पहुँचने जैसे ट्रेंनिग के साथ-साथ भारतीय इतिहास और संस्कृति पर परिचर्चा भी कराई जा रही है.

बक्सर से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट