नई बहाली के चक्कर में पुराने शिक्षकों को भूल गई सरकार

जी हां, कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है बिहार के शिक्षा विभाग में जहां सातवें चरण की बहाली के लिए सरकार ने नए सिरे से रिक्तियों की मांग सभी जिलों से की है. सातवें चरण की बहाली के लिए लगातार जोर आजमाइश चल रही है. लेकिन सरकार उन शिक्षकों को भूल गई जो पिछले 10-15 साल से अपने घर से दूर कोई मायके में तो कोई कहीं और मर मर के जीने को मजबूर है. खास तौर पर घर से दूर रहने का खामियाजा महिलाएं और दिव्यांग भुगत रहे हैं. इनमें से कई महिलाओं को तो मायके में रहने की सजा भुगतनी पड़ रही है. ना तो वे नौकरी छोड़ पा रही हैं और ना ही ससुराल में रह पा रही हैं, जिसकी वजह से मायके और ससुराल का रिश्ता भी खराब हो रहा है.

शिक्षा विभाग में नए अपर मुख्य सचिव के आने के बाद पुराने शिक्षकों की आस भी बंधी थी लेकिन अब वह आज भी टूटती हुई दिख रही है क्योंकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि सातवें चरण की बहाली होने के बाद ही ट्रांसफर पर विचार किया जाएगा. जाहिर तौर पर इसका नतीजा यह होगा कि सभी स्कूलों में रिक्तियां भर जाएंगी और ट्रांसफर के लिए कहीं कोई जगह ही नहीं बचेगी ऐसे में एक बार फिर पहले से निराश परेशान महिलाओं दिव्यांग और अन्य शिक्षकों को कम से कम 4 से 5 साल का और इंतजार करना पड़ेगा लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में सबसे दिलचस्प भूमिका शिक्षक संघों की है जिनके भरोसे महिलाएं और दिव्यांग सरकार से इस दिशा में कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे थे. अब तो स्थिति यह हो गई है कि शिक्षक खुद ट्रांसफर की मांग के लिए अलग मोर्चा बनाकर शिक्षा विभाग के चक्कर लगा रहे हैं और धरना प्रदर्शन की चेतावनी दे रहे हैं. इस मामले में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी भी कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. हालांकि उन्होंने कई बार यह बयान दिया था कि ऑनलाइन सॉफ्टवेयर तैयार हो रहा है और जल्द ही सॉफ्टवेयर के जरिए ट्रांसफर के आवेदन लिए जाएंगे.




बिहार में कई शिक्षक संघ कार्यरत हैं लेकिन उनमें से लगभग सभी इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर खामोश बैठे हैं. 2 वर्ष पहले बिहार सरकार ने नियोजित शिक्षकों के लिए नई नियमावली जारी की थी जिसमें उन्हें एक बार अपनी नियोजन इकाई से अलग ट्रांसफर की सुविधा देने की बात भी कही गई थी लेकिन 2 साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने चुप्पी साध रखी है और एक तरह से यह स्पष्ट कर दिया है कि इसमें फिलहाल अच्छा खासा वक्त लगने वाला है. मजे की बात यह कि तमाम शिक्षक संघ इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं. ऐसे में नियोजित शिक्षक स्थानांतरण संघर्ष मोर्चा बनाकर शिक्षकों ने अपनी लड़ाई खुद लड़ने का फैसला किया है और उन्होंने शिक्षा विभाग में इस बाबत जानकारी दे दी है कि अगर सरकार ने 2 हफ्ते में ट्रांसफर की अधिसूचना सूचना जारी नहीं की तो 27 जून से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन होगा.

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