बोरिंग के अर्थिंग ने ली 7 बर्षीय बच्चे की जान

गुस्साए ग्रामीणों ने लगाए ऊर्जा मंत्री और बिजली विभाग के खिलाफ नारे

आरा, 22 जुलाई. बिजली विभाग की लापरवाही के किस्से सबने सुने होंगे. कभी ज्यादा बिल भेजने लेकर तो कभी बिजली के तारों को खुला छोड़ने को लेकर विभाग की किरकिरी होते रही है. लेकिन आज बिजली विभाग की लापरवाही ने एक बच्चे की जान ली. सरकारी बोरिग के अर्थिंग में बिजली आने से 7 वर्षीय बच्चा उसकी चपेट में आ गया और बजली के करंट ने उसकी जान ले ली. घटना भोजपुर जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के गोठउला गाँव की है. इस घटना के बाद गाँव में कोहराम मच गया. गांव के लोगो ने बताया कि जर्जर तार को बदलने के लिए गांव के लोगों द्वारा कई बार बिजली विभाग को कहा गया, लेकिन विभाग के द्वारा इस मामले पर सुनवाई नहीं की गई. लोगो की मानें तो बोरिग कई महीनों से बंद पड़ा है फिर भी विभाग बिजली की सप्लाई बोरिग में अभी भी दे रखी है जिससे कई बार जानवरों की भी बिजली की चपेट में आने से मौत हो चुकी है. लेकिन बिजली विभाग कान में तेल डालकर सोया हुआ है. बिजली विभाग के इस लापरवाह रवैया के कारण आज एक बच्चे की मौत हो गयी. बच्चे की मौत से गुस्साए इलाके के लोगों ने बच्चे के शव को गोठउला-संदेश-आरा मुख्यमार्ग पर रख घण्टो मार्ग अवरुद्ध किया. लोगों ने बिजली विभाग और उर्जा मंत्री आर.के. सिंह के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया. मृतक के परिजनों की शिकायत सुनने पहुंचे ASI को भीड़ के गुस्से का शिकार होना पड़ा. आक्रोशित लोगों ने आरा विडियो को घटना स्थल पर बुलाने की मांग की और पुलिस से वे भीड़ गए. ग्रमीणों के उग्र प्रदर्शन से बड़ी मुश्किल से पुलिसकर्मियों ने किसी तरह अपने आप को बचाया.




इसी दौरान एक नाबालिग ट्रैक्टर चालक को वहां से गुजरने के दौरान रोड जाम करने वालों ने रोका तो नाबालिक पर लोगों ने उसे रोकना चाहा तो नाबालिक ड्राइवर लोगों पर आग-बबूला हो गया. फिर क्या था आक्रोशित लोगों ने नाबालिक ड्राइवर की जमकर धुनाई कर दी और उसे ट्रैक्टर से उतार उसके ट्रैक्टर को सड़क पर लगा सड़क को जाम कर दिया. फिर काफी देर के बाद दुबारा गयी पुलिस ने ग्रमीणों का मान-मनौवल कर जाम हटवाया और बच्चे को शव को उठाकर आरा सदर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा. अब देखना यह होगा कि इस घटना के बाद भी चिर निद्रा में सोए बिजली विभाग की नींद खुलती है या यूँ ही अपने अंदाज में मस्तमौला रहता है.

आरा से ओ पी पांडेय व सत्य प्रकाश की रिपोर्ट