जनता के नहीं, अफसरों के मुख्यमंत्री हैं नीतीश कुमार

लोगो मे मायूसी, मुख्यमंत्री से नही मिल पाए ग्रामीण

प्रशासन ने CM तक आम जनता को पहुँचने ही नही दिया




गड़हनी. अपने सुशासन के लिए जनता के बीच चर्चित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब जनता की आवाज ही नही सुन पाए तो इसे क्या माना जाए? क्या जनता के बीच खुद नही गए या किसी ने गुमराह किया? जनता के लिए दरबार लगाने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जनता के बीच कैसे चूक गए कि मुख्यमंत्री को तीन बार से सत्ता में लाकर अपनी आँखों पर बसाने वाले मुख्यमंत्री को जनता ने यह कह किया कि नीतीश कुमार अब जनता के नही अफसरों के मुख्यमंत्री हो गये हैं. क्योंकि अफसरशाही इस कदर है कि क्या कहा जाए. जनता अपने कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट परेशान है और सरकारी अफसरों और बाबुओं का ये हाल है कि न तो पेंशन की राशि का कोई भुगतान कर रहा है और न ही आवास और अन्य योजनाओं की कोई सुध लेने को तैयार है. दरअसल हम बात कर रहे है भोजपुर दौरे पर आए मुख्यमंत्री की.

मुख्यमंत्री कार्यक्रम को ले जहाँ भेडरी वासियो समेत आसपास के सभी लोगो के मन मे उत्सुकता थी कि मुख्यमंत्री से अपनी बात रखूंगा या मिल कर अफसरशाही के शिकायत करूँगा. वही इस उत्सुकता पर जिला प्रसाशन ने पानी फेर डाला. मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर उड़ जाने के बाद आम लोगो को आने की अनुमति दी गई. मुख्यमंत्री से मिलने आई भेडरी निवासी नीलम कुँवर,लखपतो कुँवर,सिमा देवी,मिना देवी बताती हैं कि पेंशन के लिए रोजाना प्रखण्ड कर्यालय व मुखिया, ग्राम सेवक समेत कई अफसरों का चक्कर लगाना पड़ता हैं. घर से सोच कर आई थी कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करूंगी लेकिन पुलिसकर्मियों ने अंदर नही आने दिया, वही डेगोडीहरी निवासी कमता सिंह की माने तो जिला प्रशासन अपनी मर्जी के मुताबिक पास देकर लोगो को कार्यक्रम में शरीक कराया हैं.

गड़हनी से मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट