क्या! गीतों में भीग गए श्रोता..!

सूखे सावन में रिमझिम फुहारों की तरह बरसी कजरी
गीतों की बरसात में भींगे श्रोता, उठाया सावन का आनन्द

आरा , 5अगस्त. सावन का नाम आते ही रिमझिम बूंदे दिमाग में आती है और इन बूंदों में जो भीगने का आनंद का है उसे बयान करना मुश्किल है. लेकिन इस बार सावन में इन फुहारों ने लुकाछिपी खेल रखी है. कहा जाता है लोकगीतों में बहुत ताकत होती और यह ताकत रविवार को दिखी मठिया प्रांगण में आयोजित कजरी महोत्सव में जहां लोक धुनों में बिन बारिश ही श्रोता और दर्शक भीग घर सराबोर हो गए.





रविवार को नेशनल साइंटिफिक रिसर्च एवं एनालिसिस ट्रस्ट ने सावन के मौसम में मठिया प्रांगण में स्थित अपने कार्यालय में कजरी महोत्सव का आयोजन किया,जिसका उद्घाटन बड़ी मठिया के महंत आचार्य रामकिंकर दास जी महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया.

उन्होंने कहा कि कजरी हमारे समाज की लोक संस्कृति है जो आदिकाल, राम और कृष्ण के काल से चली आ रही है. सावन के मौसम में हरा रंग धरती की हरियाली का प्रतीक है, वही सावन की रिमझिम फुहार मन को आनंदित कर देती है. इस मौके पर लोक गायक नगेंद्र पांडे ने भी कजरी के लोक-जीवन में महत्व पर प्रकाश डाला. इस मौके पर रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया, जिसकी शुरुआत देवी गीत से की गई से की गई.

उसके बाद राजा बसंत बहार ने अपनी सुरीली आवाज से कजरी को सब के कानों तक पहुँचाया. युवा और नए उभरते गायक अविनाश पांडे ने भी इस मौके पर अपने आवाज का जादू बिखेरा. उपस्थित लोगों ने सुरमई आवाजों के बीच सावन का भरपूर आनंद उठाया सावन की इस मौसम में भले ही रिमझिम फुहारे ना हो रही हो लेकिन लोकगीतों की इन फुहारों में उपस्थित श्रोतागण भीग कर तृप्त हो गए.

कार्यक्रम में कई कलाकारों ने मनोहारी गीत संगीत और नृत्य के माध्यम से सावन के दृश्य को उपस्थित करते हुए श्रोताओं को कजरी के रंग में रंग दिया. “अरे रामा उमड़ी घुमड़ी के बरसेला बदरिया हो रमा ….”, सावन झरी लागे हो रामा …जैसे अनेकों गीत और उस पर बच्चियों ने कृष्ण व राधा का रूप लिए बाल कलाकार सगुन और परिधि ने कजरी को मूर्त रूप प्रदान किया. कार्यक्रम संचालन रंगकर्मी मनोज सिंह ने किया तथा संयोजन संजय नाथ पाल, निशिकांत ,और विभूति ने किया. कार्यक्रम में गायक कलाकार राजा बसंत ,नागेंद्र नाथ पांडेय , श्याम शर्मिला, अविनाश पांडेय, प्रमोद सिंह, तारकेश्वर चौबे, संतोष बाबा, ब्रजेन्द्र मिश्र, और राकेश मिश्रा ने अपनी आवाज से सावन की घटा की छँटा बिखेर दी जिसपर संगत तबला और नाल पर चंदन ठाकुर ,देवेश दुबे ,अभय ओझा, और किसन ने साथ दिया. समुह गायन पलक, शालू, सुनैना ,लवली ,पूजा कुमारी,सगुन,परिधि, निक्की कुमारी और शालिनी शामिल थी. उदघोषणा वरिष्ठ रंगकर्मी मनोज सिंह ने किया तथा अपने गायकी से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया. अपने संबोधन में पत्रकार डॉ.पंकज सुधांशु ने भोजपुरी के विकास और महत्व पर प्रकाश डालते हुए एक मर्मस्पर्शी भोजपुरी गीत प्रस्तुत किया व संस्था के कार्यो की सराहना की. धन्यवाद ज्ञापन ट्रस्ट कोषाध्यक्ष वीणा सहाय व अध्यक्ष श्याम कुमार ने सम्मिलित रूप से किया .

आरा से ओ पी पांडेय की रिपोर्ट