आरसीपी सिंह और परिवार ने कैसे खरीदे करोड़ों के 58 प्लॉट ?




जदयू नेताओं ने उठाया सवाल

कई जगह पत्नी के नाम भी अलग लिखा

जदयू नेताओं ने ही जुटाएं हैं सुबूत

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने आरसीपी को पत्र लिखकर खरीदे गए भूखंडो को लेकर जवाब मांगा है. इस पत्र में बताया गया है कि नालंदा जिले में जदयू के दो साथियों की सबूत के साथ शिकायत मिली है. इसमें आपके और आपके परिवार के नाम से वर्ष 2013 से 2022 तक अकूत संपत्ति निबंधित कराया गया है जिसमें कई प्रकार की अनियमितता दिखाई दे रही है. आप लंबे समय तक दल के सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार के साथ अधिकारी और राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं. आपको, हमारे माननीय नेता ने दो बार राज्यसभा का सदस्य, पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (संगठन), राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा केंद्र में मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर, पूर्ण विश्वास एवं भरोसे के साथ दिया. आप इस तथ्य से भी अवगत हैं कि माननीय नेता, भ्रष्टाचार के जीरो टॉलरेंस पर काम करते रहे हैं और इतने लंबे सार्वजनिक जीवन के बावजूद उन पर कभी दाग नहीं लगा और न उन्होंने कोई संपत्ति बनाई.पार्टी आपसे अपेक्षा करती है कि इस परिवाद के बिंदुओं पर बिंदुवार अपनी स्पष्ट राय से पार्टी को तत्काल अवगत कराएंगे.

जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली नीतीश सरकार अपनी इस नीति के तहत अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्र में मंत्री रहे आरसीपी सिंह पर जांच बिठा दी है. चुनावी हलफनामा 2010 एवं 2016 में आरसीपी सिंह ने अपनी पत्नी का नाम गिरिजा सिंह दर्ज किया है. वहीं जमीन खरीदी गए केवाला में गिरजा सिंह लिखा गया है. जदयू के दस्तावेजों में आरसीपी सिंह 2010 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होते हैं और उनके परिजन 2013 से अब तक संपत्ति खरीदने में सक्रिय हो जाते हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश के साथ आरसीपी सिंह




2013 से अब तक नालंदा जिले के सिर्फ दो प्रखंड अस्थावां और इस्लामपुर में करीब 40 बीघा जमीन खरीदी गई है. इसके अलावा कई और जिलों में भी संपत्ति बनाई गई है. आरसीपी सिंह की पत्नी (गिरजा सिंह) और दोनों बेटियों यानी लिपि सिंह एवं लता सिंह के नाम पर ज्यादातर जमीन है. आरसीपी ने 2016 के चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों के बारे में कोई भी जिक्र नहीं किया है.वहीँ इस्लामपुर (हिलसा) अंचल के सैफाबाद मौजा में 12 और केवाली अंचल में 12 प्लॉट खरीदे गए हैं. 2013 से 2016 के बीचे में इसकी खरीदारी की गई है. ये प्लॉट लिपि सिंह और लता सिंह के नाम पर है. वहीं, 28 अप्रैल 2014 को चरकावां (नीमचक बथानी, गया) के नरेश प्रसाद सिंह ने बेलधर बिगहा (छबीलापुर, नालंदा) के धर्मेंद्र कुमार को दान में जमीन दी. बाद में धर्मेंद्र कुमार ने यही जमीन लिपि सिंह और लता सिंह के नाम बेच दी गई.

अस्थावां (नालंदा) के शेरपुर मालती मौजा में 33 प्लॉट खरीदे गए हैं. इसमें चार प्लॉट 2011- 2013 में लता सिंह और लिपि सिंह के नाम पर लिया गया है. पिता के रूप में आरसीपी सिंह का नाम है. बाकी 12 प्लॉट गिरजा सिंह और 18 प्लॉट लता सिंह के नाम पर खरीदे गए हैं. वहीं, महमदपुर में 2015 में एक प्लॉट गिरजा सिंह के नाम पर खरीदा गया. 2011 में 2, 2013 में 2, 2014 में 5, 2015 में 6, 2017 में 1, 2018 में 3, 2019 में 4, 2020 में 3, 2021 में 6 तथा 2022 में 2 प्लॉट खरीदे गए हैं.

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