आपदाओं से निपटने में अपने अनुभवों को लिख कर अधिकारी जीतेंगे पुरस्कार 

आलेखों का होगा Documentation जिससे बन सके और बेहतर योजना 

बाढ़,वर्षा,आकाशीय बिजली,आग लगने की घटनाएं और राहत का कार्य का अनुभव




क्या रहा सकारात्मक पक्ष तथा कौन सा पक्ष कमजोर रहा

 पदाधिकारियों को अपने अनुभवों को लेखबद्ध कर एक माह के अंदर प्राधिकरण भेजना होगा 

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वर्ष 2016 में राज्य के लगभग सभी जिले विभिन्न आपदाओं से प्रभावित रहे है. ग्रीष्म काल में बड़े पैमाने पर आग लगने कीघटनायें राज्य में हुई हैं तथा मॉनसून के आगमन के साथ ही बिजली गिरने से काफी लोगों की मौतें हुई है.यहां तक कि किसीएक दिन बिजली गिरने से 56 लोगों की मौत हुई जो अप्रत्याशित है. मॉनसून आने के बाद जुलाई, अगस्त और सितम्बर महीने में राज्य के31 जिले कमोवेश विभिन्न चरणों में बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. जहां 31 जिलों में बाढ़ आई वहीं अगस्त माह में जब धान की रोपनी का समय था, अल्प वर्षापात के कारण कतिपय जिलों/प्रखंडों में सुखाड़ की भी स्थिति बनी. परन्तु उपरोक्त सभी स्थितियों का मुकाबला राज्य प्रशासन की पूरी मशीनरी ने मिलकर किया. जहां तक बाढ़ आपदा प्रबंधन का सवाल है इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया गठित किया है जिसके आलोक में लगभग सभी जिलों में बाढ़ की पूर्व तैयारियों को पूरा किया गया था. जल संसाधन विभाग ने भी मानक संचालन प्रक्रिया गठित किया है जिसके अनुसार तटबंधों के सुरक्षा का कार्य बाढ़ आने के पूर्व एवं बाढ़ के दौरान युद्ध स्तर पर किया गया.बाढ़ प्रभावित जिलां में बड़ें पैमाने पर मानव एवं पशुओं के लिए राहत केन्द्रों तथा सामुदायिक किचन एवं लंगर की व्यवस्थाएं की गई. जिन जिलों  में बाढ़ की स्थिति भयावह नहीं थी उन जिलों के जिला पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक दूसरे बाढ़ प्रभावित जिलों की भरपूर मदद की.इसी प्रकार आग लगने के दौरान भी जिलों ने मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार त्वरित राहत बांटने का काम किया. यहां तक कि कतिपय जिलों ने आग एवं आसमानी बिजली गिरने से बचाव के संबंध में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी के आलोक में जन-जागरूकता लाने के अभिनव प्रयोग भी किए ।

flood-in-bihar1  आपदा प्रबंधन के इन समस्त कार्यों में प्रमंडलीय आयुक्तों/जिला पदाधिकारियों की भूमिका नेतृत्वकारी रही तथा सरकार के विभिन्न विभागों ने जिलों को भरपूर दिशा निर्देश जिलों को दिया। पूर्णिया प्रमंडल में तो विशेष आयुक्त के रूप में श्री सुधीर कुमार, प्रधान सचिव, कृषिविभाग को प्रतिनियुक्त किया गया, जिन्होंने अपने पूर्व अनुभव के आधार पर जिलों को उचित मार्गदर्शन प्रदान किया.इस प्रकार सभी जिला पदाधिकारी/सभी प्रमंडलीय आयुक्त एवं जिलों के प्रभारी सचिव/प्रधान सचिव को वर्ष 2016 मेंअग्निकांड, आसमानी बिजली गिरने तथा बाढ़ आपदा से निपटने का पर्याप्त अनुभव प्राप्त हुए हैं। यदि इन अनुभवों को लेखबद्ध कर उसे एक दूसरे के साथ बांटा जाय तो हम सीख सकते हैं कि हमारा सकारात्मक पक्ष क्या रहा तथा कौन सा पक्ष कमजोर रहा जिसमें सुधार कर हम भविष्य के आपदा प्रबंधन के कार्यो को बेहतर बना सकते हैं ।

 

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उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस बिन्दु पर विचार किया है तथा यह तय किया है कि सभी प्रमंडलीय
आयुक्तों, जिला पदाधिकारियों, जिलों के प्रभारी सचिव/प्रधान सचिव/जल संसाधन विभाग/कृषि विभाग/आपदा प्रबंधन विभाग/लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग/पशुपालन एवं मत्स्य संसाधन विभाग/समाज कल्याण विभाग/स्वास्थ्य विभाग/शिक्षा विभाग तथा NDRF/SDRF से अनुरोध किया है कि वे उपरांकित आपदाओं के प्रबंधन में अपने-अपने अनुभवों को लेखबद्ध कर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजे. इन अनुभवों को पुस्तिकाकार कर  प्रकाशित किया जाएगा साथ ही आपदा प्रबंधन के श्रेष्ठ
कार्य जिन जिलों में हुए हैं उन्हें पुरस्कृत भी किया जाएगा. सभी पदाधिकारियों को अपने अनुभवों को लेखबद्ध कर एक माह के
अंदर प्राधिकरण द्वारा नामित नोडल पदाधिकारी मोनीषा दूबे, वरीय संपादक को ईमेल- [email protected] पर देने का
आग्रह किया गया है.