…तो सिर्फ सोशल मीडिया तक ही “महिला दिवस” की सार्थकता !

पोस्टरों में जिन्हें समानता नही उनके जीवन मे कैसे आएगी समानता ? आरा, 8 मार्च. आज विश्व महिला दिवस है जिसपर अहले सुबह से ही सोशल मीडिया पर तमाम तरह के मैसेजेज और पोस्ट देखने को मिल रहे हैं. सोशल मीडिया अंधाधुंध पोस्ट शेयर की जैसे बाजी लगी हो वैसा प्रतीत हो रहा है. कोई किसी के मैसेज को फारवर्ड कर रहा है तो कोई शेयर कर रहा है. कोई कॉपी-पेस्ट से काम चला रहा है तो कोई सहित्यिक किताबो के पन्ने पलट अच्छी लाइनें खोज प्रभावी बातों को शेयर करने के लिए माथापच्ची कर रहा है. इन सबके बीच एक युवा और ऊर्जावान समाजिक कार्यकर्ता है जो बातें कम और काम पर अपने ध्यान को केंद्रित रखता है उसने बातें महिला दिवस को लेकर लिखी है। ऊर्जावान और युवाओं के बीच अपने कार्यों को लेकर चर्चित युवा कोई और नही बल्कि जिले के ही शैलेश कुमार राय हैं. शैलेश को सामाजिक कार्य के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक ने सम्मानित किया है. आइये जानते हैं क्या सोचते हैं शैलेश महिलाओं के लिए और उनके बारे में जो सालों तक चुप्पी के बाद सिर्फ महिलाओं के दिवस के दिन उनका हितैषी बनकर सोशल मीडिया पर मैसेजासुर बन जाते हैं. आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है,सुबह से ही सोशल मीडिया पर अनेकों शेरो-शायरी के साथ शुभकामनाएं मिल रहे है,अच्छा लगता है देखकर आज व्यस्ततम भरे दौर में हम कम-से-कम दिवसों को सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से मना कर अपनी प्रवृत्ति जाहिर कर देते है. लेकिन आज महिला दिवस है और सोशल मीडिया

Read more