“2 जिंदगी” को बचाने में प्रशासन को लगे “4 घण्टे”

आरा ब्लॉक कैम्पस में विशालकाय पेड़ गिरने से हुई 2 की मौत 2 घायल
2 क्रेन, 3 JCB और एक मिनी JCB के बावजूद लग गये 4 घण्टे,

मिला साथ सबका पर छूटे सबके पसीने




सोमवार को अपराह्न 12.30 बजे के आसपास आरा ब्लॉक स्थित विशालकाय इमली के पेंड के गिर जाने से एक टेम्पो उस की चपेट में आ गया जिसमें सवार 3 लोग प्रकृतिक हादसे में फंस गए. पेड़ का निचला हिस्सा कीड़ा लगने की वजह से कमजोर हो गया था.

टेम्पो में सवार सभी ब्यक्ति जमीरा गांव के थे. टेम्पो में एक बुजुर्ग वासुदेव राम अपनी 4 वर्षीय पोती चांदनी के साथ सवार थे. इस टेम्पो से गर्भवती बहू का इलाज कराने के लिए बुजुर्ग पहुँचे थे जिसे आशा कार्यकर्ता उर्मिला देवी महिला को डॉक्टर के पास छोड़ कर बाहर इमली के पेड़ की छांव में आ गयी. वासुदेव राम अपनी पोती और टेम्पो चालक के साथ इमली के पेड़ के नीचे गाड़ी खड़ी कर इंतजार कर रहे थे. इसी बीच अचानक विशालकाय इमली का पेंड चरचराते हुए इतनी तेजी से नीचे गिरा कि पेंड की छांव में खड़े लोगों को कुछ समझने का मौका तक नही मिला और गर्मी से राहत के लिए इस छाँव में खड़ी मुफ्फसिल थानांतर्गत भकुरा के श्रीनगर गांव की आशा कार्यकर्ता उर्मिला देवी और जमीरा गॉंव का टेम्पो चालक सोनू पासवान की मौत हो गयी. आशा कार्यकर्ता को सबसे पहले JCB की मदद से निकाल कर अस्पताल भेजा गया लेकिन रास्ते मे ही उसकी मौत हो गयी. अचानक धड़ाम से गिरे इस विशालकाय पेड़ के साथ पास ही खड़ा एक ताड़ का पेड़ भी गिर गया. इस हादसे में टेम्पो सहित एक कार, 12 मोटरसाइकिल और 6 साइकिल भी क्षतिग्रस्त हो गई.

घटना स्थल पर मौजूद आमजनो की भीड़

घटना की जानकारी होते ही स्थानीय नवादा थाना के साथ, टाउन थाना, SP, ASP, SDO, और SDPO घटना स्थल पर पहुँचे. लेकिन कैम्पस में पहुंचने के बाद जो स्थिति दिखी उसके बाद उसमे दबे लोगों को निकालना किसी पहाड़ तोड़ने से कम नही था. स्थानीय लोगों का जमवाड़ा भी लग गया और स्थानीय कार्यकर्ता वार्ड पार्षद, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र नेता और स्थानीय विधायक अनवर आलम तक घटना स्थल पर मदद के लिए अपने हाथ बढ़ाने पहुँच गए. पुलिस के जवानों ने खंती और नुकीले लकड़ियों की मदद से फँसे टेम्पो का निचला हिस्सा खोद कर उसमें फंसी तीन जिंदगियों को बाहर निकालने की जी तोड़ कोशिश की लेकिन सफलता नही मिला. इस बीच किसी ने SP साहब से क्रेन की गुहार की तो क्रेन भी मंगाया गया. वन विभाग की टीम भी आ गयी. लेकिन भारी-भरकम पेड़ को क्रेन टांगने में खुद ही टँगा गया. क्रेन पर कई जवान उसका वजन बढ़ाने के लिए चढ़े और उसे एक दूसरे JCB की मदद से भी उसकी वजन बढाने की कोशिश की गई लेकिन सफलता नही मिली. पुनः एक और क्रेन मंगाया गया और बड़ा आरी. लेकिन इतने बड़े विशालकाय पेड़ को स्वचालित आरी के बिना काटना मुश्किल था. इस बीच नवादा थाना प्रभारी मोटरसाइकिल से पूर्व पार्षद अमरेन्द्र चौबे के साथ रमना मैदान के समीप पहुँच ठेले पर खुद से ठेलते हुए गैस कटर लाये. इधर दूसरा क्रेन आने के बाद काम को भी थोड़ी गति मिली. 2 क्रेन 3 JCB और 1 मिनी JCB के सहयोग से पेड़ को हटाने का काम शुरू हुआ और फिर फँसे टेम्पो से बूढ़े बुजुर्ग और उसके पोता-पोती को बाहर निकाला गया.

रेस्क्यू के बाद बाहर सकुशल आयी 4 वर्षीय चांदनी साथ उसका पिता व साथ मे SDO अरुण प्रकाश

सबसे पहले 4 साल की छोटी बच्ची को बाहर सकुशल निकाला गया. उसके बाद गैस कटर की मदद से टेम्पो के हिस्से को काट उसमे फंसे बुजुर्ग, बच्चा और मृत चालक को बाहर  निकाला गया. बचाव दल में लगे लोगों ने लगभग 4.30 बजे तक इस कार्य मे डटे रहे. लगभग 4 घण्टे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में जिला प्रशासन के साथ लोगों ने भी हाथ बंटाए. पुलिस बल के जवानों ने जी तोड़ 4 घण्टे तक टेम्पो को निकालने में मशक्कत की. इस दौरान बिजली के तार भी टूट गए थे जिसकी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन तक बिजली विभाग ने बिजली काट अपना सहयोग दिया.

पेड़ को उठाने में क्रेन के उठ गए चक्के
मृतक आशा कार्यकर्ता उर्मिला देवी
हादसे का शिकार मृत चालक सोनू पासवान
पेड़ गिरने से टेम्पो में फंसा बुजुर्ग वासुदेव राम और उसे निकलने की तरकीब में पुलिस

इस प्राकृतिक हादसे में मृतकों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भाकपा माले के नगर सचिव दिलराज प्रीतम ने की है. उन्होंने इस हादसे में हुई मौत पर दुःख व्यक्त करते हुए उनके परिवार को एक सरकारी नौकरी और घायलों को सरकारी इलाज का खर्च सहित उनके परिवार को 1 लाख मुआवजा देने की मांग की है.

इसमें कोई शक नही कि 4 घण्टे तक कंधा से कंधा मिलाकर पुलिस बल, आम जनता, सामाजिक और राजनीतिक चेहरों ने फँसे लोगों को निकालने के लिए जी तोड़ मेहनत से इस जंग को जीत लिया. मगर यह जीत भी एक मायने में हार है. क्योंकि इस चार घण्टे के रेस्क्यू ऑपरेशन को महज आधे घण्टे के अंदर अंजाम दिया जा सकता था अगर एक स्वचालित आरी मशीन उपलब्ध हो जाती. ऐसे उपकरण का जिला मुख्यालय में रहना बहुत जरूरी है क्योंकि आँधी, तूफान और जर्जरता पेड़ो को कब धाराशायी कर दे कोई नही जानता. ऐसे में ये स्वचालित उपकरण ही त्वरित बचाव के उपाय होंगे जो जिंदगियां बचा सकती हैं.

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट