आई.आई.एल. सतत शिक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देगा: न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, सर्वोच्च न्यायालय

इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ लॉ (आई.आई.एल.) की नींव पट्टिका (foundation plaque) का अनावरण भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, माननीय न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित, माननीय न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई और माननीय न्यायमूर्ति श्री वी. रामासुब्रमण्यम के कर-कमलों द्वारा दिनाँक 20 फरवरी 2021 को के.आई.आई.टी. विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर में किया गया। इस समारोह में सीनियर एडवोकेट और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बी.सी.आई.) तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट ( बी.सी.आई.टी.) के चेयरमैन, मनन कुमार मिश्रा; ओडिशा के एडवोकेट जनरल, अशोक परीजा; सीनियर एडवोकेट एवं बी.सी.आई.टी. के चेयरमैन, देबी प्रसाद धल; बी.सी.आई.टी. के एसोसिएट मैनेजिंग ट्रस्टी एवं के.आई.आई.टी. व के.आई.एस.एस. के फाउंडर, प्रो. अच्युत सामंत सहित कई कानूनी दिग्गजों ने मेजबानी करते हुए भाग लिया एवं सभा को सम्बोधित किया।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ट्रस्ट (बी.सी.आई.टी.) के समर्थन एवं के.आई.आई.टी. विश्वविद्यालय के सहयोग से इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ लॉ (आई.आई.एल.) की स्थापना की जा रही है, जो कानून के शिक्षकों के लिए कौशल विकास और वकीलों के अभ्यास करने के साथ-साथ, निरंतर शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने एवं कानूनी शिक्षकों की अकादमी के लिए एक मॉडल संस्थान होगा। यह संस्थान, देश के युवा लॉ स्कूल शिक्षकों को सुविधा प्रदान करेगा और उनकी विशेषज्ञता, पेशेवर कौशल और कुशाग्रता को बढ़ाने में सहायक होगा। यह देश में अपनी तरह का पहला संस्थान होगा।




फाउंडेशन समारोह में बोलते हुए, माननीय न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने आई.आई.एल. की स्थापना का स्वागत किया और इस कदम के लिए बी.सी.आई.टी. और के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय की सराहना की। “जीवन में परिवर्तन एकमात्र स्थिर है। सतत शिक्षा हर पेशे में महत्वपूर्ण है जो हर किसी के जीवन का हिस्सा है।” उन्होंने यह भी कहा कि शायद, यह एक पहला कदम है, जो संस्कृति को फिर से आत्मसात करेगा, जब हमारे पास इस तरह के अधिक से अधिक संस्थान होंगे और इस शिक्षा को जारी रखने के लिए अधिक से अधिक हर किसी के दिमाग में जड़ें जमाते रहने का विचार करेंगे।

माननीय न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने इस महत्वपूर्ण कदम के लिए बी.सी.आई. और के.आई.आई.टी. को बधाई दी। ‘‘बी.सी.आई. द्वारा वर्ष 1988 में स्थापित बेंगलुरु में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने कानूनी शिक्षा और वकीलों की गुणवत्ता में एक विशाल परिवर्तन लाया। इसी तरह आई.आई.एल. की स्थापना भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इतिहास में एक मील का पत्थर है”, उन्होंने कहा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बी.सी.आई. और के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय के सहयोग से आई.आई.एल. उन संकायों का निर्माण करेगा जो पूरे देश में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उन संकायों का भी निर्माण होगा जो छात्रों के बीच संवैधानिक मूल्यों को आत्मसात करेगा।

इस अवसर पर बोलते हुए, माननीय न्यायमूर्ति, वी. रामासुब्रमण्यम ने कहा कि वर्तमान में देश में 1000 से अधिक लॉ कॉलेज हैं, जो हर वर्ष लगभग 2.5 लाख लॉ ग्रेजुएट पैदा करते हैं। उन्होंने कहा कि आई.आई.एल. शिक्षाविदों और पेशेवरों के बीच अन्तर स्पष्ट करने पर विचार-विमर्श करेगी।

मनन कुमार मिश्रा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान में कानून के शिक्षकों और अधिवक्ताओं के कौशल विकास की जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में कानून का कोई प्रशिक्षण संस्थान नहीं है। उन्होंने प्रो. अच्युत सामंत की पहल के प्रति उनके उदार समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय अपने तरह के संस्थान के लिए भूमि और बुनियादी ढाँचे के संदर्भ में सभी आवश्यक सहायता प्रदान कर रहा है। श्री मिश्रा ने कलिंगा इंस्टीच्यूट ऑफ सोसल साइंसेज (के.आई.एस.एस.), जो कि पूरी तरह से निःशुल्क और आवासीय संस्थान है और जहाँ पर 30,000 वंचित आदिवासी बच्चों को शिक्षा प्रदान किया जाता है और इस माध्यम से समाज के लिए प्रो. सामंत की निःस्वार्थ भाव से सेवा करने की प्रशंसा की।

प्रो. अच्युत सामंत ने कहा कि भुवनेश्वर में आई.आई.एल. जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान की स्थापना, ओडिशा राज्य के लिए एक गौरव की बात है। बी.सी.आई. का के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय के साथ भागीदारी के लिए धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, “यद्यपि के.आई.आई.टी. एक युवा विश्वविद्यालय है, परन्तु इसे भारत सरकार द्वारा ‘‘इंस्टीच्यूशन ऑफ एमिनेंस” टैग से नवाजा गया है। के.आई.आई.टी., टाइम्स हायर एजुकेशन (टी.एच.ई.) द्वारा ‘वर्कप्लेस ऑफ द ईयर’ श्रेणी में ‘अवार्ड्स एशिया 2020’ का विजेता है। शिक्षाविदों और शोध के अलावा, इसने खेल और सामाजिक आउटरीच के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अवसर पर अशोक परीजा ने कहा कि पिछले तीन दशकों में कानूनी शिक्षा में बहुत बदलाव आया है। “आज, इंजीनियरिंग, चिकित्सा और प्रबंधन के साथ-साथ कानून भी आकांक्षी युवाओं के लिए अध्ययन का एक पसंदीदा क्षेत्र बन गया है। आई.आई.एल. देश में कानून संकाय की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक लम्बा रास्ता तय करेगा।

इससे पहले, आई.आई.एल. का एक संक्षिप्त परिचय प्रदान करते हुए, प्रसिद्ध कानूनी शिक्षाविद्, प्रो. एन.एल. मित्रा ने कहा कि यह संस्थान देश में कानूनी शिक्षा का व्यवसायीकरण (प्रोफेशनलाइज) करेगा। प्रो. मित्रा, जो कि के.आई.आई.टी. डीम्ड विश्वविद्यालय के पूर्व चांसलर भी रहे हैं, ने कहा, ‘‘एकता, निर्माण क्षमता और न्याय” के तहत इस संस्थान को राष्ट्रीय चरित्र के एक संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने इस पहल के लिए बी.सी.आई. की सराहना की।

मानस रंजन महापात्रा, सीनियर एडवोकेट और सदस्य, विशेष समिति, ओडिशा स्टेट बार काउंसिल ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

पटना नाउ रिपोर्ट