“निष्ठा” प्रशिक्षण का उद्घाटन

कोइलवर (ब्यूरो रिपोर्ट) | इन्टीग्रेटेड टीचर्स ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत नेशनल इनिसिएटिव फार स्कूल हेड्स एन्ड टीचर्स हालिस्टिक एडवान्समेंट (विद्यालय प्रमुखों और शिक्षकों की समग्र उन्नति के लिए राष्ट्रीय पहल) हेतु पांच दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, समग्र शिक्षा, राघवेंद्र प्रताप सिंह, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा, कृष्ण मुरारी गुप्ता एवं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, कोईलवर, विनीता कुमारी द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व में बच्चों को शिक्षण के तहत विषयगत जानकारी पर ही बल दिया जाता था परन्तु आज किताबों की दुनिया से बाहर निकलकर सीखने-सिखाने की बात की जा रही है. सूचना एवं संचार तकनीकी के दौर में बच्चों की सोच में भी परिवर्तन हुआ है इसलिए बच्चों की रुचि के अनुसार सिखाने की नई तकनीक की जानकारी हेतु प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है. जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा कृष्ण मुरारी गुप्ता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए बताया कि आज विद्यालयों में स्मार्ट कक्षा का संचालन हो रहा है जिसका सकारात्मक प्रभाव भी दिखाई दे रहा है. प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, कोईलवर, विनीता कुमारी ने कहा कि शिक्षक समाज का पथ- प्रदर्शक होता है और बच्चों के भविष्य का निर्माता होता है. उन्होंने ने आगे कहा कि प्रशिक्षण में समय का अनुपालन सुनिश्चित हो ताकि नवाचार को लेकर शिक्षक विद्यालयों में जायें और बच्चों को भी देने का कार्य करें. पांच दिवसीय प्रशिक्षण में जिला प्रशिक्षण संभाग प्रभारी शाश्वत अवतार, एसआरपी, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, केआरपी,राजाराम सिंह, मो.रफी, महातम

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पैक्स का निर्वाचन पांच चरणों| जानिए कब

आरा/ भोजपुर (ब्यूरो रिपोर्ट)|पैक्स का निर्वाचन पांच चरणों में 9 दिसंबर से 17 दिसंबर तक होंगे. इस आशय की अधिसूचना बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार द्वारा निर्गत किया गया है. प्रथम चरण 9 दिसंबर, द्वितीय चरण 11 दिसंबर, तृतीय चरण 13 दिसंबर, चतुर्थ चरण 15 दिसंबर तथा पांचवा चरण 17 दिसंबर मतदान हेतु निर्धारित है. मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तिथि एक 11 नवंबर निर्धारित है. बिहार राज्य निर्वाचन प्राधिकार द्वारा पैक्स निर्वाचन 2019 हेतु निर्वाचन का कार्यक्रम निम्नवत है –सूचना का प्रकाशन –प्रथम चरण 11 नवंबर, द्वितीय चरण 13 नवंबर, तृतीय चरण 15 नवंबर, चतुर्थ चरण 17 नवंबर तथा पांचवा चरण 19 नवंबर है.नामांकन देने की अवधि –प्रथम चरण 26 नवंबर से 28 नवंबर, द्वितीय चरण 28 नवंबर से 30 नवंबर, तृतीय चरण 30 नवंबर से 2 दिसंबर, चौथा चरण 2 दिसंबर से 4 दिसंबर और पांचवा चरण 4 दिसंबर से 6 दिसंबर तक.सवीक्षा की तिथि –प्रथम चरण 29 नवंबर से 30 नवंबर, द्वितीय चरण 1 दिसंबर से 2 दिसंबर, तृतीय चरण 3 दिसंबर से 4 दिसंबर, चौथा चरण 5 दिसंबर से 6 दिसंबर, तथा पांचवा चरण 7 दिसंबर से 8 दिसंबर.अभ्यर्थिता वापसी तथा प्रतीक आवंटन की तिथिप्रथम चरण 2 दिसंबर, द्वितीय चरण 4 दिसंबर, तृतीय चरण 6 दिसंबर, चौथा चरण 8 दिसंबर, पांचवा चरण 10 दिसंबर है.मतदान की तिथि –प्रथम चरण 9 दिसंबर,द्वितीय चरण 11 दिसंबर,तृतीय चरण 13 दिसंबर,चौथा चरण 15 दिसंबर,पांचवा और अंतिम चरण 17 दिसंबर है.मतगणना की तिथि –प्रथम चरण – 9 दिसम्बर, मतदान के तुरंत पश्चात अथवा 10 दिसंबर.द्वितीय चरण – 11 दिसंबर को मतदान

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कहाँ गयी बाबू कुँवर सिंह की सुरंग ?

तो क्या किताब के पन्नो तक ही सिमट गई इतिहासकारी सुरंग ? किताबों में पढ़ा, लोगों से सुना,कि कुंवर सिंह ने लड़ा जंग, पर आंखें खोज रही किले तक जाने वाली बाबू वीर कुंवर सिंह का सुरंग Patna now Exclusive report आरा, 20 अक्टूबर. 1857 की क्रांति के नायक वीर बांकुड़ा बाबू कुँवर सिंह को कौन नही जानता. उनका नाम सुनते ही शौर्य से खून में रवानित आ जाती है और किले और वहाँ तक जाने के लिए सुरंग की बातें दिमाग मे घर कर लेती है. लेकिन सुरंग की बात को लेकर ऐसा लगता है कि कहीं ये काल्पनिक बातें तो नही. हालाँकि आरा हाउस में सुरंग की बची-खुची रचनाएं सुरंग होने का प्रमाण तो जरूर देती हैं लेकिन 23 किमी तक लंबे सुरंग का उद्गम और समापन कहाँ तक था इसपर कई तरह के मंतब्य हैं. 2 साल पहले काफी चर्चा में भी यह बात थी कि जब विजयोत्सव की 160वीं वर्षगाँठ मनाई गयी थी कि बाबू कुँवर सिंह की वह सुरंग जगदीशपुर के किले तक बनाया जाएगा जिसे पर्यटकों के लिए खोला जाएगा पर आरा हाउस की घेराबंदी तक कि काम सिमट गया. इतिहास बताता है कि 1857 में उत्तर और मध्य भारत में एक शक्तिशाली जनविद्रोह उठ खड़ा हुआ था जो ब्रिटिश शासन की जड़ें तक हिला कर रख दिया था. कहा जाता है कि इस विद्रोह का प्रमुख केन्द्र दिल्ली, कानपुर लखनऊ ,बरेली, झाँसी और आरा था. दिल्ली में प्रतीक रूप में कहने को विद्रोह के नेता सम्राट बहादुरशाह थे परन्तु वास्तविक नियंत्रण  एक सैनिक

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बर्तन उद्योग में धनी और हर हाथ को काम देता भोजपुर से सटे पटना का परेव

कोईलवर/भोजपुर (ब्यूरो रिपोर्ट) | परेव, जो भोजपुर जिले के कोईलवर पुल के पूर्वी छोर के पास स्थित एक बस्ती है, पीतल के बर्तन उद्योग और हर हाथ को काम देने के लिए प्रख्यात है. सोन नदी के पूर्वी तट पर स्थित औद्योगिक बस्ती परेव का भोजपुर जिला के कोईलवर से काफी गहरा संबंध है. शताब्दियों से परेव बस्ती में पीतल के बर्तनों का निर्माण होता आया है. सोन तट पर बसे होने से परेव की लसदार मिट्टी प्रारंभ में बर्तनों के सांचा निर्माण में मददगार रही. इसी ने यहां कुटीर उद्योग को प्रोत्साहित किया तथा यहां के कसेरा जाति के लोगों ने कुटीर उद्योग के रूप में अपनाकर इसे लघु उद्योग तक पहुंचाया. उद्योगों के मशीनीकरण से पहले यहां हर हाथ को काम हुआ करता था. आज भी इस बस्ती में अधिकतर लोग इसी रोजगार पर आश्रित हैं जिसके कारण कुछ परिवारों में यहां संपन्नता आई है. परेव में करीब आधा दर्जन बेलन मशीन और तीस-चालीस भट्ठियों की स्थापना हो गई है जिसमें स्थानीय लोगों के अलावा मिर्जापुर तथा और कई जगहों के कारीगर-मजदूर काम करते हैं. धनतेरस के मौके पर पीतल से निर्मित बर्तनों की मांग अधिक होती है. लेकिन मशीनीकरण के इस आधुनिक युग में भी परेव के पीतल के बर्तनों की चमक कम नहीं हुई है. फूल, पीतल, जर्मन सिलवर के सुनहरे बर्तन बाजार की शोभा बढ़ाते हैं. यहां की फूल की थाली, लोटा, कटोरा, ग्लास एवं डिश आदि की मांग बहुत हैं. परेव में निर्मित फूल, पीतल, जर्मन सिलवर के सुनहरे बर्तन स्थानीय बाजारों के अलावे

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सोन नदी पर बना लाइफ लाइन पुल ख’तरे में

भोजपुर (ब्यूरो रिपोर्ट) | पुल के खंभे के समीप नावों से बालू की अवैध उत्खनन व प्रेषण से 156 साल पुराने पुल की नींव को हिला रख दिया है. प्रतिदिन लगभग सैकड़ो नाव सोन नदी में पुल के इर्द गिर्द सरकार की मशीनरी को चुनौती देते हुए प्रतिबन्धित क्षेत्र में बालू का अवैध उत्खनन कर रहे है जिससे पुल के पिलर का प्लेटफाॅर्म (चबूतरा) टुकड़ों में बिखर गया है. प्लेटफॉर्म के नीचे करीब कई फुट तक खुदाई ने खतरे की घंटी बजा दी है. आशंका है कि सोन नदी की तेज धार कहीं कोइलवर पुल के पिलर के नीचे की जमीन ही न खिसका दे. भोजपुर का प्रवेश द्वार और आरा को राजधानी से जोड़ने वाला कोईलवर सोन नदी पर स्थित अब्दुलबारी पुल लाइफलाइन है. लेकिन बालू की अंधाधुंध कटाई से 156 साल पुराने रेल सह सड़क पुल पर खतरा मंडराने लगा है. पटना-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग से लगभग 200 यात्री ट्रेनें हर दिन गुजरती हैं. वहीं पुल के निचले भाग एनएच 30 से हजारों वाहन आते-जाते हैं. हर दिन करीब पांच लाख लोग पुल से सफर करते हैं. लोगों की मानें तो बालू माफियाओं की सक्रियता व प्रशासन की निष्क्रियता ने इस पुल की सुरक्षा पर संकट खड़ा कर दिया है. जिस कोइलवर पुल के प्लेटफॉर्म तक बालू की रेत उभरी रहती थी, वहां लगभग 10 फीट से अधिक गड्ढे होने के कारण प्लेटफॉर्म की ईंटे जीर्ण शीर्ण हो गयी हैं. इससे साफ है कि सरकारी मशीनरी गंभीर नहीं है जिसमे रेल प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन तक के

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न्यायाधीश संजय करोल | पटना हाइकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | पटना हाइकोर्ट आने वाले नए मुख्य न्यायाधीश संजय करोल मूलतः हिमाचल प्रदेश के हैं. जस्टिस संजय करोल का जन्म 23 अगस्त 1961 में शिमला में हुआ था. उन्होंने सेंट एडवर्ड स्कूल, शिमला से पास किया और गवर्नमेंट कॉलेज, संजौली से इतिहास ऑनर्स में स्नातक किया. करोल ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की. 1983 में एक वकील के रूप में एनरोल होने के बाद उन्होंने कई न्यायालयों में प्रैक्टिस किया. उन्होंने संवैधानिक, कराधान, कॉर्पोरेट, आपराधिक और नागरिक मामलों में भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी प्रैक्टिस किया. वे सुप्रीम कोर्ट में अंतर-राज्य जल विवाद (बीबीएमबी परियोजना) में परामर्शदाता के रूप में भी उपस्थित हुए थे. करोल 1998 से 2003 तक हिमाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल के रूप में संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन किया है. वर्ष 1999 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था. वे सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के लिए वरिष्ठ पैनल पर बने रहे. उन्हें 8 मार्च, 2007 को हिमाचल प्रदेश के उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया. 25 अप्रैल 2017 से उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया. न्यायमूर्ति करोल 14 नवंबर 2018 को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के चौथे मुख्य न्यायाधीश बने. ये भी पढ़ें – पटना हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस CJ एपी शाही का तबादला, उनकी जगह लेंगे संजय करोल 275 सहायक बंदोबस्त अधिकारी की बहाली का रिजल्ट | पटना हाईकोर्ट ने किया रद्द

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दुनिया का पहला नेटिव वीडियो कॉल असिस्टेंट (बॉट) | Reliance Jio

आईएमसी 2019 में दुनिया के पहले नेटिव वीडियो कॉल असिस्टेंट (बॉट) को प्रस्तुत किया जियो का पेटेंट फाइल्ड एआई आधारित ग्राहक सहभागिता प्लेटफॉर्म हेल्प-लाइन पर असंख्य कॉल्स को संभाल सकता है, लंबे इंतजार से मिलेगी मुक्ति जियो बॉट मेकर टूल अपने स्वयं के वीडियो कॉल असिस्टेंट बनाने के लिए छोटे व्यवसायों को सक्षम करके अधिक अवसर प्रदान करेगानई दिल्ली (ब्यूरो रिपोर्ट) | इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2019 में, रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (जियो) ने अपने पेटेंट-फाइल इनोवेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वीडियो कॉल असिस्टेंट (बॉट) को प्रस्तुत किया. इस बॉट को किसी अन्य एप्लीकेशन को इंस्टाल किए बिना एक 4जी फोन कॉल से एक्सेस किया जा सकता है.जियो ने प्रेस विज्ञप्ति के हवाले से बताया कि वीडियो कॉल असिस्टेंट में ग्राहक सहायता और ग्राहक संचार उपयोग मामलों में एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता है. इसके साथ, मौजूदा ग्राहक की सबसे बड़ी मुश्किल अंतहीन समय तक कॉल होल्ड म्यूजिक को सुनना या कभी खत्म ना होने वाला आईवीआर इंतजार, अब अतीत की चीजें बन सकती हैं.जियो के अबुसार, इनोवेटिव ग्राहक सहभागिता वीडियो असिस्टेंट सॉल्यूशन को जियो द्वारा अमेरिका स्थित रेडिसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सहायक कंपनी और दुनिया भर में सेवा प्रदाताओं को खुले दूरसंचार समाधान प्रदान करने के लिए एक लीडर कंपनी के साथ मिलकर विकसित किया गया है. एआई आधारित जियो वीडियो कॉल असिस्टेंट बिजनेसेज और अन्य उपयोगकर्ताओं को अपने ग्राहकों से दोहराए गए प्रश्नों के त्वरित और सरल समाधान के साथ सशक्त बनाता है, जिससे उनका फ्रंटएंड कम्युनिकेशन सहज हो जाता है. यह ब्रांडों को एक कुशल

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प्रशिक्षित शिक्षकों को अभी और करना होगा इंतजार। 23 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

पटना (राजेश तिवारी) | तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख……… जी हां यह एक फिल्मी डायलॉग है लेकिन NIOS से Dl.Ed किये हुए छात्रों के लिए यह तारीख काफी कष्टदायक नजर आ रही है और एक बार फिर मायूसी हाथ लगे हैं. पटना हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई लेकिन बिहार सरकार की लापरवाही के कारण एक बार फिर इन प्रशिक्षित शिक्षकों को थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा. आज पटना हाई कोट में सुनवाई के दौरान जैसे ही सुनवाई शुरू हुई शिक्षा विभाग के सरकारी वकील ने अपना पक्ष रखते हुए अदालत से दरखास्त किया कि अभी मेरी तैयारी पूरी नहीं हुई है इसलिए थोड़ा और समय दिया जाए इस पर माननीय कोर्ट ने शिक्षा विभाग के वकील को बात बात मानते हुए 1 सप्ताह का समय दिया है. अब अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी जिसमे शिक्षा विभाग अपना पक्ष रखेगी. हालाकि NIOS से Dl.Ed किए हुए प्रशिक्षित शिक्षकों को आज उम्मीद थी कि माननीय कोर्ट के द्वारा कम से कम फॉर्म भरने का समय मिलेगा. लेकिन बिहार सरकार की घोर लापरवाही की चलते एक बार फिर उन्हें अगली समय का इंतजार करना होगा.आपको बता दें कि बिहार के करीब ढ़ाई लाख प्रशिक्षित शिक्षक इस नियोजन प्रक्रिया से बाहर है. दरअसल मामला नियोजन प्रक्रिया शुरु होने के समय बिहार सरकार ने एनसीटीई से मार्गदर्शन मांगा था कि इन एनआईओएस से डीएलएड की हुए शिक्षकों को क्या किया जाए. जिस पर NCTE ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया, जिसके बाद बिहार सरकार ने इन सबको नियोजन प्रक्रिया

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अनूप मास्टर कोर्स 2019 समारोह का उद्घाटन

पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | शनिवार राजधानी के न्यू पटना क्लब में अनूप मास्टर कोर्स 2019 समारोह का उद्घाटन हुआ. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मंगल पांडेय, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री उपस्थित थे. कार्यक्रम का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, डॉ० आशीष, पद्मश्री डॉ० आर. एन सिंह सहित कई गणमान्य अतिथियों के द्वारा संयुक्त रूप से दीपप्रज्ज्वलन कर किया गया. इस आयोजन के अध्यक्ष डॉ० आशीष ने बताया कि अनूप मास्टर कोर्स में इस वर्ष का विषय “टोटल हिप्स रिप्लेसमेंट (total hip replacement) संबंधित विकार और कूल्हा संरक्षण तकनीक पर चर्चा है. इस मास्टर कोर्स का मुख्य आर्कषण Exeter hip course रहेगा. 12 से 13 अक्टूबर तक चलने वाले अनुप मास्टर कोर्स 2019 का आयोजन मौर्य होटल में हो रहा है, जिसमें देश विदेश से 300 प्रसिद्ध चिकित्सकों हिस्सा ले रहे हैं जो इन विषयों के साथ शरीर में होने वाले हड्डियों के विकार में चर्चा करेंगे. समारोह में पद्मश्री डॉ० आर. एन सिंह कहा कि अनूप मास्टर कोर्स का ये दूसरा संस्करण है. इस कोर्स का 2018 में आयोजन बेहद सफल रहा था. इस वर्ष भी देश दुनिया से आये सुप्रसिद्ध डॉक्टर अपने अपने विषयों पर चर्चा में भाग लेंगे जिससे कई नई तकनीक से लोगों को अवगत कराया जायेगा. इसका लाभ सभी को आगे जाकर कर मिलेगा. मुख्य अतिथि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सभी डॉक्टर्स को शुभकामनायें दी तथा बिहार में ऐसे आयोजन करने के लिये डॉ० आशीष एंड टीम को साधुवाद दिया. इस अवसर पर उन्होने डॉ० आशीष द्वारा लिखित पुस्तक “टोटल हिप

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वाहन पर नंबर प्लेट के अलावे कुछ भी लिखाया तो होगी कार्रवाई

वाहन के नंबर प्लेट या बॉडी पर नाम, जाति, धर्म या प्रोफेशन लिखने वाले वाहन चालकों पर लगाया गया जुर्मानापटना सहित सभी जिलों में चला विशेष अभियान, लगभग 356 वाहन चालकों पर की गई कार्रवाईनंबर प्लेट पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के अलावा कुछ और लिखवाना गैरकानूनी – परिवहन सचिवसभी वाहनों में एच.एस.आर.पी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्यनियमों का उल्लंघन करने पर मोटरवाहन अधिनियम के तहत की जाएगी कार्रवाईकुछ लोग नियमों का उल्लंघन कर पापा 4141, BOSS 8055, पॉलिटिकल पार्टी का नाम, नेता का नाम वाहन पर लिखाते हैं पटना (ब्यूरो रिपोर्ट) | राजधानी सहित राज्य के सभी जिलों में शनिवार को विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया. इसके तहत वाहनों के नंबर प्लेट या बॉडी पर नाम, पदनाम, जाति, प्रतीक चिन्ह आदि लिखे वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई. करीब 256 वाहन चालकों पर कार्रवाई करते हुए उनसे जुर्माना वसूला गया.परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि वाहनों के नंबर प्लेट पर नंबर के अतिरिक्त कुछ भी लिखना गैरकानूनी है. सभी वाहनों में एच. एस. आर.पी नंबर प्लेट का होना अनिवार्य है. इसका उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की जाएगी. परिवहन सचिव ने बताया कि वाहनों के नंबर प्लेट या बॉडी पर जाति, धर्म, प्रोफेशन, नाम, प्रतीक, फोटो या अन्य किसी चीज को लिख कर वाहन चलाने से अन्य वाहन चालकों का ध्यान बंटता है और दुर्घटना भी होती है. मोटर वाहन अधिनियम के तहत नंबर प्लेट के लिए एक निश्चित मानक निर्धारित किया गया है.नियमानुसार नम्बर प्लेट पर रोमन या अरेबिक फॉन्ट में ही नम्बर लिखवा सकते

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