सब तक वैक्सीन की पहुँच बनाने में लगा गेट्स फ़ाउंडेशन

भारत में भी अधिक से अधिक वैक्सीन पहुंचाने की कोशिश में बीएमजीएफ• सीईओ ने कहा, फाउंडेशन ने दिया कई कंपनियों को लोन ताकि जल्द से जल्द अधिक से अधिक वैक्सीन बन सकें• वैक्सीन बनाने में उपयोग होने वाले मटेरियल का भी भंडारण किया, कंपनियों के बीच तकनीक का आदान-प्रदान भी किया• किसी भी बाधा को वैक्सीन के पहुंच के रास्ते में नहीं खड़ा होना चाहिए – सीईओ मार्क सूज़मैन पटना, 12 मई(ओ पी पांडेय). भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप को देखते हुए बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) प्रयासरत है कि ज्यादा से ज्यादा वैक्सीन जल्द से जल्द पहुंचे ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके. फाउंडेशन के CEO मार्क सूजमैन ने शनिवार को बताया कि बीएमजीएफ की विभिन्न वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बातचीत चल रही है. फाउंडेशन ने वैक्सीन के निर्माण व सुचारू वितरण के लिए 3000 लाख डालर से ज्यादा का निवेश किया है. इसके अलावा 3000 लाख डालर का लोन कंपनियों को दिया है ताकि जल्द से जल्द भारत में वैक्सीन पहुंच सके. इसमें भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि फाउंडेशन का लक्ष्य 2000 लाख वैक्सीन तैयार कराने का है जिस पर तेजी से काम चल रहा है.सीईओ ने बताया कि वैक्सीन का उत्पादन बढ़वाने के लिए फाउंडेशन ने कई देशों की कंपनियों के बीच तकनीक का आदान-प्रदान कराया है. इसके अलावा वैक्सीन बनाने में उपयोग होने वाले मटेरियल का भंडारण भी कर रखा है ताकि किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न हो. उन्होंने आश्वस्त किया है कि फाउंडेशन

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अब स्कूल एवं कॉलेजों में बनाया जायेगा कोविड टीकाकरण केंद्र

• संक्रमण बढ़ते देखकर लिया गया निर्णय• तीन कमरों का बनेगा टीकाकरण केंद्र• राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया निर्देशआरा, 12 मई(ओ पी पांडेय). जिले में वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कोविड टीकाकरण अभियान को तेज किया गया है. अब 18 से 44 वर्ष तक के लाभार्थियों का टीकाकरण किया जा रहा है. इस कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल व कॉलेजों में टीकाकरण केंद्र बनाने का निर्णय लिया है. इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किया है. जारी पत्र में कहा गया है कि कोविड 19 वैश्विक महामारी से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 18 से 44 वर्ष आयुवर्ग के सभी लाभार्थियों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क टीकाकरण कराया जा रहा है. इस आयुवर्ग के लाभार्थियों की अत्यधिक संख्या को देखते हुए टीकाकरण सत्र स्थल को कोविड 19 की जांच एवं उपचार किये जा रहे स्वास्थ्य संस्थान परिसर से अलग रखे जाने का निर्णय लिया गया है. टीकाकरण पूर्व से संचालित स्वास्थ्य संस्थानों से अलग सरकारी स्कूल, कॉलेज आदि में आयोजित किया जाना है. संक्रमण बढ़ते देखकर लिया गया निर्णय:पत्र के आलोक में जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार सिन्हा ने बताया संक्रमण लगातार बढ़ रहा है और इससे सुरक्षित रहने का सबसे सशक्त माध्यम टीकाकरण ही है. सरकार और स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है कि 18 वर्ष के ऊपर के सभी युवाओं और अन्य लोगों को टीका लगाया जाए. लेकिन, केंद्रों पर बढ़ रही भीड़ व संक्रमण की संभावना

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प्रशासन की पैनी नजर में गड़हनी बाजार,भीड़ करने वालो की अब खैर नही

गडहनी. स्थानीय प्रखंड के गड़हनी बाजार चरपोखरी व गड़हनी पुलिस का पैनि नज़र आज-कल गड़हनी बाजार पर टिकी हैं, लाॅकडाउन का सख्ती से पालन कराने को ले चरपोखरी थानाध्यक्ष ओमप्रकाश गुप्ता एवं गड़हनी थानाध्यक्ष संतोष कुमार दल-बल के साथ रविवार को गड़हनी बाजार में संयुक्त रूप से अभियान चलाने को ले कमर कस रखे हैं. इसी क्रम मे रविवार को प्रशासन की पैनी नजर गडहनी बाजार पर रही. प्रशासन के डर से बाजारों मे सन्नाटा छाया रहा. सुबह मे जरूरी सामानों की खरीदारी करने आये लोगों ने सोसल डिस्टेंसिंग का पालन एवं मास्क का प्रयोग करते हुए नजर आये. अन्य दिनो के अपेक्षा रविवार को सुबह के ग्यारह बजे से पहले ही बाजारों से भीड धीरे धीरे खत्म होना शुरू हो गया और दोपहर होते होते बाजारों मे सन्नाटा छा गया हालांकि कुछ लोग अभी भी प्रशासन के आँखों मे धुल झोंक लाॅकडाउन का उल्लंघन करने से बाज नही आ रहे है. इस दौरान गडहनी थानाध्यक्ष संतोष कुमार रजक, चरपोखरी थानाध्यक्ष ओमप्रकाश कुमार सहित नोडल पदाधिकारी उदय कान्त चौधरी पुरे दिन बाजारों मे भ्रमण करते देखे गए. गड़हनी से मुरली मनोहर जोशी की रिपोर्ट

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HRCT के लिए अब इससे ज्यादा नहीं देना होगा

कोरोना काल में एक तरफ जहां रैपिड एंटीजन टेस्ट की रिपोर्ट भरोसेमंद नहीं है दूसरी तरफ आरटी पीसीआर टेस्ट के लिए लंबा इंतजार और उसके बाद उसकी रिपोर्ट के लिए भी कम से कम 6 से 7 दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है. कोविड-19 की स्थिति जांचने के लिए मरीजों के पास अब एचआर सीटी स्कैन के अलावा दूसरा कोई भरोसेमंद उपाय नहीं है. ऐसे में स्कैन सेंटर पर भारी भीड़ उमड़ रही है और स्कैन के चार्ज को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे थे. कई स्कैन सेंटर अनाप-शनाप पैसे वसूल रहे थे जिसे लेकर अब बिहार के साथ विभाग ने संज्ञान लिया और एचआर सीटी स्कैन की दर तय कर दी है. अब कोई भी स्कैन सेंटर अधिकतम ढाई हजार और 3000 से ज्यादा नहीं ले सकेगा. इस अधिकतम दर में जीएसटी और पीपीई किट की कीमत भी शामिल है. अगर कोई जांच केंद्र निर्धारित शुल्क से ज्यादा लेता है तो उस पर आपदा अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी आपको बता दें कि इसके पहले सरकार ने निजी अस्पतालों में कोरोना इलाज की दर भी तय कर दी है. इसके साथ-साथ एंबुलेंस सेवा के लिए भी सरकार ने हर गाड़ी के लिए अलग-अलग अधिकतम भाड़ा तय कर दिया है. राजेश तिवारी

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कराइए रजिस्ट्रेशन, अब 18 प्लस का बिहार में होगा वैक्सीनेशन

आखिरकार 8 दिनों के इंतजार के बाद बिहार में 18 से 44 वर्ष के लोगों के लिए अच्छी खबर आ गई है. बिहार को केंद्र सरकार से साढे तीन लाख कोविड-19 टीका उपलब्ध कराया गया है जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने जानकारी दी है कि 9 मई से 18 से 44 वर्ष तक के लोगों को भी कोविड-19 वैक्सीन की खुराक दी जाएगी. हालांकि यह बिना रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा. Cowin ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद एक खास ओटीपी जनरेट होगा जो आपको वैक्सिंग सेंटर पर देना होगा उसके बाद ही आप वैक्सीनेशन करा पाएंगे. Click Here for Registration https://selfregistration.cowin.gov.in/ pncb

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क्या आपने पढ़ी है ये जंगल गाथा!

जंगल गाथा की विषय वस्तु यह किताब झारखण्ड/बिहार के जंगलों और उनसे जुड़े मुद्दों पर केन्द्रित है, यही स्थिति पूरे देश के जंगलों की है. मंडल और सारंडा जैसे जंगलों का नाश, जानवर, अविकास, अंधविश्वास, आदिवासी, नक्सल, पर्यावरण, प्रदूषण, भ्रष्टाचार, विस्थापन, डायन-हत्या, प्राकृतिक सम्पदा का निर्मम दोहन – देश के कई इलाकों में आम मुद्दे हैं. झारखण्ड एक परखनली है. इसमें पूरे देश के जंगलों, जंगली जीवों और वनवासियों के विनाश की प्रक्रिया देखी जा सकती है. इसकेे लेखक गुंंजन सिन्हा कहते हैं- “इस गंभीर विषय में मेरा दखल बस इतना है कि मेरे पिता एक वन अधिकारी थे, सो बचपन से मुझे जंगलों में जाने, जीने, उन्हें देखने-जानने के मौके मिले. मेरे पास बस कुछ अनुभव हैं जंगल से इसी भावात्मक सम्बन्ध के. प्रकृति हमारे निजी जीवन, उसके सुख दुःख को स्पर्श करती है. प्रकृति की सबसे आकर्षक अभिव्यक्ति है जंगल. यह तन और मन दोनों को चंगा करता है. नदियों, पहाड़ों, जंगलों में रहने वाले इंसानों और जीव-जंतुओं को लगातार नष्ट कर प्रकृति की अमूल्य देन को खत्म किया जा रहा है. लेकिन आम लोग ऐसे व्यवहार कर रहे हैं, मानो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. कहीं कोई प्रभावकारी विरोध नहीं है.दुनिया भर के लोगों ने ग्रेटा थनबर्ग के रुंधे हुए गले से उनकी बातें सुनीं, आंसू देखे, कुछ देर सोचा और फिर रोजमर्रे की ओर बढ़ लिए.आप रुकें और देखें अपने आस पास – आपका रुकना, देखना, बोलना और गलत का विरोध करना ज़रूरी है. किसी इलाके में उग्रवाद तभी बढ़ता है, जब व्यवस्था का भ्रष्टाचार और

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2 लाख से ज्यादा शिक्षकों को अब तक नहीं मिला वेतन

लॉकडाउन में शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने से मचा हाहाकार SSA मद का आवंटन नहीं आने के कारण कहीं 3 तो कहीं 4 महीने से नहीं हुआ है शिक्षकों का वेतन भुगतान पटना।। 6 मई 2021एक तरफ कोरोना वायरस के फैलने से अब तक सैकड़ों शिक्षकों ने जान गवांं दी तो दूसरी तरफ 3-4 महीने से वेतन ना मिलने के कारण पाई पाई को तरस रहे हैं बिहार के विभिन्न पंचायत, प्रखंड एवं नगर निगम क्षेत्र में कार्यरत 323000 नियोजित शिक्षक. बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता प्रेमचंद्र ने कहा कि विभिन्न स्तर पर लगातार जद्दोजहद किए जाने एवं विभिन्न संघों द्वारा लगातार मांग किए जाने के उपरांत राज्य भर में पदस्थापित कुल 323000 नियोजित शिक्षकों में से महज 66104 नगर पंचायत प्रखंड शिक्षकों के वेतन भुगतान हेतु राज्य सरकार द्वारा मिलने वाली (जी ओ बी) मद के राशि का ही आज आवंटन का पत्र निर्गत हुआ है जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है. पूरे राज्य के विभिन्न प्रखंडों पंचायतों एवं नगर निगम में पदस्थापित शेष 2 लाख 56 हजार 896 नियोजित शिक्षकों एवं 15000 उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए जिनका समग्र शिक्षा अभियान (SSA) मद से वेतन का भुगतान होता है, का आवंटन अब तक नहीं आने से शिक्षकों में काफी निराशा का माहौल है क्योंकि उपर्युक्त शिक्षकों को 3 से 4 महीने का वेतन बकाया है जिसका भुगतान अब तक नहीं किया गया है. बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार एवं राज्य प्रवक्ता सह मीडिया प्रभारी प्रेमचंद्र ने संयुक्त

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कोविड के इलाज के लिए अस्पताल दर तय

कोविड-19 के लिए एक तरफ जहां मरीज के परिजन अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं कि कहीं कोई एक बेड मिल जाए या ऑक्सीजन की व्यवस्था हो जाए दूसरी तरफ अस्पताल मनमानी कर रहे हैं. कई निजी अस्पताल मरीज के परिजनों से अनाप-शनाप पैसे इलाज के नाम पर वसूल रहे हैं. बिहार में कई जगह से इस तरह की शिकायत मिलने के बाद आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की नींद खुली है. स्वास्थ्य विभाग ने बिहार के शहरों को तीन श्रेणी में बांटते हुए अस्पताल में सामान्य कोविड-19 गंभीर मरीज के लिए इलाज और अति गंभीर स्थिति में इलाज के लिए होने वाले खर्च की सीमा तय कर दी है. नीचे दिए गए चार्ट में आपको पूरी जानकारी मुहैया कराई गई है. श्रेणी A- पटना श्रेणी B- भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया, पूर्णिया श्रेणी C- अन्य शहर pncb

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एम्बुलेंस चालकों की मनमानी पर रोक

सरकार ने मुश्किल वक्त में मरीज के परिजनों से मनमाना किराया वसूलने की शिकायतें को देखते हुए एम्बुलेंस का किराया तय कर दिया है. अब एम्बुलेंस के लिए आपको 50 किलोमीटर तक आने जाने के लिए वाहन के मुताबिक ₹ 1500 से ₹2500 तक का अधिकतम किराया ही देना होगा. वाहन के मुताबिक किराया की पूरी जानकारी उपर चार्ट में दी गई है. राजेश तिवारी

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लॉकडाउन में वेतन को तरसे शिक्षक

ईद से पहले नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को लंबित वेतन एवं मूल्यांकन पारिश्रमिक भुगतान करने की मांग आल इंडिया फेडरेशन ऑफ एजुकेशन एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्री एवं अपर मुख्य सचिव से हस्तक्षेप करने का किया आग्रह आंवटन रहने के बावजूद लॉक डाउन के कारण हो रही है समस्या लॉक डाउन के कारण शिक्षा विभाग से वेतन भुगतान हेतु विशेष आदेश जारी करने की मांग पटना।। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एजुकेशन एसोसिएशन (एआईएफईए) के राष्ट्रीय सचिव शैलेन्द्र कुमार शर्मा “शैलू” एवं राज्य पार्षद सह पूर्व सदस्य शैक्षिक परिषद जयनंदन यादव ने शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव से विशेष निर्देश जारी कर ईद से पहले वेतन भुगतान कराने एवं इंटर और मैट्रिक परीक्षा के उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों,शिक्षकेत्तर कर्मियों आदि को अविलंब पारिश्रमिक सहित अन्य भत्ते की राशि भुगतान कराने की मांग की है . शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष के साथ साथ उनके परिजन भी हो रहे हैं संक्रमित उन्होंने कहा है कि राज्य में वैश्विक महामारी कोरोना लागातार घातक एवं भयावह होता जा रहा है,जो किसी से छुपा नहीं है. बिहार में भी अब तक एक लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं और कईयों ने अपनी जान गंवा दी है तो वहीं शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष एवं शिक्षकेत्तर कर्मी भी इससे अछूते नहीं हैं. वे एवं उनके परिजन भी लागतार संक्रमित हो रहें और उनमें से अबतक लगभग 250 अधिक ने अपनी जान गंवा दी है. खुद और अपने परिजनों के भरण-पोषण,ईलाज कराना हो रहा मुश्किल एआईएफईए के राष्ट्रीय सचिव शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने

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