ये लापरवाही कहीं महंगी न पड़ जाए !

ये लापरवाही कहीं महंगी न पड़ जाए !
रेलवे की पटरियों से गायब होते पेन्ड्रॉल-क्लिप, कहीं हादसों का न्योता तो नही ?
रेलवे की ये बीमारी 6-7 साल पुरानी है.
600 मीटर की दूरी में 600 से ज्यादा गायब, तो 148 लूज मिले पेन्ड्रॉल क्लिप
कहाँ जाते हैं ये पेन्ड्रॉल क्लिप ?

Patna now investigation




आरा, 30 जुलाई. ट्रेनो के परिचालन में अपनी लेटलतीफी और ट्रेनों के भीतर सुरक्षा को लेकर रेलवे की लापरवाही  तो जगजाहिर है.  लेकिन क्या आप जानते आप जानते हैं  कि जिन पटरियों पर रेल दौड़ती है उनकी  मरम्मत और देखभाल के लिए  रेल प्रशासन कितना सजग है? रेल हादसे से बचने के लिए दानापुर रेल मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर मरम्मती के लिए पिछले कई महीनों से ब्लॉक लगाया गया है. लगातार ट्रैक मेंटेनेंस के नाम पर गाड़ियां विलंब होती हैं और रेलवे द्वारा दावा किया जाता है कि रेल ट्रैक दुरुस्त है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है.

पटना नाउ की टीम ने रेल की पटरियों का हाल जानने के लिए दानापुर रेल मंडल के आरा जंक्शन पर लगे रेलवे की मार्किंग बोर्ड LWR No 3up से पच्छिम की ओर 596 मीटर के 24वे पिलर तक डाउन और अप लाइन की पटरियों की पड़ताल की.

इस पड़ताल में हमने जो पाया उसने हमें चौंका दिया. लगभग 600 मीटर की दूरी में 600 से ज्यादा रेलवे ट्रैक पर पटरियों को जोड़ने वाले पेन्ड्रॉल क्लिप गायब मिले. रेल पटरियों को जोड़ने वाले कंक्रीट के आधा दर्जन ट्रैक जहाँ क्रेक मिलें वही इन पटरियों को जोड़ने वाले कई नट-बोल्ट भी गायब दिखे. पटना नाउ ने खुद एक-एक ट्रैक की जाँच की. इस जाँच के दौरान डाउन और अप लाइन की पटरियों पर कुल 148 पेन्ड्रॉल क्लिप खुले हुए पाए गए, वही डाउन लाइन पर जहाँ 300 पेन्ड्रॉल क्लिप गायब मिले वही अप लाइन पर 328 पेन्ड्रॉल क्लिप गायब मिले. रेल पटरियों पर 3 जगह स्लीपर में दरार मिली और कई नट-बोल्ट जो पटरियों और ट्रकों को जोड़ने का काम करते हैं वो गायब मिले.

ये सबसे खतरनाक रूप में उन जगहों पर दिखे जहाँ दो पटरियों को इन नटो के सहारे जोड़ा गया था. छः नट की जगह सिर्फ चार ही नटों से पटरी जुड़ा था और वहाँ पटरियों को जोड़ने वाले दो पेन्ड्रॉल क्लिप लगातार गायब थे.ऐसी ही स्थिति कमोवेश डाउन और अप लाइन को जोड़ने वाली लूप लाइन के चेंजर के पास भी थी.

हालांकि हमारी इस जाँच के दौरान ट्रैक पर रेलवे के कुछ कर्मचारी भी काम करते दिखे पर सवाल यह है कि मरम्मत के बाद भी ऐसी बदहाली क्यों?

क्या कहा अधिकारियों ने?

इस सन्दर्भ में  जब आरा के रेल प्रबंधक बी के पांडेय से हमने मुलाकात की तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से  यह क्या कह  इंकार कर दिया कि संबंधित  मैटर  उनके विभाग का नहीं है. हमने रेल प्रबंधक के नाते उनसे सुरक्षा को लेकर जब सवाल पूछा उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार किया और PWI से बात करने की सलाह दी. इस मैटर पर इसके पहले इनसे पूर्व रहे प्रंबंधक भी बोलने से कतरा रहे थे.


क्या कहते है PWI चीफ?

इस संदर्भ में PWI चीफ प्रमोद कुमार ने बताया की पेन्ड्रॉल क्लिप गायब नहीं है. उनका रेगुलर मरम्मत का कार्य होता है. लेकिन जब हमने पेन्ड्रॉल क्लिप की चोरी  के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने बताया पेंड्रोल क्लिप कुछ इलाके से से चोरी किए जा रहे है, जिसके लिए उन्होंने आधा दर्जन से अधिक बार रेलवे पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है लेकिन इस संदर्भ में कोई भी व्यक्ति पकड़ा नहीं गया है.


क्या कहते है PWI ?

इस मामले में जब PWI सी बी शंकर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी मुझे आये मात्र एक महीना हुआ है. दुर्घटनाओं की संभावना पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार करते हुए कहा कि अगर 6 महीना मुझे यहाँ काम करते हो जाता तो कुछ कह सकता था पर इस बारे में मैं कुछ नही कह सकता. उन्होंने बताया कि कुछ इलाके में पेन्ड्रॉल क्लिप चोरी भी हो रही है जिसकी शिकायत रेल पुलिस में की गई है.

उनसे जब जर्जर हो चुके नट-बोल्ट और पेन्ड्रॉल क्लिप के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि बड़े अधिकारियों से पूछिए साहब हम तो लगातार मेंटेनेंस देखते हैं हालत ये है कि छुट्टी भी नही जाते. सी बी शंकर ने बातों-बातों में इशारा कर बता दिया कि पेन्ड्रॉल गायब होने की यह बीमारी हाल की या कुछ दिनों पूर्व की नही बल्कि 6-7 साल पुरानी है. इस संदर्भ में हमने रेलवे के PRO संजय कुमार से भी सम्पर्क करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क नही हो पाया.

RPF ने कहा नही हुई है किसी प्रकार की शिकायत दर्ज

पटना नाउ ने जब RPF इंस्पेक्टर एस.एन. राम से इस संदर्भ में पूछा तो उन्होंने पेन्ड्रॉल क्लिप से सम्बंधित किसी भी तरह की शिकायत से साफ इंकार कर दिया. उन्होंने बताया हाल फ़िलहाल के दिनों में इस तरह का कोई FIR नही किया गया है. हमने जब एक-डेढ़ साल पूर्व शिकायत के बारे में पूछा तो भी उन्होंने इंकार किया. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसी शिकायत पर हम ऐसे लोगो को तत्काल पकड़ते हैं. आपको बताते चलें कि रेलवे एक्ट के सेक्शन चार के मुताबिक वैसे व्यक्ति जिनके पास यदि रेल संपत्ति बरामद होती है तो उसके खिलाफ केस दर्ज कर उस पर एक साल की सजा और एक हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है.

पटरी से ट्रेन उतरने के हादसों पर एक नजर

30 मार्च, 2017 :  यूपी के महोबा में महाकौशल एक्सप्रेस पटरी से उतरी, 50 से ज्यादा लोग घायल
21 जनवरी 2017 : कुनेरू में जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस को पटरी से उतरी, 40 से ज्यादा की मौत, 68 लोग घायल
28 दिसंबर 2016 : कानपुर के नजदीक अजमेर-सियालदाह एक्सप्रेस के 15 कोच पटरी से उतरे, 40 से ज्यादा घायल हो गए थे
20 नवंबर 2016 : कानपुर देहात के पुखरायां में इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतरे, 150 लोगों की मौत, 260 घायल हो गए
20 मार्च 2015 : रायबरेली के बछरांवा में जनता एक्सप्रेस पटरी से उतरी, 32 लोगों की मौत,150 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे

हजारों यात्रियों को  कई बोगियों के सहारे इन पटरियों पर  दौड़ने वाली ट्रेनें कितनी सुरक्षित है यह खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता  है. पटरियों और ट्रैक को एक दूसरे से बांधने का काम करती हैं ये पेन्ड्रॉल क्लिप. लेकिन इन क्लिपों के तगातार कुछ दूरियों पर गायब होने के बाद भी अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षित है रेलवे लाइन. अधिकरियों के अनुसार चंद क्लिप निकलने से नहीं होते है हादसे. जबकि कहीं-कहीं पड़ताल की गई दूरी के भीतर ही लगातार एक साथ 5-5 पेन्ड्रॉल क्लिप गायब मिलीं.

कबाड़ी में बिकती हैं ये पेंड्रोल क्लिप

रेलवे के अधिकारी  भले ही  रेलवे लाइन को  दुरुस्त करने की बात कहते हो, लेकिन अंदर ही अंदर वे यह भी मानते हैं इन क्लिपों की चोरी लगातार हो रही है. मगर चोर है  की पकड़ में नहीं आते, जिसकी वजह से  सुरक्षा है ताख पर है. सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार पेन्ड्रॉल क्लिप चोरी छिपे निकालकर चोर इन्हें कबाड़ी में बेंच देते हैं. लोहे की छोटी-छोटी रेल पटरियां भी लोहे की दूकान पर आसानी से नजर आ जाएंगी, जिससे छोटे-छोटे लोहे को मोड़ने का काम किया जाता है. ऐसे कामों के लिए ही लोग इसे खरीदते है. कुछ पेन्ड्रॉल क्लिप तो गाड़ियों के आने-जाने से निकाल जाते हैं. जिसे ट्रैक से गांव वाले मवेशी चराने के दौरान इसे खेतों में फेंक देते हैं. कई बार क्लिप चोरी कर बेचने की भी बात भी सामने आती है. हालांकि, ट्रैकमैन जब भी क्लिप निकला हुआ पाते हैं उसे दुरुस्त कर देते हैं. सूत्रों की माने तो लोहे की इन मजबूत पेन्ड्रॉल क्लिपों से छेनी और उस तरह के लोहे के सामान बनाने

में वे उपयोग में लाये जाते हैं.

एक तरफ देश में बुलेट ट्रेन चलाने का सपना देखा जा रहा है तो दूसरी तरफ मेंटेनेंस का काम अपनी लचर स्थिति में है. इस लचर व्यवस्था के कारण ही देश के कई भागों में  ट्रेन दुर्घटनाएं हुई हैं लेकिन विभागीय अधिकारी से कर्मचारी तक इसे सुधारने के बजाय इसे दुरुस्त कहने का अकड़ रखते हैं. पोल दुर्घटनाओं के बाद ही खुलती है और सजगता भी उसके बाद ही होती है.

दानापुर रेलवे डिवीजन में बिछी रेलवे पटरियों के मेंटेनेंस में काफी खामिया नजर आई है. दानापुर डिवीजन के अंतर्गत पटरियों में गैप आ चुका है और जगह-जगह से पेंड्रोल क्लिप गायब हैं. ऐसे में रेलवे इंजीनियरों की जरा सी लापरवाही में हुए रेल हादसे को दुहरा सकती है. जबकि यह हाबड़ा-दिल्ली का सबसे प्रमुख और व्यस्ततम रूट है. आरा रेलवे स्टेशन से दिल्ली, हावड़ा, पटना, मुगलसराय, सहित अन्य स्थानों के लिए रोजाना अप और डाउन की 96 ट्रेनों का संचालन होता है. अगर यात्रियों की बात करें तो दानापुर रेल मंडल में हर दिन 2 लाख 25 हजार से अधिक यात्री सफर करते हैं. इनमें दैनिक यात्रियों की संख्या अधिक है. ट्रेनों की संख्या बढ़ने से रेल यातायात में इजाफा तो जरूर हुआ है, लेकिन इसका सीधा असर ट्रैक पर पड़ा है. पेंड्राेल क्लिप हटते ही रेल-दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है. रेलवे के तकनीकि जानकार की माने तो एक स्लीपर में चार पेंड्रोल क्लिप की फिटिंग होती है, जबकि एक किलोमीटर के क्षेत्र में तकरीबन 1600 पेंड्रोल क्लिप रेलवे ट्रैक पर होते हैं.  अगर लगातार कई पेंड्रोल क्लिप स्लीपर से हट जाएं तो रेल ट्रैक टेढ़ा हो जाता है. अब आप ही सोचिए ही लगभग 600 मीटर यानि आधा किलोमीटर में यह संख्या 800 की होनी चाहिए. मतलब इन 800 क्लिपों में से 300 क्लिप गायब है फिर भी अधिकारियों को यह मामूली बात लगता है. अगर इसपर ध्यान न दिया गया तो रेल दुर्घटनाओ का हादसा आरा में भी हो सकता है. सर्दियों में रेलवे ट्रैक में खिंचाव आने के कारण फैक्चर होने के मामले बढ़ जाते है. रेलवे के अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है. पहले ऑफिसर ट्राली से ट्रैक निरीक्षण करने के लिए निकलते थे मगर अब बहुत कम ही ऐसा देखने को मिलता है. अब तो बस एक दूसरे पर जिम्मेदारी मढ़ने का काम विभागों में चल रहा है. न कोई जवाब देना चाहता है और न ही उसपर कोई कार्रवाई उल्टे मीडिया पर बरसते हैं कि मीडिया बेवजह उल्टी चीजों को छापती रहती है.

आरा से ओ पी पांडेय और सत्य प्रकाश सिंह की रिपोर्ट